मांझी ने काफिले में 50% वाहन घटाए, PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील पर बड़ा कदम

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मांझी ने काफिले में 50% वाहन घटाए, PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील पर बड़ा कदम

सारांश

PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने काफिले में 50% वाहन घटाए और सहकर्मियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने का निर्देश दिया। बिहार के कृषि विश्वविद्यालय में 'नो व्हीकल डे' भी मनाया गया — वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच सरकारी स्तर पर मितव्ययिता का संदेश।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत घटाई।
काफिले में अब केवल न्यूनतम आवश्यक वाहन रहेंगे; सहकर्मियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने का निर्देश।
PM मोदी ने पेट्रोलियम व ऊर्जा संसाधनों की बचत के लिए देशवासियों से अपील की थी।
बिहार के कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार को 'नो व्हीकल डे' मनाया गया — कर्मचारी पैदल व साइकिल से कार्यालय पहुँचे।
विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 16 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोलियम और ऊर्जा संसाधन बचत की अपील पर अमल करते हुए अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटा दी। अब उनके काफिले में केवल न्यूनतम आवश्यक वाहन ही शामिल रहेंगे। यह कदम मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार की मितव्ययिता की दिशा में एक ठोस संकेत माना जा रहा है।

मांझी का निर्देश और पहल

मांझी ने काफिले में कटौती के साथ-साथ अपने सभी विभागीय सहकर्मियों को भी अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जहाँ तक संभव हो, सभी कर्मचारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही कार्यालय पहुँचें, ताकि वैश्विक संकट के इस दौर में भारत को ऊर्जा-सुरक्षित और सशक्त बनाए रखा जा सके।

PM मोदी की अपील की पृष्ठभूमि

मांझी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट वैश्विक स्तर पर है और देश में पेट्रोलियम व ऊर्जा संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से व्यक्तिगत स्तर पर बचत करने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'हमारा यह दायित्व बनता है कि हम सब प्रधानमंत्री की अपील पर अमल करें और भारत को किसी संकटकाल में जाने से बचाएं।'

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 'नो व्हीकल डे'

इसी पहल के अनुरूप बिहार के एक कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार को 'नो व्हीकल डे' मनाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले ही आदेश जारी किया था कि सभी कर्मचारी और अधिकारी पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचें। रिपोर्टों के अनुसार, सभी ने इस आदेश का पालन पूरी गंभीरता से किया और कर्मचारियों में उत्साह भी देखा गया।

कुलपति का संदेश और पर्यावरणीय लाभ

विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस अवसर पर बयान जारी करते हुए कहा कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पैदल या साइकिल से आना-जाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है। यह पहल आने वाले दिनों में अन्य सरकारी संस्थानों के लिए एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह पहल केवल घोषणा तक सीमित रहेगी या इसे संस्थागत नीति का रूप मिलेगा। भारत सरकार के वाहन बेड़े पर हर साल करोड़ों रुपये का ईंधन खर्च होता है, और यदि सभी केंद्रीय मंत्री इसी तर्ज पर कदम उठाएँ तो बचत उल्लेखनीय हो सकती है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय का 'नो व्हीकल डे' एक सराहनीय स्थानीय पहल है, परंतु इसे टिकाऊ बनाने के लिए नियमित अनुपालन और जवाबदेही तंत्र जरूरी है। बिना व्यापक नीतिगत ढाँचे के, ऐसी पहलें मीडिया की सुर्खियों से आगे नहीं जातीं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने काफिले में कितने वाहन घटाए?
मांझी ने अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम कर दी है। अब काफिले में केवल न्यूनतम आवश्यक वाहनों का ही उपयोग होगा।
PM मोदी ने ऊर्जा बचत की अपील क्यों की?
मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर PM मोदी ने देशवासियों से पेट्रोलियम और ऊर्जा संसाधनों की बचत करने की अपील की है। इसका उद्देश्य भारत को किसी ऊर्जा संकट से बचाना और देश को सशक्त बनाए रखना है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 'नो व्हीकल डे' क्या है?
'नो व्हीकल डे' के तहत विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचने का निर्देश दिया गया था। यह पहल PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील के अनुरूप शनिवार को मनाई गई।
मांझी ने अपने सहकर्मियों को क्या निर्देश दिया?
मांझी ने अपने विभागीय सहकर्मियों को अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जहाँ तक संभव हो, सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही आवागमन करें।
इस ऊर्जा बचत पहल का पर्यावरण पर क्या असर होगा?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार, पैदल चलना और साइकिल चलाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। वाहनों के उपयोग में कमी से ईंधन की खपत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
राष्ट्र प्रेस
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