अंबुमणि रामदास आज CM विजय से मिलेंगे, तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति बचाने को जाति जनगणना की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पट्टली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास मंगलवार, 10 जून 2025 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात करेंगे और राज्य में जाति-आधारित जनगणना कराने की औपचारिक माँग रखेंगे। पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु की 69 प्रतिशत आरक्षण नीति को कानूनी और संवैधानिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए जाति-वार जनसंख्या के अद्यतन आँकड़े अनिवार्य हैं।
बैठक की पृष्ठभूमि
यह मुलाकात 5 जून को चेन्नई के टी. नगर में PMK द्वारा आयोजित सर्वदलीय एवं सामुदायिक नेताओं के सम्मेलन के बाद हो रही है। उस सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें राज्य सरकार से 'कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट, 2008' के प्रावधानों के तहत जाति जनगणना कराने का आग्रह किया गया। इस पहल को 'सामाजिक न्याय जनगणना' नाम दिया गया है।
PMK नेताओं के अनुसार, अंबुमणि सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे और सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा करेंगे।
69% आरक्षण और संवैधानिक पेचीदगी
तमिलनाडु में देश की सर्वाधिक आरक्षण व्यवस्थाओं में से एक लागू है — पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को मिलाकर 69 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस नीति को 1993 में पारित विशेष कानून के ज़रिये संरक्षित किया गया था और बाद में 76वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले ने असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय की है, जिससे यह मुद्दा समय-समय पर कानूनी बहस का केंद्र बनता रहा है। जाति जनगणना के समर्थकों का तर्क है कि अद्यतन जनसंख्या आँकड़े राज्य के आरक्षण ढाँचे को भविष्य की कानूनी चुनौतियों से बचाने में ठोस आधार प्रदान करेंगे।
PMK में आंतरिक नेतृत्व विवाद की छाया
यह पहल ऐसे समय में आई है जब PMK पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास और उनके पुत्र अंबुमणि रामदास के बीच आंतरिक नेतृत्व संघर्ष का सामना कर रही है। संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर हाल के महीनों में सार्वजनिक असहमति सामने आई है, जिससे वन्नियार-आधारित इस पार्टी के भीतर विभाजन उजागर हुआ है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अंबुमणि का यह नया जोर पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार को मज़बूत करने के साथ-साथ चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच अपना नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से भी प्रेरित है।
राष्ट्रीय संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में जाति जनगणना की माँग ने ज़ोर पकड़ा है और राजनीतिक दल कल्याणकारी तथा सकारात्मक कार्रवाई नीतियों को दिशा देने के लिए जाति-आधारित गणना को आवश्यक बता रहे हैं। तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में आरक्षण के विषय के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए, मुख्यमंत्री विजय के साथ इस बैठक के परिणाम पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी।