अंबुमणि रामदास का डीएमके पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक को गिराने का आरोप
सारांश
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कुड्डालोर (तमिलनाडु), 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस): पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के प्रमुख अंबुमणि रामदास ने रविवार को द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और उसके सहयोगियों पर सख्त आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में 'महिला आरक्षण विधेयक' को गिराने का कार्य किया है, जिसे उन्होंने महिलाओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात करार दिया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अंबुमणि ने 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर चर्चा की। इस विधेयक का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण करना था, जिससे महिला आरक्षण को लागू करना संभव हो जाता।
डीएमके को इस विधेयक को रोकने का जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की महिलाएं इस पार्टी को कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना कन्या भ्रूणहत्या से की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा विधेयक की प्रति जलाने की घटना की भी कड़ी निंदा की और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
अंबुमणि ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता, तो तमिलनाडु विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत बढ़ सकता था। उन्होंने अनुमान लगाया कि 2031 तक राज्य में लगभग 20 महिला सांसद और 117 महिला विधायक हो सकते थे।
डीएमके के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देशभर में संसदीय क्षेत्रों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का विरोध क्यों कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बयानों का हवाला देते हुए पीएमके के नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की तरह तमिलनाडु को भी लोकसभा सीटों में वृद्धि का लाभ मिल सकता है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि तमिलनाडु में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं, जबकि डीएमके उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के उपायों का विरोध कर रही है। अंबुमणि ने मुख्यमंत्री पर शासन के उपलब्धियों को उजागर करने के बजाय व्यक्तिगत हमले करने का भी आरोप लगाया।