पीएमके संस्थापक रामदास की माँग: तमिलनाडु में डॉक्टर-नर्स पद दोगुने करे सरकार
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने तमिलनाडु सरकार से राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को तत्काल और व्यापक रूप से सुदृढ़ करने की माँग की है। 7 जून को जारी एक विस्तृत बयान में उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की दशकों पुरानी कमी अब संकट का रूप ले चुकी है। उनके अनुसार, अस्पतालों का विस्तार तो हुआ, लेकिन उसी अनुपात में मानव-संसाधन नहीं बढ़ाया गया।
ढाँचे का विस्तार, कर्मचारियों की कमी
रामदास ने कहा कि पिछले एक दशक में चिकित्सा सेवाएं एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत कई नए अस्पताल बनाए गए हैं और मौजूदा संस्थानों को नई इमारतों, विभागों तथा मेडिकल सर्विस प्रोग्राम के साथ उन्नत किया गया है। परंतु इन सुविधाओं के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती उसी गति से नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 2015 के बाद से सरकारी डॉक्टरों के नए पद बड़े पैमाने पर सृजित नहीं किए गए, जबकि कोविड-19 महामारी के बाद मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है।
मरीज़ तीन गुना, स्टाफ वही
रामदास के अनुसार, हाल के वर्षों में सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने वाले मरीजों की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है, जिससे मौजूदा स्वास्थ्यकर्मियों पर असहनीय दबाव पड़ रहा है। भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (IPHS) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु को डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की मौजूदा संख्या से कम से कम दोगुने कर्मचारियों की ज़रूरत है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के नवनिर्मित बड़े अस्पतालों — गिंडी स्थित कलैगनार शताब्दी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कोलाथुर का पेरियार सरकारी अस्पताल, और वेल्लोर व सलेम में हाल ही में विकसित अस्पताल — में नए पद सृजित करने के बजाय अन्य अस्पतालों से कर्मचारियों को स्थानांतरित कर काम चलाया जा रहा है।
प्रमुख माँगें
रामदास ने तमिलनाडु सरकार के समक्ष कई ठोस माँगें रखीं। उन्होंने सरकारी आदेश संख्या 354 की समीक्षा और राज्य सरकार के डॉक्टरों के लिए केंद्र सरकार के डॉक्टरों के समकक्ष वेतन की माँग की। उनका तर्क है कि बेहतर वेतन और करियर में उन्नति के अवसर चिकित्सा पेशेवरों की कार्यक्षमता और मनोबल दोनों को बेहतर बनाएँगे।
इसके अतिरिक्त उन्होंने DM और MCH सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में राज्य सरकार के डॉक्टरों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को पूर्णतः लागू करने, नर्सिंग पदों की संख्या बढ़ाने, कॉन्ट्रैक्ट नर्सों को नियमित करने और आउटसोर्सिंग के स्थान पर अस्पताल सहायक कर्मचारियों के लिए स्थायी पद बनाने की माँग की।
बुनियादी सुविधाओं पर जोर
पीएमके नेता ने जिला अस्पतालों में चौबीसों घंटे एक्स-रे सुविधाएँ, सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाओं का विस्तार, हेल्थ इंस्पेक्टरों की शीघ्र नियुक्ति, दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति की गुणवत्ता पर कड़ा नियंत्रण तथा बुनियादी ढाँचे के विकास व गुणवत्ता आश्वासन की निगरानी के लिए विशेष प्रबंधन समितियाँ गठित करने की माँग भी की।
आगे क्या
रामदास ने सरकार से आग्रह किया कि इन माँगों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए ताकि तमिलनाडु के नागरिकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ मिल सकें। गौरतलब है कि यह माँग ऐसे समय में आई है जब राज्य भर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को लेकर विभिन्न वर्गों से आवाज़ें उठ रही हैं। अब देखना यह है कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार इन माँगों पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देती है।