भूख हड़ताल के 18वें दिन जरांगे पाटिल का संकेत — मुंबई मार्च रद्द हो सकता है, 'शरीर साथ नहीं दे रहा'
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुआ मनोज जरांगे पाटिल ने 16 सितंबर 2026 की रात करीब 2:00 बजे महाराष्ट्र के बीड जिले के पटोडा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि बिगड़ती सेहत के चलते वे मुंबई मार्च रद्द कर सकते हैं। 18 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के कारण गंभीर रूप से कमजोर हो चुके जरांगे पाटिल ने कहा कि यदि समर्थक उनके पीछे काफिला लेकर चलते रहे, तो वे या तो अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे या पटोडा में ही धरना दे देंगे।
मध्यरात्रि में उमड़ा जनसैलाब
रात करीब 1:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने के बावजूद मराठा समुदाय के हजारों समर्थक — जिनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल थीं — उनका भाषण सुनने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। यह दृश्य इस बात का संकेत है कि आंदोलन की जमीनी पकड़ कितनी गहरी है, भले ही इसके नेता की तबीयत नाजुक हो।
शारीरिक रूप से अत्यंत क्षीण दिख रहे जरांगे पाटिल ने बताया कि 12 सितंबर को आईवी फ्लूइड (अंतःशिरा द्रव) लेना बंद करने के बाद से वे मुश्किल से हाथ-पैर हिला पा रहे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और परिजनों में चिंता गहरी है।
जरांगे पाटिल के मुख्य वक्तव्य
भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'अपने समुदाय के बच्चों के लिए लड़ने का असर मेरे शरीर पर पड़ा है, लेकिन मैंने आप लोगों के लिए सरकार से टक्कर ली है। सरकार चाहती है कि मैं घुटने टेक दूं, लेकिन क्या मुझे अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए? मेरा समुदाय किसी भी सरकार से बड़ा है — यह मेरे पिता के समान है। मेरे समुदाय में किसी भी सरकार को गिराने और नई सरकार बनाने की ताकत है।'
उन्होंने परिवार के नाम एक मार्मिक संदेश भी दिया — 'मैंने अपने बेटे से कहा है कि अगर मैं समाज के लिए अपनी जान दे दूं, तो वह हिम्मत के साथ आगे आए। भले ही इस मकसद के लिए एक जान चली जाए, लेकिन हमारी जाति की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए।'
आंदोलन की प्रगति और सरकारी गजट की माँग
जरांगे पाटिल ने आंदोलन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 58 लाख पुराने रिकॉर्ड (नोंदी) अब मिल चुके हैं, जिससे लगभग 2.5 करोड़ मराठा समुदाय के लोगों के लिए आरक्षण का रास्ता प्रशस्त हो गया है। उन्होंने जोर दिया कि अभी का मुख्य लक्ष्य सरकारी गजट हासिल करना है और सभी दस्तावेज पेन ड्राइव में सुरक्षित रख लिए गए हैं।
गौरतलब है कि मराठा आरक्षण आंदोलन लंबे समय से सरकारी अधिसूचना की माँग कर रहा है। जरांगे पाटिल के इस अभियान ने महाराष्ट्र की राजनीति में बार-बार हलचल मचाई है।
मुख्यमंत्री फडणवीस पर गंभीर आरोप
जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने हर कदम पर राजनीतिक चालें चलीं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर 'उनकी जान लेने की साजिश रचने' का गंभीर आरोप भी लगाया — हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पश्चिमी महाराष्ट्र के फलों के बागान-मालिकों के तर्क का जवाब देते हुए उन्होंने सवाल किया कि यदि ओबीसी समुदायों के पास भी बागान हैं तो उन्हें आरक्षण क्यों मिलता है, फिर मराठा समुदाय को क्यों नहीं।
समर्थकों को निर्देश और आगे का रास्ता
जरांगे पाटिल ने समर्थकों से स्पष्ट अपील की कि वे पटोडा से उनके वाहन के पीछे काफिला लेकर न आएं, बल्कि सीधे खोपोली में मिलें। उन्होंने कहा कि यदि शारीरिक स्थिति अनुकूल रही, तो वे पटोडा से सीधे मुंबई जाना पसंद करेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सरकार पर मराठा आरक्षण को लेकर चौतरफा दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में जरांगे पाटिल की सेहत और उनका अगला कदम पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।