सीएम स्टालिन का आरोप: परिसीमन प्रक्रिया सत्ता का हथियाना, असली सुधार नहीं
सारांश
Key Takeaways
- सीएम स्टालिन ने परिसीमन प्रक्रिया को राजनीतिक हथियाने का प्रयास बताया है।
- महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की आलोचना की गई है।
- दक्षिणी राज्यों को असमान रूप से नुकसान होने की संभावना है।
- जाति-आधारित जनगणना की मांग को दोहराया गया है।
- ओबीसी में क्रीमी लेयर की आय सीमा अपरिवर्तित है।
चेन्नई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तीव्र आलोचना करते हुए इसे वास्तविक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति को बढ़ाने का एक प्रयास करार दिया है। उन्होंने इस प्रक्रिया को महिला आरक्षण से जोड़ने के लिए भी केंद्र सरकार की निंदा की है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, "परिसीमन के नाम पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भाजपा के 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के सिद्धांत के विपरीत है। निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तार शासन में सुधार नहीं करेगा, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अनुचित असंतुलन उत्पन्न कर सकता है।"
उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को असमान रूप से नुकसान हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के प्रभावी उपायों को लागू किया है। यह कदम ऐसे राज्यों को "दंडित" करने का काम करेगा, जबकि उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों, विशेषकर उत्तरी भारत के राज्यों को लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी चिंता व्यक्त की कि इस तरह के बदलाव से संसद में उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा, जिससे दक्षिणी राज्यों की आवाज और प्रभाव कम हो जाएगा।
स्टालिन ने चेतावनी दी कि इससे भारत की संघीय संरचना कमजोर हो सकती है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण से जोड़ने की आलोचना की।
मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और अनावश्यक बताया और कहा कि महिला आरक्षण को मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर बिना देरी के लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने सामाजिक न्याय के मुद्दों, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई।
स्टालिन ने जाति-आधारित जनगणना की मांग को दोहराते हुए कहा कि ऐसे उपायों की अनदेखी से समान प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण कमजोर हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भारत की आर्थिक प्रगति के बावजूद ओबीसी में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय सीमा कई वर्षों से 8 लाख रुपए पर अपरिवर्तित है।