तमिलनाडु में 'सिंगप्पेन' STF का आगाज़: पहले चरण में 70 इकाइयाँ तैनात, महिला सुरक्षा होगी मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 10 जून 2026 (बुधवार) से पूरे राज्य में 'सिंगप्पेन' स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के पहले चरण की शुरुआत की, जो विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए गठित एक सर्व-महिला पुलिस इकाई है। मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की पहल पर स्थापित यह बल राज्य की कानून-व्यवस्था में एक नई दिशा का प्रतीक है।
पहले चरण की तैनाती: कहाँ-कहाँ होंगी इकाइयाँ
पहले चरण में 70 सिंगप्पेन इकाइयाँ राज्यभर में सक्रिय होंगी। प्रत्येक जिले में कम से कम एक इकाई की तैनाती सुनिश्चित की गई है। चेन्नई की अधिक जनसंख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए यहाँ 12 इकाइयाँ विभिन्न स्थानों पर तैनात की जाएंगी।
तांबरम और अवाड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत चार-चार इकाइयाँ काम करेंगी, जबकि तमिलनाडु के अन्य पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्रों में दो-दो इकाइयाँ तैनात रहेंगी। ग्रेटर चेन्नई पुलिस क्षेत्र में इस बल की सर्वाधिक उपस्थिति रहेगी।
बल की संरचना और कार्यप्रणाली
प्रत्येक सिंगप्पेन इकाई में प्रारंभिक चरण में दो महिला सब-इंस्पेक्टर और एक महिला पुलिस कांस्टेबल शामिल होंगी, जो नियमित गश्त का कार्य करेंगी। पुलिस विभाग ने राज्यभर से 140 महिला सब-इंस्पेक्टर और 420 महिला पुलिसकर्मियों का चयन किया है।
ये इकाइयाँ 24 घंटे रोटेशन के आधार पर कार्य करेंगी, ताकि निरंतर पुलिस उपस्थिति और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके। यह बल मूल रूप से महिला पुलिसकर्मियों से गठित है; आवश्यकता पड़ने पर पुरुष पुलिसकर्मी वाहन-चालन और अन्य सहायक कार्यों में सहयोग करेंगे।
संसाधन और तकनीकी सहयोग
राज्य सरकार ने इस बल के लिए 319 चार पहिया वाहन और 101 दो पहिया वाहन खरीदने की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के लिए एक विशेष संपर्क व्यवस्था भी शुरू की जाएगी, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और समर्पित मोबाइल नंबर शामिल होंगे — जिससे महिलाएँ सीधे मदद माँग सकेंगी।
फिलहाल, आपात स्थिति में महिलाएँ पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 पर संपर्क कर सकती हैं।
विस्तार की योजना और आगे का रोडमैप
यह पहल चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। योजना के अनुसार, सिंगप्पेन इकाइयों की कुल संख्या बढ़ाकर 270 तक पहुँचाई जाएगी, जो पूरे तमिलनाडु में फैली रहेंगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पहल निवारक पुलिसिंग को सशक्त बनाएगी, प्रतिक्रिया समय में कमी लाएगी और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित सार्वजनिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में यह बल किस हद तक ज़मीनी स्तर पर महिला सुरक्षा के आँकड़ों को बदल पाता है।