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तमिलनाडु की 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा को: अंबुमणि रामदास ने सुप्रीम कोर्ट आदेश को चुनौती देने की अपील की

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तमिलनाडु की 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा को: अंबुमणि रामदास ने सुप्रीम कोर्ट आदेश को चुनौती देने की अपील की

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा को सौंपने का आदेश दिया है। PMK अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास का कहना है कि इससे सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होगी और राज्य सरकार को बड़ी पीठ में अपील करनी चाहिए।

मुख्य बातें

अंबुमणि रामदास ने 1 जून 2026 को तमिलनाडु सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बड़ी पीठ में चुनौती देने की अपील की।
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित 151 रिक्त सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा को सौंपने का निर्देश दिया।
तमिलनाडु में सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की कुल 670 सीटें हैं, जिनमें से 215 सीटें सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित थीं।
पहले दौर की काउंसलिंग में 68 उम्मीदवारों ने सीट स्वीकार की; दूसरे दौर से पहले ही याचिका दायर होने से 151 सीटें विवाद में आईं।
रामदास का तर्क है कि पात्रता मानदंडों में छूट देने पर ये सभी सीटें राज्य के उम्मीदवारों से भरी जा सकती हैं।

पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने 1 जून 2026 को तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया कि वह सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश को बड़ी पीठ में चुनौती दे, जिसके तहत राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की 151 रिक्त सीटें अखिल भारतीय कोटा (ऑल इंडिया कोटा) को सौंपने का निर्देश दिया गया है। उनके अनुसार यह निर्णय तमिलनाडु की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों की कुल 670 सीटें हैं, जिनमें से 415 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध हैं। इनमें से 215 सीटें विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित हैं। इस कोटे के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले चिकित्सकों को एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होते हैं, जिसमें वे सेवा अवधि के दौरान सरकारी अस्पतालों में ही कार्य करने की प्रतिबद्धता जताते हैं।

काउंसलिंग प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

इन 215 आरक्षित सीटों के लिए काउंसलिंग अप्रैल में शुरू हुई थी। पहले चरण में नीट सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करने वाले 170 आवेदकों में से 100 उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए आमंत्रित किया गया। इनमें से 71 उम्मीदवारों को सीटें आवंटित की गईं और 68 उम्मीदवारों ने आवंटन स्वीकार किया। दूसरे दौर की काउंसलिंग अभी होनी थी, तभी सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई और अदालत ने शेष 151 रिक्त सीटों को ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने का आदेश दे दिया।

अंबुमणि का तर्क: सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर

डॉ. रामदास ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश डॉक्टर बेहतर वेतन और अवसरों के कारण निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। ऐसे में सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटें ही एकमात्र तंत्र है जो सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये सीटें राज्य के सरकारी डॉक्टरों को नहीं मिलती हैं, तो भविष्य में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की गंभीर कमी उत्पन्न हो सकती है।

रामदास की सरकार से अपील

डॉ. रामदास ने यह भी कहा कि रिक्त सीटों को भरने के लिए सामान्यतः क्वालिफाइंग अंकों में छूट दी जाती है और यदि तमिलनाडु में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाए तो सभी 151 सीटें योग्य उम्मीदवारों से भरी जा सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सीटें करदाताओं के धन से संचालित संस्थानों में निर्मित हैं और इनका लाभ तमिलनाडु के नागरिकों को ही मिलना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ में अपील दायर करे और सरकारी डॉक्टरों के हितों की रक्षा करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ऑल इंडिया कोटा की अवधारणा राष्ट्रीय समानता पर आधारित है। असली सवाल यह है कि क्या बॉन्ड-आधारित आरक्षण व्यवस्था वास्तव में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित कर पाती है, या यह महज एक कागजी प्रतिबद्धता बनकर रह जाती है। तमिलनाडु की स्वास्थ्य व्यवस्था देश में अग्रणी मानी जाती है, लेकिन यदि राज्य सरकार इस आदेश को चुनौती देने में विफल रहती है, तो यह नज़ीर अन्य राज्यों के लिए भी नीतिगत जोखिम बन सकती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा को क्यों दीं?
सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में मांग की गई थी कि सरकारी डॉक्टरों के कोटे में पहले दौर की काउंसलिंग के बाद खाली बची 151 सीटें ऑल इंडिया कोटा में शामिल की जाएं। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद इन सीटों को ऑल इंडिया कोटा को सौंपने का आदेश दिया।
अंबुमणि रामदास ने इस आदेश पर क्या आपत्ति जताई है?
PMK अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास का कहना है कि ये सीटें करदाताओं के पैसे से बनी हैं और इनका उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ में अपील दायर करने की मांग की है।
तमिलनाडु में सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सुपर स्पेशियलिटी सीटें कितनी हैं?
तमिलनाडु में सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों की कुल 670 सीटें हैं। इनमें से 415 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं और 215 सीटें विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित हैं।
क्या इन 151 सीटों को राज्य के उम्मीदवारों से भरा जा सकता था?
डॉ. रामदास के अनुसार, यदि पात्रता मानदंडों में सामान्य रूप से दी जाने वाली छूट लागू की जाती तो ये सभी 151 सीटें तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों से भरी जा सकती थीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार भी इस वर्ष यही प्रक्रिया अपनाएगी।
सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटों का बॉन्ड सिस्टम क्या है?
इस कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले डॉक्टरों को एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होते हैं, जिसमें वे अपनी सेवा अवधि के दौरान सरकारी अस्पतालों में ही कार्य करने की प्रतिबद्धता देते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य सुपर स्पेशियलिटी डिग्री के बाद डॉक्टरों को निजी क्षेत्र में जाने से रोकना और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं बनाए रखना है।
राष्ट्र प्रेस
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