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तमिलनाडु में मुस्लिम आरक्षण 3.5% से 5% करने की मांग पर भाजपा का कड़ा विरोध, IUML ने CM को सौंपा प्रस्ताव

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तमिलनाडु में मुस्लिम आरक्षण 3.5% से 5% करने की मांग पर भाजपा का कड़ा विरोध, IUML ने CM को सौंपा प्रस्ताव

सारांश

तमिलनाडु में IUML की मुस्लिम आरक्षण 3.5% से 5% करने की मांग ने राजनीतिक आग भड़का दी है। भाजपा का कहना है कि इससे अन्य पिछड़े वर्गों का हक छिनेगा, जबकि IUML का तर्क है कि समुदाय की भागीदारी बढ़ाना ज़रूरी है। CM विजय ने प्रस्ताव पर विचार का आश्वासन दिया है।

मुख्य बातें

IUML ने बीसी कोटे के भीतर मुस्लिम आरक्षण 3.5% से बढ़ाकर 5% करने की मांग मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय के समक्ष रखी।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए.एम.
शाहजहां ने बताया कि यह प्रस्ताव लगभग 10 दिन पहले औपचारिक रूप से सौंपा गया और CM ने विचार का आश्वासन दिया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इससे अन्य पिछड़े वर्गों के अवसर और कम होंगे।
सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
आलोचकों का कहना है कि यह प्रस्ताव संवैधानिक और न्यायिक जाँच के दायरे में आ सकता है।

तमिलनाडु में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) द्वारा पिछड़ा वर्ग (बीसी) कोटे के भीतर मुस्लिम आरक्षण को 3.5% से बढ़ाकर 5% करने की मांग ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 15 जून 2026 को इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए राज्य सरकार से इसे अस्वीकार करने की अपील की। वहीं, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एवं IUML नेता ए.एम. शाहजहां ने पुष्टि की कि उनकी पार्टी ने लगभग 10 दिन पहले मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष यह मांग औपचारिक रूप से रखी थी।

मुख्य घटनाक्रम

IUML नेता ए.एम. शाहजहां ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें शिक्षा संस्थानों और सरकारी सेवाओं में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण में वृद्धि की माँग की गई है। शाहजहां के अनुसार, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शाहजहां ने कहा, 'हमने मुख्यमंत्री को अपना प्रस्ताव सौंप दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस पर विचार किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में मुस्लिम आरक्षण बढ़ाया जाएगा।'

भाजपा की प्रतिक्रिया

नैनार नागेंद्रन ने तर्क दिया कि मौजूदा 3.5% आरक्षण से भी पिछड़ा वर्ग के कुछ हिंदू समुदायों की हिस्सेदारी पहले से प्रभावित है। उनके अनुसार इसे 5% करने पर अन्य पिछड़े वर्गों के लिए उपलब्ध अवसर और सिकुड़ जाएंगे।

नागेंद्रन ने कहा, 'मुसलमानों को मौजूदा 3.5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से ही पिछड़ा वर्ग के कुछ हिंदू समुदायों की हिस्सेदारी प्रभावित हुई है। यदि इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया तो अन्य पिछड़े वर्गों के लिए उपलब्ध अवसर और कम हो जाएंगे।' उन्होंने राज्य सरकार से सभी पिछड़ा वर्ग समुदायों के हितों की रक्षा करते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार करने की माँग की।

IUML का पक्ष

IUML का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी सेवाओं में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है और आरक्षण में वृद्धि समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में अनिवार्य कदम है। पार्टी के अनुसार यह मांग कई वर्षों से उठाई जा रही है और इसे समुदाय के व्यापक सामाजिक-आर्थिक उत्थान से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

आम जनता और राजनीतिक दलों पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तमिलनाडु में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की सीमाओं और उसके वितरण को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस तेज होने की संभावना है।

क्या होगा आगे

फिलहाल मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि बीसी कोटे के भीतर किसी एक समुदाय का हिस्सा बढ़ाना संवैधानिक और न्यायिक जाँच के दायरे में आ सकता है, विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय के आरक्षण सीमा संबंधी निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में। आने वाले हफ्तों में राज्य सरकार का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका इस समय सामने आना राजनीतिक रूप से सुविचारित लगता है — सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए यह अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने और भाजपा को हिंदू-पिछड़ा वर्ग ध्रुवीकरण का मौका देने के बीच की पतली रेखा है। असली सवाल यह है कि बीसी कोटे की कुल सीमा बढ़ाए बिना किसी एक समूह का हिस्सा बढ़ाना न्यायिक परीक्षण में कितना टिकेगा, खासकर जब सर्वोच्च न्यायालय आरक्षण की 50% सीमा पर पहले से सख्त रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इस संवैधानिक पेच को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है और इसे महज़ सांप्रदायिक राजनीति तक सीमित कर देती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में मुस्लिम आरक्षण बढ़ाने की मांग क्या है?
IUML ने तमिलनाडु के पिछड़ा वर्ग (बीसी) कोटे के भीतर मुस्लिम समुदाय का आरक्षण मौजूदा 3.5% से बढ़ाकर 5% करने की मांग की है। यह मांग शिक्षा संस्थानों और सरकारी सेवाओं में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
भाजपा ने इस मांग का विरोध क्यों किया?
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन का कहना है कि मौजूदा 3.5% आरक्षण से भी पिछड़ा वर्ग के हिंदू समुदायों की हिस्सेदारी पहले से प्रभावित है। उनके अनुसार इसे 5% करने पर अन्य पिछड़े वर्गों के लिए उपलब्ध अवसर और कम हो जाएंगे।
IUML ने यह प्रस्ताव कब और किसके सामने रखा?
IUML ने लगभग 10 दिन पहले मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से सौंपा। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए.एम. शाहजहां ने बताया कि CM ने प्रस्ताव पर विचार और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
तमिलनाडु सरकार ने इस पर क्या रुख अपनाया है?
अभी तक सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है, जो इस विवाद की आगे की दिशा तय करेगी।
क्या बीसी कोटे के भीतर आरक्षण बढ़ाना संवैधानिक रूप से संभव है?
आलोचकों का कहना है कि बीसी कोटे की कुल सीमा बढ़ाए बिना किसी एक समूह का हिस्सा बढ़ाना संवैधानिक और न्यायिक जाँच के दायरे में आ सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के आरक्षण सीमा संबंधी पूर्व निर्णय इस प्रस्ताव के लिए कानूनी चुनौती बन सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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