21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें संकट में, उदयनिधि स्टालिन ने सीएम विजय से माँगा हस्तक्षेप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें संकट में, उदयनिधि स्टालिन ने सीएम विजय से माँगा हस्तक्षेप

सारांश

तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा में जाने के कगार पर हैं। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष कमज़ोर पड़ा — और इसकी कीमत सरकारी डॉक्टरों और आम मरीज़ों को चुकानी पड़ सकती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश में तमिलनाडु की 152 रिक्त सुपर स्पेशियलिटी सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया।
नीट 2025 के तहत कुल 430 सुपर स्पेशियलिटी सीटों में से 215 इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए आरक्षित थीं; काउंसलिंग के बाद 152 रिक्त रहीं।
विपक्ष नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय को पत्र लिखकर तत्काल कानूनी हस्तक्षेप की माँग की।
स्टालिन का आरोप — 25 और 29 मई की सुनवाई में राज्य के वकील एन.
कार्तिकेयन मामले की अप्रासंगिकता सहित प्रमुख तर्क नहीं रख पाए।
प्रभावित विशेषज्ञताओं में न्यूरोसर्जरी , कार्डियोथोरेसिक सर्जरी , पीडियाट्रिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी शामिल हैं।

तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में स्थानांतरित होने के खतरे में हैं, जिसके बाद राज्य के विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर तत्काल कानूनी हस्तक्षेप की माँग की है। सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश के बाद यह मामला राजनीतिक और स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों में गंभीर बहस का विषय बन गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

नीट 2025 के तहत तमिलनाडु में कुल 430 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 215 सीटें राज्य की दीर्घकालिक नीति के अनुसार सरकारी सेवारत डॉक्टरों (इन-सर्विस डॉक्टर्स) के लिए आरक्षित थीं। नियमित काउंसलिंग प्रक्रिया में केवल 63 सीटों पर दाखिले हो सके और दूसरे चरण की काउंसलिंग पूरी होने के बाद 152 सीटें रिक्त रह गईं।

इन खाली सीटों को राष्ट्रीय पूल में शामिल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। 29 मई को न्यायालय ने इन सीटों को AIQ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

उदयनिधि स्टालिन के आरोप

उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया कि 8, 10 और 16 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान तत्कालीन द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा था और सीटों के हस्तांतरण को रोकने में सफलता मिली थी। उनके अनुसार सरकार बदलने के बाद कानूनी रणनीति कमज़ोर पड़ गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि 25 और 29 मई की सुनवाई में तमिलनाडु की ओर से पेश वकील कुछ महत्वपूर्ण कानूनी तर्क अदालत के सामने नहीं रख पाए — विशेषकर एन. कार्तिकेयन मामले से जुड़े पुराने फैसले की अप्रासंगिकता को, जिसका हवाला याचिकाकर्ता ने दिया था।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संभावित असर

स्टालिन ने चेतावनी दी कि इन सीटों के AIQ में जाने से सरकारी डॉक्टरों के लिए उच्च विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर सीमित हो जाएंगे। इसका दीर्घकालिक असर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर पड़ेगा।

प्रभावित विशेषज्ञताओं में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी और वैस्कुलर सर्जरी जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं — जिनकी माँग सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में सबसे अधिक है।

विपक्ष की माँगें

उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय से तीन ठोस कदम उठाने की अपील की है: राज्य की कानूनी स्थिति की तत्काल समीक्षा, सीटों को AIQ में जाने से रोकने के लिए प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व, और तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों के हितों की सुरक्षा।

आगे क्या होगा

यह मामला अब मुख्यमंत्री विजय की सरकार के लिए एक अहम परीक्षा बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में नई सरकार अभी अपनी प्रशासनिक पकड़ मज़बूत कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई में राज्य की कानूनी तैयारी ही तय करेगी कि ये 152 सीटें तमिलनाडु के पास रहती हैं या राष्ट्रीय पूल में चली जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भरता राष्ट्रीय औसत से अधिक है, वहाँ सरकारी डॉक्टरों की विशेषज्ञता में कमी का सीधा असर ग्रामीण और वंचित आबादी पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट में 'एन. कार्तिकेयन मामले' का तर्क न रख पाना महज़ कानूनी चूक नहीं — यह संस्थागत स्मृति के खो जाने का संकेत है। नई सरकार को यह साबित करना होगा कि वह राज्य के स्वास्थ्य ढाँचे की रक्षा में उतनी ही सक्षम है जितना वह दावा करती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें AIQ में क्यों जा रही हैं?
नीट 2025 काउंसलिंग के दो चरणों के बाद तमिलनाडु में इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए आरक्षित 215 में से 152 सीटें रिक्त रह गईं। इन सीटों को ऑल इंडिया कोटा में शामिल करने की माँग वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को स्थानांतरण का निर्देश दिया।
उदयनिधि स्टालिन ने सीएम विजय से क्या माँग की है?
उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर राज्य की कानूनी स्थिति की तत्काल समीक्षा, सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व और सरकारी डॉक्टरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।
इन सीटों के AIQ में जाने से तमिलनाडु को क्या नुकसान होगा?
इन सीटों के स्थानांतरण से सरकारी सेवारत डॉक्टरों के लिए न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और पीडियाट्रिक सर्जरी जैसी उच्च विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर कम हो जाएंगे। दीर्घकालिक रूप से इसका असर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य की कानूनी कमज़ोरी का क्या आरोप है?
उदयनिधि स्टालिन का आरोप है कि 25 और 29 मई की सुनवाई में तमिलनाडु के वकील 'एन. कार्तिकेयन मामले' की अप्रासंगिकता सहित कई महत्वपूर्ण कानूनी तर्क अदालत के सामने नहीं रख पाए, जिससे राज्य का पक्ष कमज़ोर पड़ा।
इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए सीटों का आरक्षण क्यों ज़रूरी है?
तमिलनाडु की नीति के तहत सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी सीटें आरक्षित की जाती हैं ताकि वे उच्च विशेषज्ञता प्राप्त कर सरकारी अस्पतालों में सेवा दे सकें। यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले