एनडीबी अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ का ऐलान: वैश्विक दक्षिण के विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर रहेगा फोकस

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एनडीबी अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ का ऐलान: वैश्विक दक्षिण के विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर रहेगा फोकस

सारांश

मॉस्को में एनडीबी की 2026 वार्षिक बैठक में अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ ने साफ़ किया — बैंक का अगला पड़ाव वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताएँ हैं। भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार युद्धों के बीच यह संदेश बताता है कि ब्रिक्स का यह वित्तीय स्तंभ पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प के रूप में अपनी भूमिका और मज़बूत करने की राह पर है।

मुख्य बातें

एनडीबी अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ ने 15 मई 2026 को घोषणा की कि बैंक वैश्विक दक्षिण की प्राथमिक चिंताओं और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
एनडीबी की 2026 वार्षिक बैठक 14-15 मई को मॉस्को में 'तकनीकी क्रांति के युग में विकास वित्त' विषय पर आयोजित हुई।
रूसेफ ने आर्थिक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और तकनीकी बदलाव को वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियाँ बताया।
रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने वीडियो संदेश में एनडीबी को वैश्विक दक्षिण की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
एनडीबी की स्थापना 21 जुलाई 2015 को शंघाई में हुई थी; यह ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित बहुपक्षीय वित्तीय संस्था है।

नव विकास बैंक (एनडीबी) की अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ ने 15 मई 2026 को स्पष्ट किया कि एनडीबी आने वाले समय में वैश्विक दक्षिण के देशों की प्राथमिक विकास चिंताओं को केंद्र में रखकर दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मज़बूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक सभी सदस्य देशों को साझा विकास चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

मॉस्को में वार्षिक बैठक का आयोजन

एनडीबी की 2026 वार्षिक बैठक 14 और 15 मई को मॉस्को में आयोजित की गई। इस बैठक का केंद्रीय विषय था — 'तकनीकी क्रांति के युग में विकास वित्त'15 मई को हुए उद्घाटन समारोह में रूसेफ ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य की गंभीर चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अर्थव्यवस्था आर्थिक अस्थिरता, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, एकतरफावाद, व्यापार युद्ध, वित्तीय अनिश्चितता और तेज़ तकनीकी बदलाव जैसी बहुआयामी चुनौतियों से जूझ रही है, जिनका असर दुनिया भर के देशों पर पड़ रहा है।

रूसेफ की मुख्य बातें: लचीलापन और वित्तीय संसाधन

रूसेफ के अनुसार, 'ऐसी स्थिति में एनडीबी को तैयार रहना होगा, अपनी लचीलापन क्षमता बढ़ानी होगी और साझा सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। विश्वसनीय वित्तीय संसाधन आज सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और डॉलर-केंद्रित वैश्विक वित्त व्यवस्था के विकल्प की तलाश वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक अहम मुद्दा बन चुकी है। गौरतलब है कि एनडीबी की स्थापना ही इस सोच के साथ हुई थी कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पश्चिम-प्रभुत्व वाली संस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

रूस के प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश

उद्घाटन समारोह में रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने वीडियो संदेश के ज़रिए संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एनडीबी वैश्विक दक्षिण की वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है।

मिशुस्टिन के अनुसार, एनडीबी में एक नवोन्मेषी अंतरराष्ट्रीय बैंक बनने की पूरी क्षमता है — जो देशों को विकास की प्राथमिकताएँ तय करने, बेहतर विकास मॉडल चुनने और शुरुआती से लेकर दीर्घकालिक निवेश तक के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि रूस एक निष्पक्ष और टिकाऊ वैश्विक वित्तीय प्रणाली की वकालत करता है, जिससे वैश्विक दक्षिण के देशों को अधिक अवसर मिल सकें।

एनडीबी: पृष्ठभूमि और उद्देश्य

एनडीबी का आधिकारिक उद्घाटन 21 जुलाई 2015 को शंघाई में हुआ था। यह ब्रिक्स देशों — ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका — द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है। इसका मूल उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है।

बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय सहयोग के ज़रिए एनडीबी वैश्विक विकास में योगदान देने का प्रयास करता है। आने वाले वर्षों में बैंक की भूमिका और विस्तार, विशेष रूप से नए सदस्य देशों को जोड़ने की दिशा में, एक महत्वपूर्ण परीक्षण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परत के नीचे एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संकेत है — ब्रिक्स देश पश्चिम-प्रभुत्व वाली वित्तीय व्यवस्था के समानांतर एक वैकल्पिक ढाँचा खड़ा करने की कोशिश में हैं। रूसेफ का 'लचीलापन और साझा सुरक्षा' वाला बयान महज़ बैंकिंग शब्दावली नहीं है — यह उन देशों की आवाज़ है जो डॉलर-केंद्रित प्रतिबंध-तंत्र से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। हालाँकि, एनडीबी की साख तब तक अधूरी रहेगी जब तक वह अपनी परियोजनाओं के ठोस विकास परिणाम — रोज़गार, बुनियादी ढाँचा, जलवायु लक्ष्य — पारदर्शी तरीके से सामने नहीं रखता।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नव विकास बैंक (एनडीबी) क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
एनडीबी ब्रिक्स देशों — ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका — द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है, जिसका आधिकारिक उद्घाटन 21 जुलाई 2015 को शंघाई में हुआ था। इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढाँचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना है।
एनडीबी की 2026 वार्षिक बैठक में क्या मुख्य निर्णय हुए?
एनडीबी की 2026 वार्षिक बैठक 14-15 मई को मॉस्को में हुई, जिसका विषय 'तकनीकी क्रांति के युग में विकास वित्त' था। अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ ने घोषणा की कि बैंक वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
दिल्मा रूसेफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की किन चुनौतियों का ज़िक्र किया?
रूसेफ ने आर्थिक अस्थिरता, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, एकतरफावाद, व्यापार युद्ध, वित्तीय अनिश्चितता और तेज़ तकनीकी बदलाव को प्रमुख चुनौतियाँ बताया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में एनडीबी को अपनी लचीलापन क्षमता बढ़ानी होगी और विश्वसनीय वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने होंगे।
रूस के प्रधानमंत्री मिशुस्टिन ने एनडीबी के बारे में क्या कहा?
रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने वीडियो संदेश में कहा कि एनडीबी वैश्विक दक्षिण की वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है और इसमें एक नवोन्मेषी अंतरराष्ट्रीय बैंक बनने की क्षमता है। उन्होंने रूस की ओर से एक निष्पक्ष और टिकाऊ वैश्विक वित्तीय प्रणाली की वकालत की।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एनडीबी की भूमिका क्या होगी?
एनडीबी अध्यक्ष के अनुसार, बैंक सदस्य देशों की प्राथमिक चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी पक्षों को साझा विकास चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग का विस्तार उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पारंपरिक पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं के विकल्प तलाश रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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