21 अगस्त 2026
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परिसीमन बिल पर थलपति विजय के रुख में कोई बदलाव नहीं — कांग्रेस का स्पष्ट बयान

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परिसीमन बिल पर थलपति विजय के रुख में कोई बदलाव नहीं — कांग्रेस का स्पष्ट बयान

सारांश

अमित शाह से मुलाकात के बाद थलपति विजय के 'नरम पड़ने' की अटकलों पर कांग्रेस ने पानी फेर दिया — कहा, रुख वही है। जेडीयू ने बैठक को सकारात्मक बताया। परिसीमन और महिला आरक्षण की उलझी गाँठ अभी सुलझी नहीं।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने 21 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में कहा कि थलपति विजय के परिसीमन बिल पर रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
विजय की पार्टी का कोई सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं है; उनकी माँग है कि किसी भी राज्य की सीटें कम न हों।
कांग्रेस ने दोहराया कि सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल ( 33% आरक्षण) को 2024 में ही लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन से जोड़ दिया।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने पटना से कहा कि विजय का रुख नरम पड़ा है और केंद्र तमिलनाडु के हितों की रक्षा करेगा।
परिसीमन विवाद दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन वाले राज्यों की सीटें घटने की आशंका है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की मुलाकात के बाद परिसीमन बिल पर उनके रुख में बदलाव की अटकलें तेज़ हो गई थीं। लेकिन 21 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में कांग्रेस ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विजय की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

कांग्रेस का स्पष्टीकरण

कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने भुवनेश्वर में कहा, 'मुझे लगता है कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। वजह यह है कि उनकी पार्टी का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं है। किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। सीटें कम न करने की बात कहकर वे वही माँग कर रहे हैं जो उन्होंने पहले की थी।'

सलूजा ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष परिसीमन का विरोध नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन बिल पारित कराने की कोशिश का विरोध किया था। सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था, जिसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 2024 में ही लागू करने की माँग कर रहे थे। सलूजा के अनुसार, सरकार ने इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया, जिससे इसका क्रियान्वयन अनिश्चितकाल के लिए टल गया।

जेडीयू की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, जनता दल (यूनाइटेड) ने विजय और अमित शाह की मुलाकात को सकारात्मक संकेत बताया। पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'तमिलनाडु के हितों से समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन को लेकर चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। जो भी फ़ैसला लिया जाएगा, उसमें सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।'

रंजन ने आगे कहा कि तमिलनाडु की कई पार्टियाँ अब केंद्र के रुख को समझने लगी हैं और मुख्यमंत्री विजय का तेवर भी नरम पड़ा है, जो दर्शाता है कि वे केंद्र की कोशिशों पर भरोसा करते हैं।

परिसीमन विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। आशंका यह है कि जनसंख्या-आधारित पुनर्सीमांकन से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें घट सकती हैं, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

विजय और अमित शाह की बैठक के बाद राजनीतिक समीकरण स्पष्ट नहीं हुए हैं। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन का रुख अभी भी महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की माँग पर टिका है। जेडीयू की सकारात्मक प्रतिक्रिया और कांग्रेस के खंडन के बीच, थलपति विजय की आगामी सार्वजनिक स्थिति पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने विपक्ष को 'महिला-विरोधी' दिखने के जोखिम में डाला। विजय जैसे नए क्षेत्रीय नेता के लिए दिल्ली से दूरी बनाए रखना और केंद्र से संवाद भी करना — दोनों एक साथ साधना राजनीतिक अनिवार्यता है। असली परीक्षा तब होगी जब परिसीमन आयोग का मसौदा सामने आएगा और सीटों का गणित स्पष्ट होगा।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थलपति विजय का परिसीमन बिल पर क्या रुख है?
कांग्रेस के अनुसार, थलपति विजय का रुख अपरिवर्तित है — वे किसी भी राज्य की लोकसभा सीटें कम करने के विरोध में हैं। अमित शाह से मुलाकात के बाद रुख बदलने की अटकलें थीं, लेकिन कांग्रेस ने इसे खारिज किया।
परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल का क्या संबंध है?
महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में पारित हुआ था, जो संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है। सरकार ने इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ दिया, जिससे इसका क्रियान्वयन टल गया — यही विपक्ष की आपत्ति का मुख्य बिंदु है।
दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से क्या चिंता है?
आशंका यह है कि जनसंख्या-आधारित पुनर्सीमांकन में तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें घट सकती हैं, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने का डर है।
जेडीयू ने विजय-शाह मुलाकात पर क्या कहा?
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया है कि परिसीमन में सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा और तमिलनाडु को उसका उचित हिस्सा मिलेगा।
परिसीमन प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
2026 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। अभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बनी है और थलपति विजय की आगामी आधिकारिक स्थिति इस प्रक्रिया की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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