ममता बनर्जी का मोदी पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक गिरने से गुमराह करने का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: टीएमसी ने संसद में महिलाओं के उच्च प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है।
- मोदी सरकार का विरोध: ममता ने मोदी सरकार द्वारा महिलाओं के मुद्दों पर ध्यान नहीं देने की आलोचना की है।
- परिसीमन का विरोध: उन्होंने परिसीमन को महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया।
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के गिरने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के देश को संबोधित करने को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर देश को भटकाने का निर्णय लिया है।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह अत्यंत दुखद है कि प्रधानमंत्री ने ईमानदारी से इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय जनता को गुमराह करना चुना। मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व की समर्थक रही है। संसद और राज्य विधानसभा दोनों में महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों का अनुपात हमारे यहाँ सबसे अधिक है। लोकसभा में हमारे 37.9 प्रतिशत निर्वाचित सदस्य महिलाएं हैं। राज्यसभा में हमने 46 प्रतिशत महिला सदस्यों को मनोनीत किया है। हम कभी भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि हम मोदी सरकार द्वारा महिलाओं को ढाल बनाकर अपने निहित स्वार्थों को छिपाने के लिए किए जा रहे परिसीमन का घोर विरोध करते हैं। हम बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान में हेरफेर, देश का विभाजन और राजनीतिक सीमाओं में बदलाव करके भाजपा शासित राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर सत्ता हथियाने का घोर विरोध करते हैं। यह संघीय लोकतंत्र पर एक हमला है और हम इसे चुपचाप नहीं देखेंगे।
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि यदि यह सरकार वाकई इस नेक काम के लिए गंभीर थी, तो 28 सितंबर, 2023 को महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद लगभग तीन साल तक इंतजार क्यों किया? कई राज्यों में चुनाव होने के बावजूद इसे जल्दबाजी में क्यों पारित किया गया? और परिसीमन के साथ इसे क्यों जोड़ा गया? तृणमूल कांग्रेस दशकों से महिलाओं के लिए खड़ी रही है। हम आगे भी खड़े रहेंगे। लेकिन हम उस विषय पर उपदेश नहीं सुनेंगे जिसे सत्ताधारी दल न तो समझता है और न ही सम्मान करता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि अगली बार जब आप राष्ट्र को संबोधित करें, तो संसद के पटल से ऐसा करने का साहस दिखाएं, जहां आपकी हर बात पर कड़ी नजर रखी जाएगी, आपसे सवाल किए जाएंगे और आप जवाबदेह होंगे। कल आपने जो किया वह कायरतापूर्ण, पाखंडी और कुटिल था। आपको यह महसूस हो रहा है कि सत्ता आपके हाथों से फिसल रही है। और आप बस कुछ और समय तक सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। बस यही सब था।