छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 13 परिसरों पर छापा मारकर ₹5.39 करोड़ नकद व सोना जब्त किया

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 13 परिसरों पर छापा मारकर ₹5.39 करोड़ नकद व सोना जब्त किया

सारांश

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की जाँच अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही — 13 परिसरों पर एक साथ छापा, ₹5.39 करोड़ की जब्ती और ₹380 करोड़ की कुर्की यह बताती है कि एजेंसी नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने की कोशिश में है। ₹2,883 करोड़ के कथित घोटाले में नौ गिरफ्तारियाँ और 81 आरोपी पहले से ही अदालतों में हैं।

Key Takeaways

ईडी ने 30 अप्रैल 2026 को रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर के 13 परिसरों पर छापेमारी की। जब्त सामग्री में ₹53 लाख नकद और 3.234 किलोग्राम सोना (मूल्य लगभग ₹4.86 करोड़ ) शामिल है; कुल जब्ती ₹5.39 करोड़ । कथित घोटाले की कुल अपराध धनराशि ₹2,883 करोड़ अनुमानित; कालखंड 2019–2022 । पीएमएलए की धारा 19 के तहत अब तक 9 लोग गिरफ्तार, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री, आईएएस अधिकारी और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र शामिल। पीएमएलए के तहत ₹380 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क; 81 आरोपियों के खिलाफ 6 अभियोग दाखिल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जाँच को और धार देते हुए 30 अप्रैल 2026 को रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों के 13 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया और लगभग ₹5.39 करोड़ की नकदी व कीमती सामान जब्त किया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई।

छापेमारी में क्या-क्या मिला

ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस की टीमों ने इस अभियान में ₹53 लाख नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण व ईंटें बरामद कीं, जिनका बाज़ार मूल्य करीब ₹4.86 करोड़ आँका गया है। इसके अतिरिक्त, अनेक आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए, जिनकी जाँच जारी है।

इस तलाशी अभियान में मुख्य रूप से शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, व्यवसायियों और कॉरपोरेट संस्थाओं को निशाना बनाया गया, जिन पर घोटाले से जुड़ी अपराध की आय को संभालने या छिपाने में संलिप्त होने का संदेह है।

घोटाले की पृष्ठभूमि

यह कथित घोटाला 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन वसूली से संबंधित है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) रायपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी इस मामले की जाँच कर रही है।

ईओडब्ल्यू/एसीबी के आरोप पत्रों के अनुसार, इस घोटाले के ज़रिये अर्जित अपराध की कुल धनराशि लगभग ₹2,883 करोड़ होने का अनुमान है। गौरतलब है कि अब तक की जाँच में वरिष्ठ नौकरशाहों, शराब उत्पादकों, एफएल-10ए लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों की मिलीभगत से एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का संकेत मिला है।

अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ

ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री के एक उप सचिव सहित अन्य लोग शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पीएमएलए के तहत अब तक छह अंतरिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग ₹380 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क की जा चुकी हैं। इनमें आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियाँ, बैंक खाते, वाहन, आभूषण और आरोपियों की कथित बेनामी संस्थाओं से जुड़े शेयर शामिल हैं। नई दिल्ली स्थित न्याय निर्णायक प्राधिकरण ने इनमें से कई कुर्कियों की पुष्टि कर दी है।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे की राह

ईडी ने रायपुर स्थित पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत में 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ छह अभियोग दायर किए हैं। ये मामले फिलहाल विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों में विचाराधीन हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हालिया तलाशी में मिले साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेज़ दाखिल करने और नए अभियोग लगाने सहित आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि ईडी की जाँच का दायरा आने वाले समय में और विस्तृत हो सकता है।

Point of View

जिसमें राज्य परिवर्तन के बाद केंद्रीय एजेंसियाँ पिछली सरकार के कार्यकाल की जाँच तेज़ करती हैं। ₹2,883 करोड़ की अनुमानित अपराध धनराशि और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र समेत नौ गिरफ्तारियाँ इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करती हैं। असली कसौटी यह है कि क्या विशेष अदालत में दाखिल छह अभियोग समयबद्ध सुनवाई तक पहुँचेंगे — भारत में आर्थिक अपराध मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया अक्सर जवाबदेही को कमज़ोर कर देती है। ₹380 करोड़ की कुर्की प्रभावशाली दिखती है, लेकिन ₹2,883 करोड़ के अनुमानित घोटाले के सामने यह अभी भी एक छोटा अंश है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला क्या है?
यह कथित घोटाला 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन वसूली से संबंधित है। ईओडब्ल्यू/एसीबी के आरोप पत्रों के अनुसार इसमें लगभग ₹2,883 करोड़ की अपराध धनराशि अर्जित की गई।
ईडी ने ताज़ा छापेमारी में क्या जब्त किया?
ईडी ने 30 अप्रैल 2026 को 13 परिसरों पर छापा मारकर ₹53 लाख नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण व ईंटें (मूल्य करीब ₹4.86 करोड़) बरामद कीं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹5.39 करोड़ है। इसके साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र शामिल हैं।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति कुर्क की है?
पीएमएलए के तहत छह अंतरिम कुर्की आदेशों के ज़रिये लगभग ₹380 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इनमें आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियाँ, बैंक खाते, वाहन, आभूषण और बेनामी संस्थाओं के शेयर शामिल हैं।
यह मामला अदालत में किस स्तर पर है?
ईडी ने रायपुर की पीएमएलए विशेष अदालत में 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ छह अभियोग दाखिल किए हैं। ये मामले विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों में विचाराधीन हैं।
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