दिलमा रूसेफ का भारत के 'विकसित भारत' लक्ष्य के लिए एनबीडी का समर्थन
सारांश
Key Takeaways
- दिलमा रूसेफ का भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य एनबीडी का समर्थन करना है।
- निर्मला सीतारमण ने वैश्विक सर्वोत्तम अनुभव की आवश्यकता पर बल दिया।
- बैठक में निजी निवेश और बुनियादी ढांचे को सशक्त करने पर चर्चा हुई।
- भारत और एनबीडी के बीच सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए।
- अमेरिका का ईरान को चेतावनी देना वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनबीडी) की अध्यक्ष दिलमा रूसेफ से नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस चर्चा में विकसित भारत के लक्ष्य, भारत-एनबीडी सहयोग को सशक्त बनाने, निजी निवेश में वृद्धि और बुनियादी ढांचे एवं शहरी विकास में साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विचार किया गया।
बैठक में दिलमा रूसेफ ने भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण की सराहना की, इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मजबूत आधार बताते हुए कहा कि एनबीडी इस दिशा में सहारा देने के लिए तत्पर है। उन्होंने भारत की सफल पहलों जैसे परिवहन प्रणाली का एकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की इच्छा व्यक्त की।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबीएस) वैश्विक सर्वोत्तम अनुभव और तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके न केवल बुनियादी ढांचे बल्कि शहरी विकास में भी नए समाधान पेश कर सकते हैं।
बैठक में भारत के निजी क्षेत्र और एनबीडी के बीच सहयोग बढ़ाने, निजी पूंजी को आकर्षित करने, एनबीडी को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई।
निर्मला सीतारमण ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस मुलाकात का उल्लेख करते हुए लिखा, "प्रेसिडेंट दिलमा रूसेफ ने भारत और एनबीडी के बीच संबंधों को मजबूत करने का आश्वासन दिया और भारत के विजन 2047 को समर्थन देने के लिए गहरे सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।"
जहां एक ओर तेल और गैस पर वैश्विक संकट का खतरा बना हुआ है, वहीं भारत अन्य देशों से अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। युद्ध के कारण बने वैश्विक संकटों में एक-दूसरे का सहयोग महत्वपूर्ण है।
हाल ही में ईरान पर हॉर्मुज स्ट्रेट के संबंध में कड़े प्रतिबंधों ने वैश्विक संकट उत्पन्न कर दिया है। व्यापार ठप होने से अन्य देशों में महंगाई की समस्या बढ़ने लगी है। इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तेल के प्रवाह में रुकावट लाने की कोशिश की गई, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।