परिसीमन बिल पर थलपति विजय के रुख में कोई बदलाव नहीं — कांग्रेस का स्पष्ट बयान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की मुलाकात के बाद परिसीमन बिल पर उनके रुख में बदलाव की अटकलें तेज़ हो गई थीं। लेकिन 21 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में कांग्रेस ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विजय की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
कांग्रेस का स्पष्टीकरण
कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने भुवनेश्वर में कहा, 'मुझे लगता है कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। वजह यह है कि उनकी पार्टी का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं है। किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। सीटें कम न करने की बात कहकर वे वही माँग कर रहे हैं जो उन्होंने पहले की थी।'
सलूजा ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष परिसीमन का विरोध नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन बिल पारित कराने की कोशिश का विरोध किया था। सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था, जिसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 2024 में ही लागू करने की माँग कर रहे थे। सलूजा के अनुसार, सरकार ने इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया, जिससे इसका क्रियान्वयन अनिश्चितकाल के लिए टल गया।
जेडीयू की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, जनता दल (यूनाइटेड) ने विजय और अमित शाह की मुलाकात को सकारात्मक संकेत बताया। पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'तमिलनाडु के हितों से समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन को लेकर चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। जो भी फ़ैसला लिया जाएगा, उसमें सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।'
रंजन ने आगे कहा कि तमिलनाडु की कई पार्टियाँ अब केंद्र के रुख को समझने लगी हैं और मुख्यमंत्री विजय का तेवर भी नरम पड़ा है, जो दर्शाता है कि वे केंद्र की कोशिशों पर भरोसा करते हैं।
परिसीमन विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। आशंका यह है कि जनसंख्या-आधारित पुनर्सीमांकन से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें घट सकती हैं, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
विजय और अमित शाह की बैठक के बाद राजनीतिक समीकरण स्पष्ट नहीं हुए हैं। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन का रुख अभी भी महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की माँग पर टिका है। जेडीयू की सकारात्मक प्रतिक्रिया और कांग्रेस के खंडन के बीच, थलपति विजय की आगामी सार्वजनिक स्थिति पर सबकी नज़रें टिकी हैं।