तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें संकट में, उदयनिधि स्टालिन ने सीएम विजय से माँगा हस्तक्षेप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में स्थानांतरित होने के खतरे में हैं, जिसके बाद राज्य के विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर तत्काल कानूनी हस्तक्षेप की माँग की है। सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश के बाद यह मामला राजनीतिक और स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों में गंभीर बहस का विषय बन गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
नीट 2025 के तहत तमिलनाडु में कुल 430 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 215 सीटें राज्य की दीर्घकालिक नीति के अनुसार सरकारी सेवारत डॉक्टरों (इन-सर्विस डॉक्टर्स) के लिए आरक्षित थीं। नियमित काउंसलिंग प्रक्रिया में केवल 63 सीटों पर दाखिले हो सके और दूसरे चरण की काउंसलिंग पूरी होने के बाद 152 सीटें रिक्त रह गईं।
इन खाली सीटों को राष्ट्रीय पूल में शामिल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। 29 मई को न्यायालय ने इन सीटों को AIQ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
उदयनिधि स्टालिन के आरोप
उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया कि 8, 10 और 16 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान तत्कालीन द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा था और सीटों के हस्तांतरण को रोकने में सफलता मिली थी। उनके अनुसार सरकार बदलने के बाद कानूनी रणनीति कमज़ोर पड़ गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि 25 और 29 मई की सुनवाई में तमिलनाडु की ओर से पेश वकील कुछ महत्वपूर्ण कानूनी तर्क अदालत के सामने नहीं रख पाए — विशेषकर एन. कार्तिकेयन मामले से जुड़े पुराने फैसले की अप्रासंगिकता को, जिसका हवाला याचिकाकर्ता ने दिया था।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संभावित असर
स्टालिन ने चेतावनी दी कि इन सीटों के AIQ में जाने से सरकारी डॉक्टरों के लिए उच्च विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर सीमित हो जाएंगे। इसका दीर्घकालिक असर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर पड़ेगा।
प्रभावित विशेषज्ञताओं में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी और वैस्कुलर सर्जरी जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं — जिनकी माँग सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में सबसे अधिक है।
विपक्ष की माँगें
उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय से तीन ठोस कदम उठाने की अपील की है: राज्य की कानूनी स्थिति की तत्काल समीक्षा, सीटों को AIQ में जाने से रोकने के लिए प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व, और तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों के हितों की सुरक्षा।
आगे क्या होगा
यह मामला अब मुख्यमंत्री विजय की सरकार के लिए एक अहम परीक्षा बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में नई सरकार अभी अपनी प्रशासनिक पकड़ मज़बूत कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई में राज्य की कानूनी तैयारी ही तय करेगी कि ये 152 सीटें तमिलनाडु के पास रहती हैं या राष्ट्रीय पूल में चली जाती हैं।