तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन मैटरनिटी लीव, इंडिया गठबंधन ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार ने राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम निर्णय लेते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की पूर्ण मातृत्व अवकाश देने की घोषणा की है। इससे पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी। इस फैसले को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने व्यापक रूप से सराहा है।
मुख्य घटनाक्रम
तमिलनाडु सरकार के इस निर्णय को गिरती जन्म दर की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने बताया कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया — 2022-23 में उमा देवी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले के बाद से इस दिशा में विमर्श जारी था। उन्होंने कहा, 'सीएम विजय ने एक बड़ा कदम उठाया है और अब तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन की मैटरनिटी लीव देने की घोषणा की है।'
जनसंख्या संकट की पृष्ठभूमि
पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर देशभर में कुल प्रजनन दर (TFR) जनसंख्या को स्थिर रखने वाले रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे जा चुकी है। उन्होंने चेताया, 'आने वाले समय में बूढ़ी आबादी की सेवा और कमाने के लिए नौजवान नहीं रहेंगे तो यह भारत के लिए डिजास्टर साबित होगा।' उनके अनुसार अब जनसंख्या नियंत्रण की नीति को छोड़कर जनसंख्या प्रबंधन की नीति अपनानी होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस फैसले को दक्षिण भारतीय राज्यों की उस चिंता से जोड़ा जिसमें उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार उत्तर भारत के राज्यों को अधिक संसाधन देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, 'देश के विकास में उत्तर हो, दक्षिण हो, पूर्व हो, पश्चिम हो — केंद्र सरकार की दृष्टि सब पर समान रहनी चाहिए।' राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उन राज्यों के साथ 'सौतेला व्यवहार' करती है जहाँ उसकी सरकार नहीं है।
महिला कर्मचारियों पर असर
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि यह निर्णय उन माताओं के लिए विशेष रूप से राहत लेकर आया है जो तीसरे बच्चे के बाद कार्यस्थल पर दबाव के कारण परेशानी झेलती थीं। उन्होंने कहा, 'हम इसका स्वागत करते हैं।' यह नीति तमिलनाडु की महिला सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी।
आगे क्या
यह देखना होगा कि क्या अन्य राज्य — विशेष रूप से वे जहाँ TFR रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे है — इसी तरह की नीतियाँ अपनाते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जन्म दर पहले से ही तेज़ी से गिर रही है, जिससे दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय असंतुलन की आशंका बढ़ रही है।