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पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास की माँग: तमिलनाडु के 6 जिलों में तुरंत खुलें सरकारी मेडिकल कॉलेज, एनएमसी के नियम हटने के बाद रास्ता साफ

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पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास की माँग: तमिलनाडु के 6 जिलों में तुरंत खुलें सरकारी मेडिकल कॉलेज, एनएमसी के नियम हटने के बाद रास्ता साफ

सारांश

एनएमसी द्वारा प्रति 10 लाख आबादी पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा वाला नियम हटाए जाने के बाद पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु के 6 जिलों में तत्काल सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की माँग की है। साथ ही डीएमके सरकार पर चार साल में एक भी नया कॉलेज न खोलने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, पेरंबलूर और तेनकासी में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की माँग की।
एनएमसी ने 27 अप्रैल 2026 को नया नोटिफिकेशन जारी कर प्रति 10 लाख आबादी पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा वाला नियम समाप्त किया।
पुराने नियम के तहत तमिलनाडु को केवल 7,731 सीटें मिलतीं, जबकि राज्य में पहले से 12,650 सीटें मौजूद थीं।
रामदास ने डीएमके सरकार पर चार वर्षों में एक भी नया सरकारी मेडिकल कॉलेज न खोलने का आरोप लगाया।
AIADMK के कार्यकाल में 50 महीनों में 13 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले गए थे।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने 4 मई 2026 को तमिलनाडु सरकार से माँग की कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा प्रतिबंधात्मक नियम वापस लिए जाने के बाद कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, पेरंबलूर और तेनकासी जिलों में बिना देरी के नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएँ। 27 अप्रैल 2026 को जारी एनएमसी के नए नोटिफिकेशन ने उस नियम को समाप्त कर दिया है जो तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों में मेडिकल शिक्षा के विस्तार में वर्षों से बाधा बन रहा था।

क्या था प्रतिबंधात्मक नियम

16 अगस्त 2023 को एनएमसी ने एक नियम जारी किया था जिसके तहत प्रति 10 लाख आबादी पर अधिकतम 100 एमबीबीएस सीटें ही मान्य होंगी। रामदास ने बताया कि इस अनुपात के अनुसार तमिलनाडु को केवल 7,731 एमबीबीएस सीटों की अनुमति मिलती, जबकि राज्य के सरकारी और निजी कॉलेजों में पहले से 12,650 सीटें उपलब्ध थीं। इस असमानता के कारण राज्य में नए मेडिकल कॉलेज खोलने या सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी।

एनएमसी ने बाद में इस नियम के लागू होने को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया था और केवल उन्हीं संस्थानों को मंजूरी दी थी जिन्होंने 2025 से पहले आवेदन किया था। अब 27 अप्रैल 2026 के नए नोटिफिकेशन से यह बाधा पूरी तरह हट गई है।

पीएमके का पुराना विरोध और प्रधानमंत्री को पत्र

रामदास ने स्पष्ट किया कि पीएमके ने शुरू से ही इस नियम का विरोध किया था। उन्होंने इसे वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। उनके अनुसार, यह नियम न केवल तमिलनाडु बल्कि अन्य दक्षिणी राज्यों में भी मेडिकल शिक्षा के विस्तार की रुकी हुई योजनाओं को प्रभावित कर रहा था। नए नोटिफिकेशन का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि अब इन राज्यों में विस्तार को फिर से गति मिलेगी।

डीएमके सरकार पर आरोप

रामदास ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सरकार पर आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल में एक भी नया सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खोला गया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पिछले चार वर्षों में — यहाँ तक कि 2025 में प्रतिबंध लागू होने से पहले भी — नए कॉलेज स्थापित करने का पर्याप्त समय था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया।

तुलनात्मक रूप से, उन्होंने बताया कि एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सरकार के दौरान 50 महीनों में 13 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले गए थे, जो राज्य के इतिहास में सर्वाधिक हैं।

आगे की राह और पीएमके का लक्ष्य

रामदास ने पीएमके के दीर्घकालिक लक्ष्य को दोहराया कि तमिलनाडु के हर जिले में कम से कम एक सरकारी मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य ढाँचे तक पहुँच बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि जनहितकारी सरकार सत्ता में आती है, तो पीएमके इस दिशा में तेज़ी से कदम उठाने के लिए दबाव बनाएगी। नियामकीय बाधाएँ हटने के बाद अब राज्य सरकार की इच्छाशक्ति ही असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि तमिलनाडु सरकार इस अवसर का उपयोग करेगी या नहीं। रामदास का डीएमके पर आरोप राजनीतिक रूप से तीखा है, पर यह तथ्य कि पिछले चार वर्षों में एक भी नया सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खुला, सरकार के लिए असुविधाजनक प्रश्न खड़े करता है। 'हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज' का लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेगा जब तक बजट आवंटन, भूमि अधिग्रहण और फैकल्टी भर्ती की ठोस समयसीमा नहीं तय होती।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएमसी ने कौन सा नियम वापस लिया है?
एनएमसी ने 16 अगस्त 2023 को जारी वह नियम वापस लिया है जिसमें प्रति 10 लाख आबादी पर अधिकतम 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा तय की गई थी। 27 अप्रैल 2026 के नए नोटिफिकेशन से यह प्रतिबंध समाप्त हो गया है।
तमिलनाडु के किन 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की माँग है?
पीएमके ने कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, पेरंबलूर और तेनकासी जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की माँग की है। इन जिलों में अभी तक कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है।
पुराने एनएमसी नियम से तमिलनाडु को क्या नुकसान हो रहा था?
पुराने नियम के तहत तमिलनाडु को केवल 7,731 एमबीबीएस सीटों की अनुमति मिलती, जबकि राज्य में पहले से 12,650 सीटें मौजूद थीं। इस कारण कोई भी नया मेडिकल कॉलेज खोलना या सीटें बढ़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया था।
डीएमके सरकार पर पीएमके का क्या आरोप है?
अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने अपने कार्यकाल के चार वर्षों में एक भी नया सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खोला। उनके अनुसार 2025 में प्रतिबंध लागू होने से पहले भी सरकार के पास पर्याप्त समय था।
AIADMK सरकार के दौरान कितने मेडिकल कॉलेज खुले थे?
एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK सरकार के कार्यकाल में 50 महीनों में 13 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले गए थे, जो तमिलनाडु के इतिहास में किसी एक सरकार द्वारा खोले गए सर्वाधिक कॉलेज हैं।
राष्ट्र प्रेस
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