तमिलनाडु: CM विजय ने गृह, पुलिस और सार्वजनिक प्रशासन विभाग अपने पास रखे, मंत्रिमंडल का पोर्टफोलियो तय
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली विभाग — गृह, पुलिस और सार्वजनिक प्रशासन — अपने पास रखने का निर्णय किया है। 10 मई 2026 को शपथ लेने के एक सप्ताह से भी कम समय में विभागों का यह औपचारिक बंटवारा पूरा कर लिया गया, जिसे नई सरकार के प्रशासनिक ढाँचे की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मुख्यमंत्री की सिफारिशों के आधार पर इस आवंटन को औपचारिक मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री के पास कौन-कौन से विभाग
मुख्यमंत्री विजय के पास सार्वजनिक प्रशासन, पुलिस, गृह, विशेष कार्यक्रम क्रियान्वयन, महिला कल्याण, युवा कल्याण, बाल कल्याण, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजन कल्याण, नगर प्रशासन और शहरी जलापूर्ति जैसे विभाग रहेंगे। इससे राज्य के कानून-व्यवस्था और नागरिक प्रशासन पर सीधा नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय के पास केंद्रित हो गया है।
अन्य मंत्रियों को मिले विभाग
वरिष्ठ नेता के. ए. सेंगोत्तैयन को वित्त विभाग के साथ-साथ पेंशन और पेंशन भत्तों की जिम्मेदारी सौंपी गई है — जो सरकार की आर्थिक नीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण पद है।
एन. आनंद को ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग दिया गया है, जिसमें सिंचाई परियोजनाएँ और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शामिल हैं। आधव अर्जुन लोक निर्माण और खेल विकास विभाग संभालेंगे।
केजी अरुणराज को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। पी. वेंकटरमणन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग संभालेंगे।
आर. निर्मलकुमार को ऊर्जा संसाधन और कानून विभाग सौंपा गया है — इनके पास बिजली, न्यायालय, जेल और विधायी मामलों की जिम्मेदारी भी रहेगी। राजमोहन स्कूल शिक्षा, तमिल विकास और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग देखेंगे।
टीके प्रभु प्राकृतिक संसाधन और खनन से जुड़े विभागों की बागडोर संभालेंगे। मंत्रिमंडल की सबसे युवा सदस्य सेल्वी एस. कीर्तना को उद्योग और निवेश प्रोत्साहन विभाग दिया गया है — जो राज्य की आर्थिक वृद्धि के लिए रणनीतिक रूप से अहम है।
विभागीय ढाँचे का संकेत
विभागों के इस बंटवारे से स्पष्ट है कि विजय सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मामलों पर सीधा नियंत्रण बनाए रखना चाहती है, जबकि विकास और क्षेत्रीय जिम्मेदारियाँ अनुभवी एवं युवा मंत्रियों के बीच वितरित की गई हैं। गौरतलब है कि नई सरकारों में गृह और पुलिस जैसे विभागों को मुख्यमंत्री द्वारा अपने पास रखना राजनीतिक रूप से सामान्य प्रवृत्ति है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में विभागों का एकत्रीकरण प्रशासनिक केंद्रीकरण की स्पष्ट मंशा दर्शाता है।
आगे की राह
विभागों का बंटवारा पूरा होने के बाद अब विजय सरकार नीति क्रियान्वयन, प्रशासनिक पुनर्गठन और पहले पूर्ण विधानसभा सत्र की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करेगी। आने वाले हफ्तों में सरकार की नीतिगत प्राथमिकताएँ और अधिक स्पष्ट होंगी।