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भाजपा का विपक्ष पर कटाक्ष: 27 सालों तक महिलाओं के अधिकारों में बाधा, अब भी अड़ंगा

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भाजपा का विपक्ष पर कटाक्ष: 27 सालों तक महिलाओं के अधिकारों में बाधा, अब भी अड़ंगा

सारांश

भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर महिलाओं के सशक्तीकरण में रुकावट डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 27 वर्षों तक महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। जानें इस महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में और विपक्ष की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।
भाजपा ने इसे एक ऐतिहासिक विधेयक बताया है।
विपक्ष पर महिलाओं के सशक्तीकरण में रुकावट डालने का आरोप लगाया गया।
सांसदों ने इसे 2029 तक लागू करने का वचन दिया है।
महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नारी वंदन शक्ति अधिनियम और महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में और बाहर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के कई सांसदों ने इस विधेयक को ऐतिहासिक मानते हुए विपक्ष पर महिलाओं के सशक्तीकरण में रुकावट डालने का आरोप लगाया है।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "इन लोगों ने 27 वर्षों तक महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा। अब भी विपक्ष नहीं चाहता कि महिलाएं सशक्त हों, इसीलिए वे बहानेबाजी कर रहे हैं। विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व आवश्यक है। यह बिल न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना भी है।"

भाजपा सांसद रविकिशन ने कहा, "विपक्ष इस बिल को लेकर आगे नहीं आया है। देश की महिलाएं पूछ रही हैं कि यह बिल अब तक क्यों नहीं आया। इससे बड़ा कदम कोई नहीं हो सकता। विपक्ष चिल्ला रहा है क्योंकि महिलाएं अब राजनीति में भाग लेंगी।"

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, "आज का दिन भारत की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। मैं विपक्ष से आग्रह करती हूँ कि यह वचन पूरा करने का समय है। हमने, पूरे सदन ने मातृशक्ति से वादा किया था कि इसे 2029 तक लागू करेंगे। विपक्ष का इस प्रकार का बहाना बनाना उचित नहीं है।"

भाजपा सांसद शशांक मणि ने कहा, "यह एक महत्वपूर्ण बिल है। हमें इसे विलंबित नहीं करना चाहिए। यदि हम इसे 2026 की जनगणना पर आधारित करना चाहते हैं, तो यह महिला अधिनियम फिर से 5 वर्षों के लिए टल जाएगा, जो महिलाओं और देश के लिए खतरे की बात है। मुझे विश्वास है कि सभी इसे सर्वसम्मति से पारित करेंगे।"

भाजपा सांसद मदान राठौड़ ने कहा, "विपक्ष के नेताओं को नहीं पता कि छोटे राज्यों की मांग क्यों होती है। छोटे राज्यों की मांग इसलिए होती है ताकि काम सही तरीके से हो सके। अगर लोकसभा और विधानसभा की सीमाएं छोटी होंगी तो निगरानी सही तरीके से हो सकेगी।"

भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा, "विपक्ष का उद्देश्य देश के लोगों में भ्रम फैलाना और महिला आरक्षण को रोकना है। उन्होंने 40-50 वर्षों तक शासन किया, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आया कि परिसीमन की जरूरत है। जब जनसंख्या बढ़ गई है, तो समान परिसीमन आवश्यक है।"

भाजपा सांसद बृजलाल ने कहा, "पहले विपक्ष यह मुद्दा उठाता था कि दक्षिण भारत की जनसंख्या कम है। लेकिन अब जब जनसंख्या के हिसाब से बढ़ोतरी की गई है, तो उन्हें क्या समस्या होनी चाहिए? विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

भाजपा ने इस विधेयक को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा है, जो महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास है। यह विषय राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारी वंदन शक्ति अधिनियम क्या है?
यह एक विधेयक है जो महिलाओं के सशक्तीकरण और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें सुनिश्चित करना है।
भाजपा ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया है?
भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 27 वर्षों तक महिलाओं के अधिकारों का समर्थन नहीं किया।
इस विधेयक का प्रभाव क्या होगा?
यह विधेयक महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी और अधिकार प्रदान करेगा।
क्या विपक्ष इस बिल का समर्थन करेगा?
विपक्ष की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन भाजपा ने आशा जताई है कि यह बिल सर्वसम्मति से पारित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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