19 अगस्त 2026
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तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर 365 दिन मैटरनिटी लीव: TVK सरकार के फैसले पर सियासी बहस

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तमिलनाडु में तीसरे बच्चे पर 365 दिन मैटरनिटी लीव: TVK सरकार के फैसले पर सियासी बहस

सारांश

तमिलनाडु की TVK सरकार ने तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन की पूर्ण मैटरनिटी लीव का आदेश देकर दशकों पुरानी दो-बच्चे की नीति से व्यावहारिक दूरी बना ली है। यह फैसला मातृत्व अधिकार और जनसंख्या नियंत्रण के बीच की पुरानी बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु TVK सरकार ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन की पूर्ण मैटरनिटी लीव देने की घोषणा की।
पहले तीसरी गर्भावस्था पर मैटरनिटी लीव परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सीमित कर दी जाती थी।
कोडंडाराम ने फैसले को 'ऐतिहासिक' बताया; शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने इसका स्वागत किया।
DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने स्पष्ट किया कि राज्य की मूल नीति अब भी दो बच्चों की है; नई सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।
यह फैसला मातृत्व अधिकार बनाम जनसंख्या नियंत्रण की नीतिगत बहस को नए सिरे से केंद्र में ले आया है।

तमिलनाडु की TVK सरकार ने 19 अगस्त 2026 को राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम घोषणा करते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की पूर्ण मैटरनिटी लीव देने का आदेश जारी किया। इससे पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी; तीसरी गर्भावस्था पर अवकाश की अवधि परिवार नियोजन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कम कर दी जाती थी। नए आदेश के बाद राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं और जनसंख्या नीति को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है।

मुख्य घटनाक्रम

TVK सरकार के नए आदेश के अनुसार, तमिलनाडु के सरकारी कर्मचारी अब तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन का पूरा मातृत्व अवकाश पाने के हकदार होंगे। यह बदलाव उस पुरानी व्यवस्था को पलटता है जिसके तहत तीसरी गर्भावस्था पर मैटरनिटी लीव जानबूझकर सीमित रखी जाती थी ताकि परिवार नियोजन की नीति को बल मिले। गौरतलब है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई राज्य गिरती जन्म दर और बढ़ती उम्रदराज आबादी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

समर्थन में आई आवाज़ें

तेलंगाना जन समिति (TJS) के प्रमुख और विधान परिषद सदस्य एम. कोडंडाराम ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। महिलाओं को पहले दो बच्चों के लिए पूरी मैटरनिटी लीव मिलती थी, जबकि तीसरी प्रेग्नेंसी के मामले में उन्हें सिर्फ सीमित छुट्टी मिलती थी। अब सरकार ने तीसरी प्रेग्नेंसी के लिए भी पूरी मैटरनिटी लीव की सुविधा दे दी है। मुझे लगता है कि यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि सरकारें पारंपरिक रूप से परिवार नियोजन को बढ़ावा देती रही हैं।"

मुंबई से शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, "तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के मकसद और वजह पर निश्चित रूप से सवाल उठेंगे। हालांकि, वे महिलाओं के लिए बेहतर प्रावधान करने की नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं, क्योंकि मैटरनिटी लीव जरूरी है। हम महिलाओं पर केंद्रित इस फैसले का स्वागत करते हैं।"

DMK की सफाई और सवाल

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की मूल नीति दो बच्चों की ही है। उन्होंने कहा, "असल में सरकार की पॉलिसी तो दो बच्चों की ही है। लेकिन तीसरे बच्चे के लिए हमने इसे कम कर दिया था क्योंकि हम नहीं चाहते कि किसी घर में तीसरा बच्चा हो। जाहिर है, ऐसा आबादी को कंट्रोल करने के लिए किया गया था। लेकिन यह सरकार आबादी को कंट्रोल नहीं करना चाहती। बस यही बात है।" एलंगोवन के इस बयान ने TVK और DMK के बीच जनसंख्या नीति पर वैचारिक मतभेद को सतह पर ला दिया है।

परिवार नियोजन बनाम मातृत्व अधिकार

यह फैसला दो परस्पर विरोधी नीतिगत दृष्टिकोणों के बीच की खाई को उजागर करता है — एक ओर पारंपरिक दो-बच्चे की नीति है, जो दशकों से जनसंख्या नियंत्रण का आधार रही है, और दूसरी ओर महिला श्रमिकों के मातृत्व अधिकारों की बढ़ती माँग है। आलोचकों का कहना है कि तीसरे बच्चे पर अवकाश की कटौती महिलाओं को उनके प्रजनन विकल्पों के लिए दंडित करने जैसी थी। समर्थकों का तर्क है कि यह नया आदेश उस असमानता को दूर करता है।

क्या होगा आगे

TVK सरकार के इस आदेश का असर तमिलनाडु के लाखों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा। यह देखना होगा कि क्या निजी क्षेत्र पर भी इस नीति का विस्तार किया जाएगा, और क्या अन्य राज्य सरकारें इसी दिशा में कदम उठाती हैं। जनसंख्या नीति और महिला अधिकारों के चौराहे पर खड़ा यह फैसला आने वाले दिनों में विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर और बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह महिला अधिकारों की वास्तविक प्रतिबद्धता है या दक्षिण भारत की गिरती प्रजनन दर के बीच एक रणनीतिक जनसंख्या संकेत। DMK का खुलकर यह कहना कि 'यह सरकार आबादी को कंट्रोल नहीं करना चाहती' — यह बयान नीतिगत असहमति से ज़्यादा, सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर की दरार को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस फैसले को केवल कल्याणकारी घोषणा के रूप में पेश कर रही है, जबकि असली बहस यह है कि क्या सरकारी लाभों को प्रजनन विकल्पों से जोड़ना नैतिक रूप से उचित है — और इस फैसले ने उस बहस को उलट दिया है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार का नया मैटरनिटी लीव आदेश क्या है?
TVK सरकार ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया जिसके तहत तमिलनाडु के सरकारी कर्मचारी अब तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन की पूर्ण मैटरनिटी लीव पाने के हकदार होंगे। पहले यह सुविधा केवल पहले दो बच्चों तक सीमित थी।
पहले तीसरे बच्चे पर मैटरनिटी लीव क्यों कम होती थी?
पुरानी व्यवस्था में तीसरी गर्भावस्था पर अवकाश की अवधि जानबूझकर कम रखी जाती थी ताकि परिवार नियोजन और दो-बच्चे की नीति को बढ़ावा मिले। DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने इसे आबादी नियंत्रण की नीति का हिस्सा बताया।
इस फैसले पर राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया है?
TJS प्रमुख एम. कोडंडाराम और शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने फैसले का स्वागत किया। DMK ने इसे स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी मूल नीति अब भी दो बच्चों की है और नई सरकार की जनसंख्या नीति पर सवाल उठाए।
यह फैसला किन कर्मचारियों पर लागू होगा?
यह आदेश तमिलनाडु के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा। फिलहाल निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को इसमें शामिल किए जाने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
इस निर्णय का जनसंख्या नीति पर क्या असर पड़ेगा?
आलोचकों का कहना है कि यह फैसला दशकों पुरानी दो-बच्चे की नीति से व्यावहारिक दूरी बनाता है। समर्थकों का तर्क है कि मातृत्व अधिकार को प्रजनन विकल्पों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की इस बहस ने जनसंख्या नीति और महिला अधिकारों के सवाल को नए सिरे से उठाया है।
राष्ट्र प्रेस
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