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तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन मैटरनिटी लीव, इंडिया गठबंधन ने सराहा

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तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन मैटरनिटी लीव, इंडिया गठबंधन ने सराहा

सारांश

तमिलनाडु में CM थलपति विजय ने तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन मैटरनिटी लीव देने का ऐलान किया — गिरती जन्म दर के बीच यह फैसला सिर्फ महिला कल्याण नहीं, बल्कि जनसांख्यिकीय संकट का जवाब है। इंडिया गठबंधन ने इसे 'समय की माँग' बताया।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की मातृत्व अवकाश देने की घोषणा की।
पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी।
राजद सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर देश की TFR रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है।
इंडिया गठबंधन के नेताओं — राजद, कांग्रेस और सपा — ने इस फैसले का स्वागत किया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने BJP पर गैर-BJP राज्यों के साथ 'सौतेला व्यवहार' का आरोप लगाया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार ने राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम निर्णय लेते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की पूर्ण मातृत्व अवकाश देने की घोषणा की है। इससे पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी। इस फैसले को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने व्यापक रूप से सराहा है।

मुख्य घटनाक्रम

तमिलनाडु सरकार के इस निर्णय को गिरती जन्म दर की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने बताया कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया — 2022-23 में उमा देवी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले के बाद से इस दिशा में विमर्श जारी था। उन्होंने कहा, 'सीएम विजय ने एक बड़ा कदम उठाया है और अब तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन की मैटरनिटी लीव देने की घोषणा की है।'

जनसंख्या संकट की पृष्ठभूमि

पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर देशभर में कुल प्रजनन दर (TFR) जनसंख्या को स्थिर रखने वाले रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे जा चुकी है। उन्होंने चेताया, 'आने वाले समय में बूढ़ी आबादी की सेवा और कमाने के लिए नौजवान नहीं रहेंगे तो यह भारत के लिए डिजास्टर साबित होगा।' उनके अनुसार अब जनसंख्या नियंत्रण की नीति को छोड़कर जनसंख्या प्रबंधन की नीति अपनानी होगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस फैसले को दक्षिण भारतीय राज्यों की उस चिंता से जोड़ा जिसमें उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार उत्तर भारत के राज्यों को अधिक संसाधन देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, 'देश के विकास में उत्तर हो, दक्षिण हो, पूर्व हो, पश्चिम हो — केंद्र सरकार की दृष्टि सब पर समान रहनी चाहिए।' राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उन राज्यों के साथ 'सौतेला व्यवहार' करती है जहाँ उसकी सरकार नहीं है।

महिला कर्मचारियों पर असर

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि यह निर्णय उन माताओं के लिए विशेष रूप से राहत लेकर आया है जो तीसरे बच्चे के बाद कार्यस्थल पर दबाव के कारण परेशानी झेलती थीं। उन्होंने कहा, 'हम इसका स्वागत करते हैं।' यह नीति तमिलनाडु की महिला सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी।

आगे क्या

यह देखना होगा कि क्या अन्य राज्य — विशेष रूप से वे जहाँ TFR रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे है — इसी तरह की नीतियाँ अपनाते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जन्म दर पहले से ही तेज़ी से गिर रही है, जिससे दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय असंतुलन की आशंका बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राष्ट्रीय नीति-निर्माण में जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। विरोधाभास यह है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियाँ सबसे सफलतापूर्वक लागू कीं, वही आज जनसंख्या घटने की चुनौती से जूझ रहे हैं। केंद्र-राज्य संसाधन वितरण का मुद्दा इस बहस में एक नई परत जोड़ता है — यदि परिसीमन में जनसंख्या आधार बना रहा, तो दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी का डर निराधार नहीं है। मातृत्व अवकाश जैसे प्रोत्साहन अकेले जन्म दर नहीं बदलते — इसके लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक नीतिगत बदलाव चाहिए, जिसकी यह चर्चा शायद शुरुआत भर है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर मैटरनिटी लीव का नया नियम क्या है?
तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियों को अब तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की पूर्ण मातृत्व अवकाश मिलेगी। इससे पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी।
यह फैसला क्यों लिया गया?
तमिलनाडु सहित कई दक्षिण भारतीय राज्यों में कुल प्रजनन दर (TFR) रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे जा चुकी है। गिरती जन्म दर और भविष्य में कामकाजी आबादी की कमी की आशंका के बीच यह कदम जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है।
इंडिया गठबंधन ने इस फैसले पर क्या कहा?
राजद, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने इसे जनसंख्या प्रबंधन की दिशा में जरूरी कदम बताया, जबकि सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इसे कामकाजी माताओं के लिए राहत की संज्ञा दी।
क्या यह नीति सभी महिलाओं पर लागू होगी?
फिलहाल यह नीति तमिलनाडु की महिला सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी। निजी क्षेत्र की कर्मचारियों पर इसके विस्तार को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
2022-23 के उमा देवी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले का इससे क्या संबंध है?
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा के अनुसार 2022-23 में उमा देवी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले के बाद से तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश के विस्तार की माँग उठ रही थी। मुख्यमंत्री विजय का यह फैसला उसी विमर्श की परिणति माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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