3 अगस्त 2026
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परिसीमन विवाद: राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस एकजुट, भाजपा ने वंशवाद का लगाया आरोप

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परिसीमन विवाद: राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस एकजुट, भाजपा ने वंशवाद का लगाया आरोप

सारांश

राहुल गांधी का मामल्लापुरम में दिया परिसीमन-विरोधी बयान संसद तक पहुंच गया है — कांग्रेस के तीन सांसदों ने खुलकर विरोध का ऐलान किया, जबकि भाजपा ने इसे वंशवादी डर करार दिया। दक्षिण बनाम उत्तर की यह खाई परिसीमन को 2026 की सबसे बड़ी संवैधानिक लड़ाई बना सकती है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने मामल्लापुरम, चेन्नई में परिसीमन को तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए खतरा बताया।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा — तमिलनाडु के सभी 40 सांसदों ने पहले भी परिसीमन के खिलाफ वोट किया था।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सुखदेव भगत ने भी परिसीमन को दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय बताया।
भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा — सीटें 50 फीसदी बढ़ेंगी और हर राज्य को आनुपातिक हिस्सा मिलेगा।
JDU एमएलसी नीरज कुमार सिंह ने संतुलित रुख अपनाते हुए संविधान के दायरे में बहस की वकालत की।
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तर्क दिया — कुछ सीटों पर 50 लाख और कुछ पर 1 लाख आबादी का असंतुलन दूर करना ज़रूरी है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चेन्नई के मामल्लापुरम में दिए गए परिसीमन-विरोधी बयान के बाद 2 अगस्त को देशभर में तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हितों को कमज़ोर करेगी। कांग्रेस ने उनके रुख का पूरा समर्थन किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों ने कड़ा पलटवार किया।

राहुल गांधी का बयान और अपील

शनिवार को मामल्लापुरम, चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों — खासकर तमिलनाडु की पार्टियों — से परिसीमन के खिलाफ संसद में एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा परिसीमन के ज़रिए तमिलनाडु के राजनीतिक प्रभाव को घटाना चाहती है और यह प्रक्रिया राज्य के लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों से आह्वान किया कि वे संसद में उस कानून को मिलकर हराएं जो राज्य के प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंचाए।

कांग्रेस सांसदों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, 'परिसीमन को लेकर हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि अगला हफ्ता तमिलनाडु के इतिहास में अहम होगा। तमिलनाडु की आवाज़ कम नहीं होनी चाहिए। पहले भी तमिलनाडु के सभी 40 सांसदों ने इस परिसीमन के खिलाफ वोट किया था और मैं भी इसके खिलाफ वोट करूंगा।'

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि परिसीमन देश की एकता के लिए बड़ी चुनौती बनेगा और यह सभी दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय होगा। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने असम का उदाहरण देते हुए कहा, 'असम में जिस तरह से परिसीमन किया गया वह प्रतिनिधित्व के नजरिए से नहीं, बल्कि पूरी तरह वोट के नजरिए से किया गया।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्तमान 543 सदस्यीय संसद में ही कई सांसद पूरी भागीदारी नहीं कर पाते, तो सीटें बढ़ाने से क्या हासिल होगा।

भाजपा का पलटवार

भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन से सबसे ज़्यादा वंशवादी राजनीतिक पार्टियां प्रभावित होती हैं क्योंकि उन्हें डर है कि जब सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ेगी और गैर-वंशवादी पृष्ठभूमि से युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में राजनीति में आएंगी, तो उनकी पकड़ कमज़ोर हो जाएगी। सिन्हा ने स्पष्ट किया, 'दक्षिणी राज्यों सहित हर राज्य में सीटों की संख्या आनुपातिक आधार पर बढ़ेगी।'

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि सरकार कोई देशहित का काम न कर पाए। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तर्क दिया कि परिसीमन इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आज कुछ लोकसभा सीटों की आबादी 50 लाख है जबकि कुछ में महज 1 लाख। भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने राहुल गांधी के बयान को 'प्रोपेगेंडा' करार देते हुए कहा कि वे संविधान को ठीक से पढ़े बिना उसे लेकर घूमते हैं।

सहयोगी दलों की राय

जनता दल-यूनाइटेड (JDU) के एमएलसी नीरज कुमार सिंह ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर संविधान के दायरे में बहस होनी चाहिए और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे के तहत परिसीमन ज़रूरी है, लेकिन हर राजनीतिक पार्टी को इसमें अपनी भूमिका तय करनी होगी।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र चल रहा है और परिसीमन से जुड़े विधेयक पर बहस की संभावना बनी हुई है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के सभी 40 सांसद पहले भी इस प्रक्रिया के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं, जो दक्षिण भारत में इस मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस पर टकराव और तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब उन्हें आशंका है कि इसी की सज़ा उन्हें कम प्रतिनिधित्व के रूप में मिलेगी — यह अंतर्विरोध मुख्यधारा की बहस में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। भाजपा का 'आनुपातिक वृद्धि' का तर्क तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह इस तथ्य को नहीं छुपा सकता कि उत्तर भारतीय राज्यों को अनुपातहीन रूप से अधिक सीटें मिलेंगी। राहुल गांधी का दक्षिण-केंद्रित रुख कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति भी है और संवैधानिक सवाल भी — दोनों को अलग करके देखना ज़रूरी है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन विवाद क्या है और राहुल गांधी ने क्या कहा?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या और सीमाएं पुनर्निर्धारित की जाती हैं। राहुल गांधी ने मामल्लापुरम में कहा कि प्रस्तावित परिसीमन तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमज़ोर करेगा और सभी दलों को इसके खिलाफ संसद में एकजुट होना चाहिए।
दक्षिण भारतीय राज्यों को परिसीमन से क्या आपत्ति है?
दक्षिणी राज्यों की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया, इसलिए उनकी आबादी कम बढ़ी। जनसंख्या-आधारित परिसीमन में उन्हें कम सीटें मिलेंगी जबकि अधिक आबादी वाले उत्तर भारतीय राज्यों को अधिक — यही असंतुलन उनकी चिंता का केंद्र है।
भाजपा ने परिसीमन के बारे में क्या स्पष्टीकरण दिया?
भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि दक्षिणी राज्यों सहित हर राज्य में सीटों की संख्या आनुपातिक आधार पर बढ़ेगी। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तर्क दिया कि कुछ सीटों पर 50 लाख और कुछ पर महज 1 लाख आबादी का असंतुलन दूर करने के लिए परिसीमन ज़रूरी है।
कांग्रेस के किन सांसदों ने परिसीमन का विरोध किया?
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर, इमरान मसूद और सुखदेव भगत ने खुलकर परिसीमन का विरोध किया। टैगोर ने कहा कि तमिलनाडु के सभी 40 सांसद पहले भी इसके खिलाफ वोट कर चुके हैं और वे भी इसके खिलाफ वोट करेंगे।
JDU का परिसीमन पर क्या रुख है?
जनता दल-यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार सिंह ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन संवैधानिक ढांचे के तहत ज़रूरी है, लेकिन इस पर बहस राजनीतिक रंग से मुक्त होकर संविधान के दायरे में होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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