24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डीएमके नेता रेगुपति एस. ने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में न पास होने पर जताई खुशी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डीएमके नेता रेगुपति एस. ने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में न पास होने पर जताई खुशी

सारांश

डीएमके नेता रेगुपति एस. ने महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक के पास न होने को लेकर भाजपा पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इसे एम.के. स्टालिन की जीत बताया और विपक्षी एकता की सराहना की। जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का लोकसभा में पास न होना भाजपा की नाकामी है।
डीएमके नेता रेगुपति एस.
ने इसे स्टालिन की जीत बताया।
भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
विपक्ष की एकता महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक संतुलन में बदलाव का खतरा है।

पुदुक्कोट्टई, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। डीएमके के नेता रेगुपति एस. ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक के लोकसभा में पास न होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा प्रस्तुत निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित विधेयक का पास न होना हमारे नेता एम.के. स्टालिन की पहली जीत साबित हुई है।

पत्रकारों से बातचीत में रेगुपति एस. ने बताया कि यह विधेयक एक छिपे हुए एजेंडे के तहत लाया गया था। भाजपा सरकार को स्पष्ट बहुमत नहीं है, बल्कि यह केवल अपने गठबंधन सहयोगियों के समर्थन से साधारण बहुमत हासिल किया है। उन्होंने कहा कि न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे भारत के लोग भाजपा के इस नाटक को समझेंगे।

रेगुपति ने सरकार पर परिहास करते हुए कहा कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बदले, केंद्र सरकार की ओर से यह 'इनाम' दिया गया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब ऐसे नियमों का पालन नहीं किया जाना चाहिए जो सरकार द्वारा थोपे गए हैं।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 'इंडिया' गठबंधन के तहत विपक्षी एकता की सराहना की और सामूहिक विरोध के लिए नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का उपयोग देश को उत्तर-दक्षिण आधार पर विभाजित करने और भारत के राजनीतिक संतुलन को बदलने के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जा रहा है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि यह भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में सभी लोकतांत्रिक ताकतों और विपक्षी नेताओं ने एक राष्ट्रीय आपदा को टालने में एकजुटता दिखाई।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण विधेयक पर विवाद ने राजनीतिक मोर्चे पर एक नई बहस को जन्म दिया है। विपक्षी एकता और भाजपा की रणनीतियों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य भारतीय संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण प्रदान करना है।
डीएमके नेता रेगुपति एस. ने क्या कहा?
उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में न पास होने को भाजपा की नाकामी बताया और इसे एम.के. स्टालिन की जीत के रूप में देखा।
भाजपा का इस विधेयक पर क्या रुख है?
भाजपा का कहना है कि यह विधेयक एक छिपे हुए एजेंडे के तहत लाया गया था, लेकिन उनके पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
क्या यह घटना भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण है?
हां, यह घटना भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देती है और विपक्ष की एकता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का इस पर क्या कहना है?
स्टालिन ने विपक्षी एकता की सराहना की और भाजपा पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक संतुलन को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले