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तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था पर एमके स्टालिन का मुख्यमंत्री विजय पर तीखा हमला, 'साइलेंट मोड' छोड़ने की माँग

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तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था पर एमके स्टालिन का मुख्यमंत्री विजय पर तीखा हमला, 'साइलेंट मोड' छोड़ने की माँग

सारांश

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय को सीधी चुनौती दी — महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर 'साइलेंट मोड' छोड़ें या बड़े जन-आंदोलन के लिए तैयार रहें। तमिलनाडु में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच यह टकराव राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

मुख्य बातें

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने 16 जून को मुख्यमंत्री विजय की सरकार पर कानून-व्यवस्था में विफलता का आरोप लगाया।
स्टालिन ने 'सिंगप्पेन पड़ई' महिला सुरक्षा बल के दावों के बावजूद अपराधियों के बेखौफ रहने पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री विजय की हालिया घटनाओं पर चुप्पी को 'साइलेंट मोड' करार देते हुए जवाब माँगा।
स्टालिन ने नई सरकार के शुरुआती महीनों में संयम बरतने के सुझावों को खारिज किया; महिला-बच्चा सुरक्षा को DMK की प्राथमिकता बताया।
स्थिति न सुधरने पर DMK के बड़े जन-विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार, 16 जून को राज्य की गठबंधन सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर मौन साधने का आरोप लगाते हुए पूछा कि आखिर वे 'साइलेंट मोड' से कब बाहर आएंगे। स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो DMK बड़ा जन-आंदोलन करेगी।

मुख्य आरोप और सवाल

स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार जनता के बीच व्याप्त भय और आशंका को अनदेखा नहीं कर सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि सक्षम पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और महिला सुरक्षा बल 'सिंगप्पेन पड़ई' के गठन के बार-बार दावों के बावजूद क्या मुख्यमंत्री उन माता-पिता का दर्द नहीं सुन पा रहे जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि अपराध रोकने और जनता का भरोसा बहाल करने के लिए अब तक क्या ठोस व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री की चुप्पी पर निशाना

स्टालिन ने परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री विजय की हालिया घटनाओं पर चुप्पी को लेकर तीखा सवाल दागा। उन्होंने पूछा, 'जनता की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात करने के लिए मुख्यमंत्री की कॉल शीट कब आएगी? अपराधियों को बेखौफ होकर वारदात करने से रोकने के लिए आखिर कौन-से ठोस कदम उठाए गए हैं?'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों से जुड़ी कई संवेदनशील घटनाएँ सामने आई हैं, जिन पर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है।

विपक्ष की भूमिका पर DMK का रुख

स्टालिन ने उन आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि नई सरकार के शुरुआती महीनों में विपक्ष को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े मुद्दों — विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा — पर सवाल उठाना DMK की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इस पर वे कभी चुप नहीं रहेंगे।

बड़े आंदोलन की चेतावनी

स्टालिन ने सरकार को आगाह किया कि यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो DMK बड़ा जन-विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, 'लोगों की जान और बच्चों की सुरक्षा खतरे में होने पर क्या आप मुझसे चुप रहने की उम्मीद करते हैं, या आप DMK के बड़े विरोध प्रदर्शन को न्योता दे रहे हैं?'

यह टकराव आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकता है, खासकर तब जब विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों जनता के बीच अपनी साख बनाए रखने की होड़ में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह भी है कि DMK के अपने शासनकाल में महिला सुरक्षा के आँकड़े कितने बेहतर थे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस संदर्भ को नज़रअंदाज़ करती है। विजय सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि वह आरोपों का जवाब बयानों से नहीं, बल्कि सत्यापन-योग्य परिणामों से दे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर क्या आरोप लगाए?
स्टालिन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चुप हैं और सरकार कानून-व्यवस्था सुधारने में नाकाम रही है। उन्होंने विजय को 'साइलेंट मोड' से बाहर आने और ठोस कदम उठाने की माँग की।
'सिंगप्पेन पड़ई' क्या है और स्टालिन ने इस पर क्या सवाल उठाए?
'सिंगप्पेन पड़ई' तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित महिला सुरक्षा बल है। स्टालिन ने सवाल किया कि इस बल के गठन और सक्षम पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति के दावों के बावजूद अपराधी बेखौफ क्यों हैं और माता-पिता की पीड़ा कम क्यों नहीं हुई।
स्टालिन ने किस बड़े आंदोलन की चेतावनी दी?
स्टालिन ने कहा कि यदि सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं सुधारती तो DMK बड़ा जन-विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार DMK के बड़े आंदोलन को न्योता दे रही है।
क्या विपक्ष को नई सरकार की शुरुआत में आलोचना से बचना चाहिए?
स्टालिन ने इस सुझाव को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा दांव पर हो तो जनता के मुद्दे उठाना DMK की जिम्मेदारी है और वे इस पर चुप नहीं रहेंगे।
इस विवाद का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह टकराव नई गठबंधन सरकार के लिए शुरुआती महीनों में ही बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। DMK के आंदोलन की चेतावनी से सरकार पर कानून-व्यवस्था पर तत्काल जवाब देने का दबाव बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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