एमपी ट्रांसको ने बड़वानी के जुलवानिया सब स्टेशन में 40 एमवीए ट्रांसफार्मर किया ऊर्जीकृत, क्षमता बढ़कर 2642 एमवीए
सारांश
Key Takeaways
मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने 3 मई को जानकारी दी कि मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने बड़वानी जिले के 220 केवी सब स्टेशन जुलवानिया में 40 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत कर दिया है। इस कदम से बड़वानी जिले की कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 2642 एमवीए हो गई है और हजारों घरेलू व कृषि उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
क्या बदलाव किया गया
ऊर्जा मंत्री तोमर के अनुसार, जुलवानिया 220 केवी सब स्टेशन में वर्तमान और भविष्य की बढ़ती विद्युत माँग को ध्यान में रखते हुए पुराने 20 एमवीए के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर दोगुनी क्षमता यानी 40 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इस उन्नयन के बाद जुलवानिया सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 423 एमवीए हो गई है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि 220 केवी सब स्टेशन जुलवानिया से 33 केवी के छह फीडरों के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जाती है। इन फीडरों में राजपुर, सेंधवा, नागलवाड़ी, मनवाड़ा, जुलवानिया एवं सेगांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों के हजारों घरेलू और कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को अब अधिक गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध होगी।
बड़वानी जिले का समग्र ट्रांसमिशन नेटवर्क
एमपी ट्रांसको बड़वानी जिले में कुल 9 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है। इनमें 400 केवी जुलवानिया की क्षमता 1490 एमवीए है। 220 केवी के दो सब स्टेशनों में जुलवानिया 423 एमवीए एवं सेंधवा 223 एमवीए शामिल हैं।
132 केवी के छह सब स्टेशनों में सेंधवा 113 एमवीए, शाहपुरा 40 एमवीए, बड़वानी 123 एमवीए, पानसेमल 90 एमवीए, पाटी 50 एमवीए और अंजड 90 एमवीए की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता है। इन सभी सब स्टेशनों की सम्मिलित कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता 2642 एमवीए है।
आगे की दिशा
यह उन्नयन मध्य प्रदेश सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ट्रांसमिशन बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया जा रहा है। गौरतलब है कि बड़वानी जिले में कृषि आधारित विद्युत माँग निरंतर बढ़ रही है, और इस तरह के क्षमता विस्तार से भविष्य में आपूर्ति बाधाओं की संभावना कम होगी।