17 सितंबर 2026
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मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन की भूख हड़ताल तोड़ी, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम

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मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन की भूख हड़ताल तोड़ी, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम

सारांश

20 दिन की भूख हड़ताल के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने सरकारी आश्वासन पर विराम लिया — लेकिन यह अंत नहीं, 90 दिन की परीक्षा की शुरुआत है। सातारा गजट, 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड और रद्द प्रमाणपत्रों की बहाली — इन वादों पर खरा न उतरने पर मुंबई कूच की चेतावनी दे चुके हैं।

मुख्य बातें

मनोज जरांगे पाटिल ने 17 सितंबर 2026 को अपनी 20 दिन की भूख हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की।
सरकार को 90 दिनों के भीतर सातारा, कोल्हापुर, पुणे और औंध गजट लागू करने का अल्टीमेटम दिया गया।
शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड में कोई कमी न करने का आश्वासन सरकार ने दिया।
मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के रद्द कुणबी प्रमाणपत्रों को पुनः वैध करने की माँग मानी गई।
जरांगे पाटिल ने चेतावनी दी — 90 दिनों में वादे पूरे न हुए तो मुंबई कूच होगा; आंदोलन जारी रहेगा।
प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल , दादाजी भुसे , विधायक प्रसाद लाड , सुरेश धस और बीड के जिलाधिकारी शामिल थे।

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को अपनी 20 दिन से जारी भूख हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की। महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत और कई अहम आश्वासन मिलने के बाद जरांगे पाटिल ने यह कदम उठाया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि आंदोलन जारी रहेगा और सरकार को 90 दिन के भीतर वादे पूरे करने होंगे।

सरकारी प्रतिनिधिमंडल और बातचीत

सरकार की ओर से आए प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादाजी भुसे, विधायक प्रसाद लाड और सुरेश धस तथा बीड के जिलाधिकारी शामिल थे। भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने बाद में पुष्टि की कि जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के व्यक्तिगत अनुरोध पर भूख हड़ताल समाप्त की। सरकार ने अगले 90 दिनों में वादे पूरे करने की प्रतिबद्धता जताई है।

सरकार के प्रमुख आश्वासन

बातचीत में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे पाटिल को कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए। इनमें शामिल हैं — तीन महीने के भीतर सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी कर सातारा, कोल्हापुर, पुणे और औंध गजट लागू करना; हैदराबाद गजट के अनुसार कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए संशोधित जीआर निकालना; हैदराबाद गजट के आधार पर जारी प्रमाणपत्रों को वैध बनाए रखना; शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड में कोई कटौती न करना; तथा मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के रद्द किए गए कुणबी प्रमाणपत्रों को पुनः वैध करना।

जरांगे पाटिल की प्रमुख माँगें और चेतावनी

जरांगे पाटिल ने माँग की कि शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड को किसी भी हाल में कम न किया जाए और रिकॉर्ड खोज में मदद के लिए अच्छे अधिकारी तैनात किए जाएँ। उन्होंने एक जीआर का हवाला देते हुए माँग की कि उसी तर्ज पर सरकार स्पष्ट करे कि 'मराठा और कुणबी एक ही हैं।' मंत्री विखे पाटिल ने बताया कि सातारा गजट में 1,100 पन्नों की रिपोर्ट है जिसके अध्ययन में तीन से चार महीने लगेंगे, और हैदराबाद गजट जीआर पर कोर्ट में लंबित मामले में किसी अतिरिक्त रोक की गुंजाइश न आए, इसका ध्यान रखा जाएगा।

जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से सार्वजनिक रूप से — प्रेस कॉन्फ्रेंस या वीडियो बयान के ज़रिए — उनके प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने की भी अपील की।

आंदोलन की भावी दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में वर्षों से उबाल पर है। जरांगे पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूख हड़ताल स्थगित की गई है, समाप्त नहीं, और यदि 90 दिनों के भीतर सरकार ने वादे नहीं निभाए तो वे मुंबई कूच करेंगे। गौरतलब है कि जरांगे पाटिल ने शिंदे समिति पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और कहा कि जो अधिकारी पहले बातचीत से बचते थे, वे अब खुद चलकर आए हैं — यह समाज की एकजुटता का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री उनके दुश्मन नहीं हैं, लेकिन हमले की स्थिति में वे चुप नहीं रहेंगे। आने वाले तीन महीने महाराष्ट्र सरकार और मराठा समुदाय दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ करना राजनीतिक रूप से महँगा पड़ेगा। असली सवाल यह है कि 1,100 पन्नों के सातारा गजट का 'अध्ययन' 90 दिनों में होगा या यह एक और विलंब-रणनीति है — जरांगे पाटिल ने समय खरीदने की कोशिश पर सीधे चेतावनी दी है। मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की हर सरकार को साधता रहा है; फडणवीस सरकार के लिए अब असली कसौटी अदालत में लंबित हैदराबाद गजट जीआर और रद्द प्रमाणपत्रों की बहाली में है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज जरांगे पाटिल ने भूख हड़ताल क्यों स्थगित की?
महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने 17 सितंबर 2026 को बातचीत में कई आश्वासन दिए — जिनमें सातारा गजट लागू करना, 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और रद्द प्रमाणपत्र बहाल करना शामिल हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के व्यक्तिगत अनुरोध पर उन्होंने 20 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की।
जरांगे पाटिल ने सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम क्यों दिया?
जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल स्थगित है, आंदोलन नहीं। उन्होंने 90 दिनों के भीतर सातारा, कोल्हापुर, पुणे और औंध गजट लागू करने की माँग रखी है। यदि समय सीमा में वादे पूरे नहीं हुए तो उन्होंने मुंबई कूच की चेतावनी दी है।
58 लाख कुणबी रिकॉर्ड का मुद्दा क्या है?
शिंदे समिति ने मराठा समुदाय की कुणबी पहचान स्थापित करने के लिए 58 लाख ऐतिहासिक कुणबी रिकॉर्ड खोजे हैं। जरांगे पाटिल की माँग है कि इन रिकॉर्डों में कोई कटौती न हो और इनके आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी हों, जिससे मराठा समुदाय को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।
सातारा गजट को लागू करने में देरी क्यों है?
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बातचीत के दौरान बताया कि सातारा गजट में 1,100 पन्नों की रिपोर्ट है, जिसके अध्ययन में तीन से चार महीने लगेंगे। हालाँकि सरकार ने 90 दिनों में जीआर जारी कर गजट लागू करने का आश्वासन दिया है।
मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के रद्द प्रमाणपत्रों का मामला क्या है?
मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के कुणबी प्रमाणपत्र पहले रद्द किए जा चुके हैं। जरांगे पाटिल की विशेष माँग है कि इन्हें पुनः वैध किया जाए। सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने इसे भी आश्वासनों की सूची में शामिल किया है।
राष्ट्र प्रेस
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