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महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का वोटिंग व्यवहार: भाजपा सांसदों का अन्याय का आरोप

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महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का वोटिंग व्यवहार: भाजपा सांसदों का अन्याय का आरोप

सारांश

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के न पारित होने पर भाजपा सांसदों ने विपक्ष को महिला विरोधी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का न पारित होना महिलाओं के लिए अन्याय है।
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए यह विधेयक आवश्यक था।
विपक्ष ने विधेयक का विरोध किया, जिसके संभावित कारण राजनीतिक थे।
महिलाएं इस मुद्दे पर जागरूक हो रही हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर हैं।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के न पारित होने पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण के खिलाफ काम कर रहा है, ताकि महिलाओं को इसका लाभ न मिल सके।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "जिन्होंने भी इस बिल का अध्ययन किया है, वे समझ सकते हैं कि इससे बेहतर प्रस्ताव नहीं हो सकता। हमने जो परिसीमन का प्रस्ताव दिया था, उसमें हर राज्य को बराबर हिस्सा दिया गया था, लेकिन विपक्ष इसके खिलाफ था। गृह मंत्री ने भी इस विषय को स्पष्ट किया था। विपक्ष ने एक के बाद एक बहाने बनाकर इस विधेयक को रोकने का प्रयास किया है। वे नहीं चाहते कि आधी जनसंख्या को उनका हक मिले। देश की महिलाएं इस सत्र को सुन रही थीं और वे आगामी समय में विपक्ष को इसका जवाब देंगी।"

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा, "विपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ वोटिंग की है। महिलाएं इस अन्याय को माफ नहीं करेंगी। विपक्ष की भूमिका महिलाओं के खिलाफ है, और उन्होंने एक बड़ा अन्याय किया है।"

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? यदि इसे 2023 के अधिनियम के आधार पर लागू किया जाता है, तो 2026 की जनगणना के अनुसार तमिलनाडु में 39 में से 29 लोकसभा सीटें रह जाएंगी। इसी प्रकार केरल में 20 में से 14 सीटें रह जाएंगी।"

जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक, जो पहले ही 2023 में पारित हो चुका था, अब फिर से प्रस्तुत किया गया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, और 2029 में चुनाव इसी व्यवस्था के तहत होंगे।"

केंद्रीय मंत्री बनवारी लाल वर्मा ने कहा, "नारी सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक का विरोध विपक्ष ने पूरे देश की महिलाओं के सामने रखा है।"

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "यह परिसीमन का विरोध नहीं था। इससे स्पष्ट है कि 2029 में जब ये 33 प्रतिशत महिलाएं इस लोकसभा में आएंगी, तब उन्हें रोकने का प्रयास किया गया है। यह केवल महिलाओं का अपमान नहीं है, बल्कि विपक्ष ने विश्वासघात किया है और उनका असली चेहरा सामने आ गया है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए सुरक्षित सीटों का प्रावधान करना है।
विपक्ष ने इस बिल का विरोध क्यों किया?
विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक में कुछ तकनीकी और राजनीतिक मुद्दे हैं, जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है।
क्या इस विधेयक का पारित न होना महिलाओं के लिए नुकसानदायक है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण था, और इसका न पारित होना एक बड़ा अन्याय है।
इस विधेयक का क्या भविष्य है?
भाजपा सांसदों का मानना है कि भविष्य में यह विधेयक फिर से पेश किया जाएगा और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाएगा।
महिलाएं इस मुद्दे पर क्या सोचती हैं?
महिलाएं इस मुद्दे पर जागरूक हो रही हैं और आने वाले समय में अपने अधिकारों के लिए लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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