26 जून 2026
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दिल्ली पुलिस ने 26 साल पुराना हत्या-लूट केस सुलझाया, मुख्य आरोपी बिहार के समस्तीपुर से गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने 26 साल पुराना हत्या-लूट केस सुलझाया, मुख्य आरोपी बिहार के समस्तीपुर से गिरफ्तार

सारांश

26 साल तक फरार रहा हत्यारा आखिरकार पकड़ा गया। दिल्ली के मुखर्जी नगर में वर्ष 2000 में हुई आशा छाबड़ा की हत्या और लूट का मुख्य आरोपी नरेश मुखिया बिहार के एक गाँव में किराना दुकान चला रहा था — जब तक दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस से उसे दबोच नहीं लिया।

मुख्य बातें

नरेश मुखिया उर्फ नागेश्वर मुखिया को 2 मई 2026 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ममूरपुर गाँव से गिरफ्तार किया गया।
यह मामला वर्ष 2000 में मुखर्जी नगर, नई दिल्ली में दर्ज हुआ था, जब महिला आशा छाबड़ा की हत्या कर 8 लाख रुपये लूटे गए थे।
आरोपी को अदालत पहले ही 'घोषित अपराधी' घोषित कर चुकी थी और वह 26 वर्षों से फरार था।
आरोपी ने सिलिगुड़ी, कोलकाता, अहमदाबाद और अंततः बिहार में छुपकर पहचान बदलने की कोशिश की।
गिरफ्तारी इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर की।

दिल्ली पुलिस ने मुखर्जी नगर इलाके के 26 साल पुराने एक हत्या-सह-लूट मामले का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी नरेश मुखिया उर्फ नागेश्वर मुखिया को 2 मई 2026 को बिहार के समस्तीपुर जिले से गिरफ्तार किया। यह मामला वर्ष 2000 में दर्ज हुआ था, जब मुखर्जी नगर में महिला आशा छाबड़ा की बेरहमी से हत्या कर उनके घर से 8 लाख रुपये नकद और अन्य कीमती सामान लूट लिया गया था। अदालत द्वारा 'घोषित अपराधी' करार दिए जा चुके इस आरोपी को पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर दबोचा।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई थी हत्या

नरेश मुखिया उस समय मुखर्जी नगर की उसी इमारत में काम करता था जहाँ आशा छाबड़ा दूसरी मंजिल पर रहती थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी को यह जानकारी मिली थी कि महिला ने अपना मकान बेचकर करीब 35 से 40 लाख रुपये नकद घर में रखे हुए हैं।

इसी लालच में जनवरी 2000 में आरोपी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुँचा। घर का दरवाजा खुला मिलने पर वह चुपचाप अंदर घुसा और अलमारी खोलने लगा। तभी आशा छाबड़ा वहाँ आ गईं और शोर मचाया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें पकड़कर फोन के तार से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी और अलमारी से 8 लाख रुपये व अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए।

26 साल तक कैसे बचता रहा आरोपी

हत्या के बाद नरेश मुखिया ने लगातार अपनी लोकेशन बदलती रही। पुलिस के अनुसार, वह पहले सिलिगुड़ी, फिर कोलकाता, उसके बाद अहमदाबाद में रहा और अंततः अपने गृह जिले बिहार के समस्तीपुर में लौट आया। गिरफ्तारी के समय वह समस्तीपुर के सिंघिया थाना क्षेत्र के ममूरपुर गाँव में एक छोटी किराना दुकान चला रहा था। जाँच में यह भी सामने आया कि उसने पहचान छुपाने की पूरी कोशिश की और शराब का आदी हो गया था।

विशेष टीम की भूमिका और गिरफ्तारी

हाल ही में इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने इस पुराने केस को फिर से खंगालना शुरू किया। एएसआई प्रदीप और हेड कांस्टेबल नरेंद्र की खुफिया सूचनाओं के आधार पर टीम ने तकनीकी सर्विलांस से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की।

2 मई 2026 को एक संयुक्त टीम — जिसमें एसआई निरंजन, एएसआई पवन, हेड कांस्टेबल सचिन, मुकेश, विक्रांत और कांस्टेबल मनोज शामिल थे — ने ममूरपुर गाँव में छापा मारकर नरेश मुखिया को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया। गौरतलब है कि यह मामला इतना पुराना था कि कई लोगों को उम्मीद छोड़ देने पर मजबूर होना पड़ा था।

आम जनता और पीड़ित परिवार पर असर

यह गिरफ्तारी न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद लेकर आई है, बल्कि यह भी साबित करती है कि दीर्घकालिक अपराध मामलों में तकनीकी जाँच और लगातार प्रयास अंततः परिणाम दे सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस पुराने अनसुलझे मामलों की समीक्षा अभियान चला रही है।

आगे क्या होगा

गिरफ्तार नरेश मुखिया को नई दिल्ली लाया जाएगा और उचित न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अब उसके उन साथियों की तलाश में जुटी है जो इस हत्या-लूट में शामिल थे। मामले की आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में रहा, फिर भी पकड़ में नहीं आया। यह गिरफ्तारी तकनीकी सर्विलांस की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है, लेकिन यह भी उजागर करती है कि पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। पुराने अनसुलझे मामलों की व्यवस्थित समीक्षा के लिए एक स्थायी तंत्र की जरूरत है, न कि छिटपुट विशेष अभियानों की।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने 26 साल पुराने हत्या केस में किसे गिरफ्तार किया?
दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी नरेश मुखिया उर्फ नागेश्वर मुखिया को 2 मई 2026 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ममूरपुर गाँव से गिरफ्तार किया। वह वर्ष 2000 में मुखर्जी नगर में हुई आशा छाबड़ा की हत्या और लूट का मुख्य आरोपी है।
मुखर्जी नगर हत्या-लूट केस में क्या हुआ था?
जनवरी 2000 में नरेश मुखिया और उसके साथियों ने मुखर्जी नगर में आशा छाबड़ा के घर में घुसकर उनका फोन के तार से गला घोंटकर हत्या कर दी और अलमारी से 8 लाख रुपये व अन्य कीमती सामान लूट लिया। आरोपी को पता था कि महिला ने मकान बेचकर 35-40 लाख रुपये नकद घर में रखे हैं।
आरोपी 26 साल तक पुलिस से कैसे बचता रहा?
पुलिस के अनुसार नरेश मुखिया ने लगातार अपनी लोकेशन बदली — वह सिलिगुड़ी, कोलकाता, अहमदाबाद में रहा और अंत में बिहार के समस्तीपुर में लौट आया। गिरफ्तारी के समय वह एक छोटी किराना दुकान चला रहा था और उसने अपनी पहचान छुपाने की पूरी कोशिश की थी।
आरोपी को पकड़ने में किस टीम ने मदद की?
इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। एएसआई प्रदीप और हेड कांस्टेबल नरेंद्र की सूचना निर्णायक साबित हुई।
अब आगे इस मामले में क्या होगा?
गिरफ्तार नरेश मुखिया को नई दिल्ली लाया जाएगा और संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अब उसके उन साथियों की तलाश में जुटी है जो इस हत्या-लूट की वारदात में शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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