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अंबुमणि रामदास आज CM विजय से मिलेंगे, तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति बचाने को जाति जनगणना की माँग

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अंबुमणि रामदास आज CM विजय से मिलेंगे, तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति बचाने को जाति जनगणना की माँग

सारांश

PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास आज CM विजय से मिलकर जाति जनगणना की माँग रखेंगे — तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति को कानूनी चुनौतियों से बचाने की कोशिश। यह कदम 5 जून के सर्वदलीय सम्मेलन के प्रस्ताव के बाद और PMK के आंतरिक नेतृत्व विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।

मुख्य बातें

PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय से मिलकर जाति जनगणना की माँग रखेंगे।
माँग का उद्देश्य तमिलनाडु की 69 प्रतिशत आरक्षण नीति को कानूनी और संवैधानिक रूप से सुरक्षित करना है।
5 जून को चेन्नई के टी.
नगर में PMK के सर्वदलीय सम्मेलन में इस आशय का प्रस्ताव पारित हुआ था।
आरक्षण नीति को 1993 के विशेष कानून और 76वें संवैधानिक संशोधन के ज़रिये नौवीं अनुसूची में संरक्षित किया गया है।
PMK में संस्थापक डॉ.
रामदास और अंबुमणि रामदास के बीच आंतरिक नेतृत्व विवाद की पृष्ठभूमि में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पट्टली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास मंगलवार, 10 जून 2025 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात करेंगे और राज्य में जाति-आधारित जनगणना कराने की औपचारिक माँग रखेंगे। पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु की 69 प्रतिशत आरक्षण नीति को कानूनी और संवैधानिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए जाति-वार जनसंख्या के अद्यतन आँकड़े अनिवार्य हैं।

बैठक की पृष्ठभूमि

यह मुलाकात 5 जून को चेन्नई के टी. नगर में PMK द्वारा आयोजित सर्वदलीय एवं सामुदायिक नेताओं के सम्मेलन के बाद हो रही है। उस सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें राज्य सरकार से 'कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट, 2008' के प्रावधानों के तहत जाति जनगणना कराने का आग्रह किया गया। इस पहल को 'सामाजिक न्याय जनगणना' नाम दिया गया है।

PMK नेताओं के अनुसार, अंबुमणि सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे और सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा करेंगे।

69% आरक्षण और संवैधानिक पेचीदगी

तमिलनाडु में देश की सर्वाधिक आरक्षण व्यवस्थाओं में से एक लागू है — पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को मिलाकर 69 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस नीति को 1993 में पारित विशेष कानून के ज़रिये संरक्षित किया गया था और बाद में 76वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले ने असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय की है, जिससे यह मुद्दा समय-समय पर कानूनी बहस का केंद्र बनता रहा है। जाति जनगणना के समर्थकों का तर्क है कि अद्यतन जनसंख्या आँकड़े राज्य के आरक्षण ढाँचे को भविष्य की कानूनी चुनौतियों से बचाने में ठोस आधार प्रदान करेंगे।

PMK में आंतरिक नेतृत्व विवाद की छाया

यह पहल ऐसे समय में आई है जब PMK पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास और उनके पुत्र अंबुमणि रामदास के बीच आंतरिक नेतृत्व संघर्ष का सामना कर रही है। संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर हाल के महीनों में सार्वजनिक असहमति सामने आई है, जिससे वन्नियार-आधारित इस पार्टी के भीतर विभाजन उजागर हुआ है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अंबुमणि का यह नया जोर पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार को मज़बूत करने के साथ-साथ चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच अपना नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से भी प्रेरित है।

राष्ट्रीय संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में जाति जनगणना की माँग ने ज़ोर पकड़ा है और राजनीतिक दल कल्याणकारी तथा सकारात्मक कार्रवाई नीतियों को दिशा देने के लिए जाति-आधारित गणना को आवश्यक बता रहे हैं। तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में आरक्षण के विषय के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए, मुख्यमंत्री विजय के साथ इस बैठक के परिणाम पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी जब CM विजय की DMK सरकार इस पर ठोस प्रतिक्रिया देगी — क्योंकि जाति जनगणना कराना राज्य सरकार की इच्छाशक्ति और केंद्र-राज्य समन्वय दोनों पर निर्भर है। 69% आरक्षण को नौवीं अनुसूची में रखे जाने के बावजूद इंदिरा साहनी फैसले की 50% सीमा की तलवार लटकती रही है, और बिना अद्यतन जनसंख्या डेटा के यह ढाँचा कमज़ोर आधार पर खड़ा है। PMK के आंतरिक विवाद के बीच यह कदम अंबुमणि के लिए संगठनात्मक वैधता हासिल करने का अवसर भी है, जो इस माँग की राजनीतिक प्रेरणा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबुमणि रामदास CM विजय से क्यों मिल रहे हैं?
PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास तमिलनाडु में जाति-आधारित जनगणना कराने की माँग लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिल रहे हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य की 69 प्रतिशत आरक्षण नीति को कानूनी रूप से मज़बूत करने के लिए जाति-वार अद्यतन डेटा ज़रूरी है।
तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
तमिलनाडु में पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को मिलाकर 69 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, जो 1993 के विशेष कानून और 76वें संवैधानिक संशोधन के ज़रिये नौवीं अनुसूची में संरक्षित है। यह नीति इसलिए विवादास्पद रही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के इंदिरा साहनी फैसले ने आरक्षण की सामान्य सीमा 50 प्रतिशत तय की है।
PMK का सर्वदलीय सम्मेलन कब और कहाँ हुआ था?
PMK का सर्वदलीय और सामुदायिक नेताओं का सम्मेलन 5 जून को चेन्नई के टी. नगर में आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में 'कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट, 2008' के तहत जाति जनगणना कराने का प्रस्ताव पारित किया गया।
PMK में आंतरिक विवाद क्या है?
PMK के संस्थापक डॉ. एस. रामदास और उनके पुत्र एवं पार्टी अध्यक्ष अंबुमणि रामदास के बीच संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेद सामने आए हैं। हाल के महीनों में यह विवाद सार्वजनिक हुआ है, जिससे वन्नियार-आधारित इस पार्टी में विभाजन उजागर हुआ है।
जाति जनगणना से तमिलनाडु के आरक्षण को कैसे मदद मिलेगी?
जाति जनगणना के समर्थकों का तर्क है कि अद्यतन जाति-वार जनसंख्या आँकड़े राज्य के 69 प्रतिशत आरक्षण ढाँचे के लिए ठोस साक्ष्य-आधार तैयार करेंगे। इससे भविष्य में होने वाली संभावित कानूनी चुनौतियों के विरुद्ध इस नीति का बचाव करना आसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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