9 अगस्त 2026
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परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार की अपील, DMK पर BJP से गुप्त समझौते का आरोप

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परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार की अपील, DMK पर BJP से गुप्त समझौते का आरोप

सारांश

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने परिसीमन को राज्य के राजनीतिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया और DMK पर BJP से गुप्त समझौते का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वॉकआउट, विरोध नहीं — धोखा है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने 9 अगस्त 2026 को मदुरै में केंद्र की परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया।
उनके अनुसार जनसंख्या-आधारित सीट-बँटवारे से तमिलनाडु की संसदीय सीटें घट सकती हैं और राज्य की राजनीतिक आवाज़ कमज़ोर पड़ेगी।
निर्मल कुमार ने DMK पर BJP से अप्रत्यक्ष समझौते का आरोप लगाया और कहा कि DMK के सदस्य संसद में वॉकआउट कर सकते हैं।
उन्होंने वॉकआउट को परिसीमन प्रस्ताव का 'अप्रत्यक्ष समर्थन' और तमिलनाडु के साथ 'गंभीर धोखा' करार दिया।
मंत्री ने राज्य की सभी पार्टियों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर परिसीमन के विरुद्ध सर्वदलीय मोर्चा बनाने की अपील की।

तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने 9 अगस्त 2026 को मदुरै में केंद्र सरकार की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध करते हुए राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सीटों का बँटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो तमिलनाडु की संसदीय सीटें घट सकती हैं और राज्य की राजनीतिक आवाज़ कमज़ोर पड़ जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अप्रत्यक्ष समझौता कर लिया है।

मुख्य घटनाक्रम

निर्मल कुमार मदुरै को कचरा-मुक्त शहर बनाने की पहल के अंतर्गत आयोजित एक मैराथन में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अभी इस प्रक्रिया को केवल राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है, और यह तमिलनाडु जैसे उन राज्यों के साथ अन्याय है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

परिसीमन से तमिलनाडु को क्या खतरा

मंत्री के अनुसार, जनसंख्या-आधारित सीट-बँटवारे में तमिलनाडु को संसद में कम सीटें मिल सकती हैं, जिससे राज्य के कुछ वर्ग हाशिए पर चले जाएँगे। उन्होंने तर्क दिया कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे, उन्हें पुरस्कृत करने के बजाय दंडित किया जा रहा है — यह संघीय ढाँचे की भावना के विरुद्ध है।

DMK पर गंभीर आरोप

निर्मल कुमार ने DMK पर सीधा निशाना साधते हुए दावा किया कि ऐसी खबरें हैं कि जब परिसीमन का मुद्दा संसद में आएगा, तो DMK के सदस्य प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान करने के बजाय सदन से वॉकआउट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वॉकआउट प्रत्यक्ष विरोध नहीं है — यह अप्रत्यक्ष समर्थन के समान है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि DMK पहले खुद को परिसीमन की सबसे बड़ी विरोधी बताती थी, और यदि वह सच में विरोध में है तो उसे संसद में रहकर वोट करना चाहिए।

सर्वदलीय एकता की अपील

मंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के अधिकारों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आह्वान किया कि तमिलनाडु के हितों के विरुद्ध किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाया जाए। उनके अनुसार, किसी भी वॉकआउट को वे तमिलनाडु और उन तमाम राज्यों के साथ गंभीर धोखा मानते हैं जिन्हें जनसंख्या-आधारित बँटवारे से नुकसान हो सकता है।

आगे क्या

परिसीमन का मुद्दा अभी संसद में लंबित है और दक्षिणी राज्यों में इसके विरोध की आवाज़ें तेज़ होती जा रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि DMK और अन्य विपक्षी दल संसद में इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सही साबित हुए, तो यह INDIA गठबंधन की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े करेंगे। असली मुद्दा यह है कि जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी रहे राज्यों को क्या सीटों में कटौती की 'सज़ा' मिलनी चाहिए — यह संवैधानिक बहस अभी तक किसी सर्वमान्य हल तक नहीं पहुँची है, और इसीलिए यह राजनीतिक आग और भड़कने की आशंका है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन से तमिलनाडु को क्या नुकसान हो सकता है?
यदि संसदीय सीटों का बँटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो तमिलनाडु जैसे राज्यों की — जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है — संसद में सीटें घट सकती हैं। इससे राज्य की राजनीतिक प्रतिनिधित्व-शक्ति कमज़ोर होगी और कुछ वर्ग हाशिए पर जा सकते हैं।
निर्मल कुमार ने DMK पर क्या आरोप लगाए?
तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि DMK ने परिसीमन मुद्दे पर BJP से अप्रत्यक्ष समझौता कर लिया है। उनके अनुसार खबरें हैं कि जब यह प्रस्ताव संसद में आएगा, तो DMK सदस्य विरोध में मतदान करने के बजाय वॉकआउट कर सकते हैं, जिसे उन्होंने प्रस्ताव का अप्रत्यक्ष समर्थन बताया।
निर्मल कुमार ने सर्वदलीय एकता की अपील क्यों की?
उनका कहना है कि परिसीमन का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे तमिलनाडु के राजनीतिक अधिकारों का है। इसलिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को एकजुट होकर इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहिए।
वॉकआउट को निर्मल कुमार ने धोखा क्यों कहा?
निर्मल कुमार के अनुसार, संसद से वॉकआउट करने का अर्थ है कि पार्टी प्रस्ताव के विरुद्ध अपना वोट नहीं डालती, जिससे प्रस्ताव पारित होना आसान हो जाता है। उन्होंने इसे तमिलनाडु और उन सभी राज्यों के साथ गंभीर धोखा बताया जिन्हें जनसंख्या-आधारित परिसीमन से नुकसान हो सकता है।
परिसीमन का मुद्दा अभी किस स्थिति में है?
परिसीमन प्रक्रिया अभी केंद्र सरकार के प्रस्ताव के रूप में लंबित है और संसद में इस पर अभी मतदान नहीं हुआ है। दक्षिणी राज्यों में इसके विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं और विभिन्न दलों का रुख अभी तय होना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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