10 अगस्त 2026
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आरबीएसके 2.0 दिशानिर्देश जारी: बाल स्वास्थ्य जांच में मानसिक स्वास्थ्य और एनसीडी स्क्रीनिंग भी शामिल

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आरबीएसके 2.0 दिशानिर्देश जारी: बाल स्वास्थ्य जांच में मानसिक स्वास्थ्य और एनसीडी स्क्रीनिंग भी शामिल

सारांश

स्वास्थ्य मंत्रालय का आरबीएसके 2.0 सिर्फ एक अपडेट नहीं, बल्कि बाल स्वास्थ्य की परिभाषा बदलने की कोशिश है। मानसिक स्वास्थ्य, मधुमेह जैसे NCDs और डिजिटल ट्रैकिंग को शामिल कर यह कार्यक्रम अब केवल जीवित रहने से आगे — समग्र विकास की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 मई 2026 को आरबीएसके 2.0 के नवीनतम दिशानिर्देश राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में जारी किए।
कार्यक्रम का दायरा जन्म से 18 वर्ष तक; अब मानसिक स्वास्थ्य , NCDs (मधुमेह, उच्च रक्तचाप) की स्क्रीनिंग भी शामिल।
फोर डी दृष्टिकोण — जन्मजात दोष, रोग, कमियाँ और विकासात्मक विलंब — को और सुदृढ़ किया गया।
डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड और रीयल-टाइम डेटा सिस्टम से जवाबदेही और कार्यक्षमता बढ़ाने का लक्ष्य।
आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में मोबाइल टीमों के ज़रिए सार्वभौमिक स्क्रीनिंग जारी रहेगी।
स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बहु-क्षेत्रीय समन्वय पर ज़ोर।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 मई 2026 को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में बेहतर प्रथाओं और नवाचारों पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के नवीनतम दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश एक दशक से अधिक के कार्यान्वयन अनुभव पर आधारित हैं और जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की बदलती स्वास्थ्य ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दायरे का विस्तार करते हैं।

आरबीएसके 2.0 में क्या है नया

संशोधित ढाँचा स्थापित फोर डी दृष्टिकोण — जन्मजात दोष, रोग, कमियाँ और विकासात्मक विलंब — को और सुदृढ़ बनाता है। इसके साथ ही अब गैर-संक्रामक रोगों (NCDs), मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और व्यवहार संबंधी चिंताओं को भी स्क्रीनिंग के दायरे में लाया गया है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिम कारकों की बचपन में ही पहचान करना इस संशोधित कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता है।

दिशानिर्देश एक व्यापक निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक देखभाल की निरंतरता प्रस्तुत करते हैं। यह बदलाव भारत की विकसित होती बाल स्वास्थ्य आवश्यकताओं और केवल जीवित रहने नहीं, बल्कि समग्र विकास और वृद्धि सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

स्क्रीनिंग का विस्तारित दायरा

आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में मोबाइल स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से स्क्रीनिंग सेवाएँ जारी रहेंगी, जिससे सार्वभौमिक पहुँच और शीघ्र पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। विकासात्मक विकार और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ — जो पहले इस कार्यक्रम में सीमित रूप से शामिल थीं — अब स्क्रीनिंग सूची में प्रमुखता से रखी गई हैं।

गौरतलब है कि भारत में बाल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अब तक बेहद सीमित रही है, ऐसे में आरबीएसके 2.0 का यह कदम नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रेफरल ट्रैकिंग और देखभाल की निरंतरता

संशोधित दिशानिर्देशों में रेफरल संबंधों को मजबूत करने और देखभाल की निरंतरता पर विशेष ज़ोर दिया गया है। सामुदायिक स्तर की स्क्रीनिंग से लेकर स्वास्थ्य सुविधा-आधारित निदान और उपचार तक के स्पष्ट रूप से परिभाषित मार्ग तय किए गए हैं। एक सुदृढ़ रेफरल ट्रैकिंग प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त बच्चों को पूरी देखभाल प्रक्रिया के दौरान ट्रैक किया जाए, जिससे उपचार बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम हो।

डिजिटल स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार

सरकार के डिजिटल स्वास्थ्य दृष्टिकोण के अनुरूप, आरबीएसके 2.0 में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, रीयल-टाइम डेटा सिस्टम और ट्रैकिंग, निगरानी तथा सेवा वितरण के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म पेश किए गए हैं। इन डिजिटल नवाचारों से कार्यक्रम की दक्षता, जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सुधार होने की उम्मीद है।

बहु-क्षेत्रीय समन्वय और आगे की राह

दिशानिर्देश स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बहु-क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा देते हैं। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक प्लेटफॉर्म स्क्रीनिंग, जागरूकता और अनुवर्ती देखभाल के लिए प्रमुख संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करेंगे। आरबीएसके 2.0 से बाल स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार, बीमारियों का बोझ कम होने और देशभर के बच्चों के समग्र कल्याण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी। भारत में मोबाइल स्वास्थ्य टीमों की कमी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पहले से बढ़ा बोझ इस विस्तारित दायरे को लागू करने में बड़ी बाधा बन सकता है। डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड और रीयल-टाइम ट्रैकिंग की परिकल्पना तब तक अधूरी है जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित जनशक्ति सुनिश्चित न हो। मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग को शामिल करना ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित क्षेत्र में प्रवेश है, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञ रेफरल नेटवर्क की ज़रूरत होगी जो अभी पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीएसके 2.0 क्या है और यह पहले से कैसे अलग है?
आरबीएसके 2.0 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का संशोधित संस्करण है, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 मई 2026 को जारी किया। यह पहले के फोर डी दृष्टिकोण को बरकरार रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य, NCDs और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी नई प्राथमिकताओं को भी शामिल करता है।
आरबीएसके 2.0 में कौन-से बच्चे कवर होंगे?
यह कार्यक्रम जन्म से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को कवर करता है। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में मोबाइल स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से स्क्रीनिंग सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।
आरबीएसके 2.0 में मानसिक स्वास्थ्य को क्यों शामिल किया गया?
भारत में बाल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अब तक बेहद सीमित रही है और यह क्षेत्र नीतिगत रूप से उपेक्षित था। संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और व्यवहार संबंधी चिंताओं की शीघ्र पहचान बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड से बच्चों को क्या फायदा होगा?
डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड और रीयल-टाइम डेटा सिस्टम से प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य जानकारी एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे रेफरल ट्रैकिंग बेहतर होगी और उपचार बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम होने की उम्मीद है।
आरबीएसके 2.0 को लागू करने में कौन-से विभाग शामिल होंगे?
दिशानिर्देशों में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बहु-क्षेत्रीय समन्वय का प्रावधान है। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक प्लेटफॉर्म स्क्रीनिंग और अनुवर्ती देखभाल के प्रमुख केंद्र होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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