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मराठा आरक्षण: जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल के पाँचवें दिन महाराष्ट्र सरकार ने सौंपा ड्राफ्ट प्रस्ताव

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मराठा आरक्षण: जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल के पाँचवें दिन महाराष्ट्र सरकार ने सौंपा ड्राफ्ट प्रस्ताव

सारांश

जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल के पाँचवें दिन महाराष्ट्र सरकार ने ड्राफ्ट प्रस्ताव और 58 लाख एंट्रीज की पेन ड्राइव सौंपी। 10-17 सितंबर तक विशेष कैंप, 3,500 से अधिक प्रमाण पत्र जारी, 90% पुलिस मामले वापस — सरकार बातचीत के लिए तैयार, पर एक्टिविस्ट की प्रतिक्रिया का इंतज़ार जारी।

मुख्य बातें

मनोज जरांगे पाटिल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 2 सितंबर को पाँचवें दिन जारी रही।
जालना के जिला कलेक्टर ने जरांगे पाटिल को कुनबी प्रमाण पत्र संबंधी ड्राफ्ट प्रस्ताव और 58 लाख एंट्रीज की पेन ड्राइव सौंपी।
हैदराबाद गजट फ्रेमवर्क के तहत अब तक 3,500 से अधिक प्रमाण पत्र जारी; 10 से 17 सितंबर तक सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेष कैंप।
मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 90% पुलिस मामले वापस; केवल 118 मामले लंबित।
मराठा सेल ने 2.5 लाख आवेदनों पर कार्रवाई की; 33 परिवार सरकारी सेवा में शामिल।
सतारा गजट पर एडवोकेट जनरल से कानूनी राय माँगी गई; हैदराबाद गजट की स्थिति सुरक्षित रखने की कोशिश।

मराठा आरक्षण और कुनबी जाति प्रमाण पत्र की माँग को लेकर छत्रपति संभाजीनगर में आंदोलनरत एक्टिविस्ट मनोज जरांगे पाटिल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 2 सितंबर को अपने पाँचवें दिन में प्रवेश कर गई। महाराष्ट्र सरकार ने इस बीच अपना रुख स्पष्ट करते हुए माँगों को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों का ब्यौरा सार्वजनिक किया और जरांगे पाटिल से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की।

सरकार का ड्राफ्ट प्रस्ताव और जिला कलेक्टर की मुलाकात

एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और उदय सामंत ने बताया कि जालना के जिला कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से जरांगे पाटिल से मुलाकात की और उन्हें कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित सरकार का ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा। जिला कलेक्टर ने एक्टिविस्ट को एक पेन ड्राइव भी सौंपी, जिसमें 58 लाख एंट्रीज का रिकॉर्ड संग्रहीत है। प्रशासन अब जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में है।

विशेष कैंप और प्रमाण पत्र वितरण की प्रक्रिया

मंत्रियों ने घोषणा की कि आवेदनों पर कार्रवाई करने और कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 10 सितंबर से 17 सितंबर तक सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। हैदराबाद गजट फ्रेमवर्क के तहत अब तक 3,500 से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन सुनिश्चित करेगा।

प्रशासनिक अनुरोधों को सुव्यवस्थित करने के लिए एक समर्पित मराठा सेल गठित किया गया है, जो पहले ही 2.5 लाख आवेदनों पर कार्रवाई कर चुका है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए राज्य सरकार पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा था।

पुलिस मामले और परिवारों को सहायता

मंत्रियों के अनुसार, सरकार ने मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 90 प्रतिशत पुलिस मामले वापस ले लिए हैं और अब केवल 118 मामले कानूनी समाधान के लिए लंबित हैं। आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को वित्तीय सहायता और रोज़गार के लिए 222 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 33 लोग सरकारी सेवा में शामिल हो चुके हैं, 85 आवेदनों पर सक्रिय रूप से कार्रवाई जारी है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) रोज़गार योजना के तहत 40 दावों के समाधान के लिए छत्रपति संभाजीनगर में एक विशेष कैंप आयोजित किया जाएगा।

छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाएँ और हॉस्टल विस्तार

मराठा छात्रों को ओबीसी छात्रों के समकक्ष लाभ दिए जा रहे हैं। यदि किसी छात्र का कुनबी प्रमाण पत्र आवेदन अस्वीकृत होता है, तो उनकी शिक्षा शुल्क का वहन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) योजना के अंतर्गत किया जाएगा। सारथी संगठन ने आठ हॉस्टल बनाए हैं, जिनमें से प्रत्येक में 1,000 छात्रों के रहने की क्षमता है, और तालुका स्तर तक हॉस्टल निर्माण के विस्तार की योजना तैयार की जा रही है।

सतारा गजट पर कानूनी सतर्कता

राज्य सरकार ने सतारा गजट के संबंध में एडवोकेट जनरल से कानूनी राय माँगी है। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि इस मामले में पूरी कानूनी सावधानी बरती जाएगी ताकि सतारा गजट को लागू करने से न्यायालय में चल रहे मामलों में हैदराबाद गजट की स्थिति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आने वाले दिनों में जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

नोडल अधिकारी, मराठा सेल — पहली नज़र में व्यापक लगता है, लेकिन मूल प्रश्न अनुत्तरित है: कुनबी प्रमाण पत्र की पात्रता मानदंड क्या होंगे और क्या वे न्यायालय की कसौटी पर खरे उतरेंगे? सतारा गजट पर एडवोकेट जनरल से राय माँगना यह संकेत देता है कि सरकार स्वयं कानूनी जोखिम से सचेत है। इतिहास गवाह है कि मराठा आरक्षण के पिछले प्रयास — 2018 और 2021 में — सर्वोच्च न्यायालय में टिक नहीं पाए। बिना संवैधानिक ढाँचे को मज़बूत किए केवल प्रशासनिक कदम उठाना आंदोलन को शांत तो कर सकता है, पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल किस माँग को लेकर है?
जरांगे पाटिल मराठा समुदाय के लिए आरक्षण और कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। 2 सितंबर को यह हड़ताल अपने पाँचवें दिन में थी।
महाराष्ट्र सरकार ने जरांगे पाटिल को क्या प्रस्ताव दिया है?
जालना के जिला कलेक्टर ने जरांगे पाटिल को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित सरकार का ड्राफ्ट प्रस्ताव और 58 लाख एंट्रीज का रिकॉर्ड संग्रहीत एक पेन ड्राइव सौंपी। सरकार अब एक्टिविस्ट की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में है।
कुनबी प्रमाण पत्र के लिए विशेष कैंप कब लगेंगे?
महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि 10 सितंबर से 17 सितंबर तक सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में आवेदनों पर कार्रवाई कर कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।
मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों का क्या हुआ?
मंत्रियों के अनुसार, सरकार ने मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 90 प्रतिशत पुलिस मामले वापस ले लिए हैं। अब केवल 118 मामले कानूनी समाधान के लिए लंबित हैं।
सतारा गजट और हैदराबाद गजट में क्या अंतर है और सरकार क्यों सतर्क है?
हैदराबाद गजट फ्रेमवर्क के तहत अब तक 3,500 से अधिक कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं और यह न्यायालय में चल रहे मामलों का आधार है। सतारा गजट को लागू करने से हैदराबाद गजट की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है, इसलिए राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल से कानूनी राय माँगी है।
राष्ट्र प्रेस
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