मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन की भूख हड़ताल तोड़ी, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को अपनी 20 दिन से जारी भूख हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की। महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत और कई अहम आश्वासन मिलने के बाद जरांगे पाटिल ने यह कदम उठाया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि आंदोलन जारी रहेगा और सरकार को 90 दिन के भीतर वादे पूरे करने होंगे।
सरकारी प्रतिनिधिमंडल और बातचीत
सरकार की ओर से आए प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादाजी भुसे, विधायक प्रसाद लाड और सुरेश धस तथा बीड के जिलाधिकारी शामिल थे। भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने बाद में पुष्टि की कि जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के व्यक्तिगत अनुरोध पर भूख हड़ताल समाप्त की। सरकार ने अगले 90 दिनों में वादे पूरे करने की प्रतिबद्धता जताई है।
सरकार के प्रमुख आश्वासन
बातचीत में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे पाटिल को कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए। इनमें शामिल हैं — तीन महीने के भीतर सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी कर सातारा, कोल्हापुर, पुणे और औंध गजट लागू करना; हैदराबाद गजट के अनुसार कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए संशोधित जीआर निकालना; हैदराबाद गजट के आधार पर जारी प्रमाणपत्रों को वैध बनाए रखना; शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड में कोई कटौती न करना; तथा मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के रद्द किए गए कुणबी प्रमाणपत्रों को पुनः वैध करना।
जरांगे पाटिल की प्रमुख माँगें और चेतावनी
जरांगे पाटिल ने माँग की कि शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड को किसी भी हाल में कम न किया जाए और रिकॉर्ड खोज में मदद के लिए अच्छे अधिकारी तैनात किए जाएँ। उन्होंने एक जीआर का हवाला देते हुए माँग की कि उसी तर्ज पर सरकार स्पष्ट करे कि 'मराठा और कुणबी एक ही हैं।' मंत्री विखे पाटिल ने बताया कि सातारा गजट में 1,100 पन्नों की रिपोर्ट है जिसके अध्ययन में तीन से चार महीने लगेंगे, और हैदराबाद गजट जीआर पर कोर्ट में लंबित मामले में किसी अतिरिक्त रोक की गुंजाइश न आए, इसका ध्यान रखा जाएगा।
जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से सार्वजनिक रूप से — प्रेस कॉन्फ्रेंस या वीडियो बयान के ज़रिए — उनके प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने की भी अपील की।
आंदोलन की भावी दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में वर्षों से उबाल पर है। जरांगे पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूख हड़ताल स्थगित की गई है, समाप्त नहीं, और यदि 90 दिनों के भीतर सरकार ने वादे नहीं निभाए तो वे मुंबई कूच करेंगे। गौरतलब है कि जरांगे पाटिल ने शिंदे समिति पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और कहा कि जो अधिकारी पहले बातचीत से बचते थे, वे अब खुद चलकर आए हैं — यह समाज की एकजुटता का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री उनके दुश्मन नहीं हैं, लेकिन हमले की स्थिति में वे चुप नहीं रहेंगे। आने वाले तीन महीने महाराष्ट्र सरकार और मराठा समुदाय दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।