12 अगस्त 2026
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परिसीमन पर तमिलनाडु में सियासी एकता: DMK ने TVK प्रस्ताव का समर्थन किया, उदयनिधि बोले — लोकसभा सीटें नहीं घटेंगी

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परिसीमन पर तमिलनाडु में सियासी एकता: DMK ने TVK प्रस्ताव का समर्थन किया, उदयनिधि बोले — लोकसभा सीटें नहीं घटेंगी

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा में सत्तारूढ़ TVK और विपक्षी DMK एक ही मंच पर आए — परिसीमन के खिलाफ। उदयनिधि स्टालिन ने साफ कहा: जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को लोकसभा सीटें घटाकर सजा नहीं दी जा सकती। यह तमिलनाडु की दक्षिणी एकजुटता की राजनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

उदयनिधि स्टालिन ने 12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में TVK सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को DMK की ओर से पूर्ण समर्थन दिया।
DMK की माँग — परिसीमन की संवैधानिक व्यवस्था को अगले 25 वर्षों के लिए बढ़ाया जाए।
फरवरी 2024 में DMK सरकार ने विधानसभा में परिसीमन-विरोधी प्रस्ताव पारित किया था; 5 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी।
उदयनिधि ने चेतावनी दी कि 2027 की जनगणना आधारित परिसीमन से तमिलनाडु की लोकसभा सीटें घट सकती हैं।
महिला आरक्षण ( 33% ) का समर्थन, लेकिन शर्त — परिसीमन 1971 की जनसंख्या के आधार पर हो।

तमिलनाडु विधानसभा में 12 अगस्त 2026 को परिसीमन के संवेदनशील मुद्दे पर दुर्लभ राजनीतिक एकजुटता देखने को मिली, जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की TVK सरकार द्वारा लाए गए परिसीमन प्रस्ताव को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की ओर से पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य के किसी भी परिसीमन में तमिलनाडु की लोकसभा सीटों की संख्या किसी भी स्थिति में कम नहीं होनी चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

विधानसभा में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा, 'DMK ने लगातार उस किसी भी परिसीमन प्रक्रिया का विरोध किया है जिससे राज्य को नुकसान हो सकता है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि DMK अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन उन पहले राष्ट्रीय नेताओं में थे जिन्होंने जनसंख्या-आधारित परिसीमन के संभावित दुष्परिणामों के प्रति देश को सचेत किया था।

उदयनिधि ने बताया कि फरवरी 2024 में स्टालिन के नेतृत्व में विधानसभा ने परिसीमन पर एक प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 5 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें TVK सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। स्टालिन ने सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख दलों के नेताओं को पत्र भी लिखे थे, और चेन्नई में विभिन्न राज्यों के नेताओं की संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक भी आयोजित की गई थी।

परिसीमन से तमिलनाडु को क्या खतरा

उदयनिधि स्टालिन ने आशंका जताई कि परिसीमन के संवैधानिक प्रावधानों को पुनः लागू किए जाने पर 2027 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर संसदीय सीटों का पुनर्वितरण हो सकता है। इससे उन दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर परिसीमन की बहस तेज़ हो रही है और दक्षिणी राज्य अपनी लोकसभा हिस्सेदारी को लेकर चिंतित हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु ने दशकों में जनसंख्या वृद्धि दर को काफी नियंत्रित किया है, जो जनसंख्या-आधारित परिसीमन में उसके लिए उलटा असर डाल सकता है।

DMK की प्रमुख माँगें

उदयनिधि स्टालिन ने माँग रखी कि परिसीमन से जुड़ी मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को अगले 25 वर्षों के लिए बढ़ाया जाए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को संसदीय प्रतिनिधित्व में कटौती के रूप में दंडित न किया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रति DMK की प्रतिबद्धता दोहराई। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा जाता है, तो यह प्रक्रिया 1971 की जनसंख्या के आँकड़ों के आधार पर होनी चाहिए — न कि नई जनगणना के आधार पर।

राजनीतिक एकता का संकेत

DMK का यह समर्थन विधानसभा में तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा करने और महिला आरक्षण को आगे बढ़ाने पर व्यापक राजनीतिक सहमति का संकेत देता है। सत्तारूढ़ TVK और विपक्षी DMK का एक ही मंच पर खड़ा होना तमिलनाडु की राजनीति में असाधारण माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को तमिलनाडु की सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति से अवगत कराने का प्रयास है। अब देखना होगा कि अन्य दक्षिणी राज्य इस मुद्दे पर किस हद तक एकजुट होते हैं और केंद्र की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकता केवल विधानसभा प्रस्तावों तक सीमित रहेगी या केंद्र पर ठोस दबाव बन पाएगी। दक्षिणी राज्यों की चिंता वैध है — जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता को यदि संसदीय प्रतिनिधित्व में कटौती से जोड़ा गया, तो यह नीतिगत विरोधाभास होगा। फिर भी, केंद्र सरकार ने अभी तक परिसीमन की समयसीमा या स्वरूप पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं ली है, जिससे यह बहस अनिश्चित काल तक खिंच सकती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन प्रस्ताव क्या है?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की TVK सरकार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव लाया है जिसमें माँग की गई है कि भविष्य के किसी भी परिसीमन में तमिलनाडु की लोकसभा सीटें कम न की जाएँ। DMK ने इस प्रस्ताव को पूर्ण समर्थन दिया है।
DMK ने परिसीमन प्रस्ताव का समर्थन क्यों किया?
DMK का मानना है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन उन राज्यों को दंडित करता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि DMK शुरू से ऐसी किसी भी प्रक्रिया का विरोध करती रही है जो तमिलनाडु के हितों के विरुद्ध हो।
परिसीमन से तमिलनाडु की लोकसभा सीटों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि 2027 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर परिसीमन होता है, तो अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं और तमिलनाडु जैसे राज्यों की हिस्सेदारी घट सकती है। उदयनिधि स्टालिन ने इसी आशंका को आधार बनाकर मौजूदा व्यवस्था को 25 वर्षों के लिए बढ़ाने की माँग की है।
DMK ने महिला आरक्षण पर क्या रुख अपनाया है?
DMK संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती है। हालाँकि उदयनिधि स्टालिन ने स्पष्ट किया कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा जाता है, तो परिसीमन 1971 की जनसंख्या के आँकड़ों के आधार पर होना चाहिए।
DMK ने परिसीमन मुद्दे पर पहले क्या कदम उठाए थे?
फरवरी 2024 में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में विधानसभा ने परिसीमन पर प्रस्ताव पारित किया था। 5 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई और स्टालिन ने सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे थे। चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक भी आयोजित हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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