भाजपा ने सीएम स्टालिन को 'संविधान-विरोधी' बयान वापस लेने के लिए कहा
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने सीएम स्टालिन के बयान को संविधान के खिलाफ माना।
- सीएम स्टालिन से बयान वापस लेने की मांग की गई।
- राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मामला महत्वपूर्ण है।
चेन्नई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में बुधवार को भाजपा ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हमला बोला और उनके बयान को 'संविधान-विरोधी' बताया। भाजपा ने सीएम स्टालिन से आग्रह किया कि वे अपने विवादास्पद बयान को त्वरित रूप से वापस लें।
तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने आरोप लगाया कि सीएम स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी करते हुए राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध की चेतावनी देना देश की संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा है।
एएनएस प्रसाद ने आगे कहा कि सीएम स्टालिन का बयान (जिसमें उन्होंने तमिलनाडु को 'ठप कर देने' और देश का ध्यान खींचने की बात कही) द्रविड़ राजनीति के पुराने अलगाववादी विचारों को पुनर्जीवित करने जैसा है। उन्होंने डीएमके के पुराने 'द्रविड़ नाडु' की मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे विचार देश की एकता और अखंडता के लिए हानिकारक हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि 'द्रविड़ नाडु' एक ऐतिहासिक मांग थी, जिसका उद्देश्य दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) को मिलाकर एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र बनाना था।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि सीएम स्टालिन विधानसभा चुनाव से पहले भाषा, जाति और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमांकन प्रक्रिया को लेकर भय का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
एएनएस प्रसाद ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन का सीमांकन प्रक्रिया का विरोध इस आरक्षण के लागू होने में देरी या बाधा उत्पन्न कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है कि किसी भी सीमांकन प्रक्रिया में तमिलनाडु के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी और राज्य के प्रतिनिधित्व पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भाजपा प्रवक्ता ने सीएम स्टालिन पर केंद्र सरकार को विरोधी के रूप में प्रस्तुत करने और जनता में 'घबराहट फैलाने' का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में तमिलनाडु के विकास के लिए लाखों करोड़ रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
एएनएस प्रसाद ने दोहराया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की नीति हर हाल में लागू होगी और किसी भी प्रकार की धमकी या चेतावनी इस संवैधानिक प्रक्रिया को रोक नहीं सकती।