1 अगस्त 2026
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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार बोले — सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र रास्ता

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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार बोले — सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र रास्ता

सारांश

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने साफ़ कहा — कर्नाटक में चाहे BJP हो या कांग्रेस, पानी देने की नीयत नहीं। केंद्र पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को एकमात्र समाधान बताया। दशकों पुराना कावेरी विवाद एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर गरमाया।

मुख्य बातें

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने 1 अगस्त 2026 को तिरुनेलवेली में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही कावेरी जल पाने का एकमात्र रास्ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में BJP और कांग्रेस दोनों सरकारों ने तमिलनाडु को पानी देने से परहेज़ किया।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पर आरोप — कर्नाटक के बांध प्रस्ताव का समर्थन कर तमिलनाडु के हितों के विरुद्ध काम किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल, मंत्री ने कहा — राजनीतिक हस्तक्षेप से विवाद हल नहीं होगा।
जोसेफ विजय द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाने पर निर्णय अपेक्षित।

तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने 1 अगस्त 2026 को तिरुनेलवेली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि कर्नाटक से कावेरी जल में उचित हिस्सा पाने के लिए राज्य के पास सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ रही तमाम सरकारों ने तमिलनाडु को उसका जायज़ हिस्सा देने में लगातार अनिच्छा दिखाई है।

मुख्य घटनाक्रम

निर्मल कुमार ने कहा, 'चाहे कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार हो या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की, उनका मकसद एक ही लगता है — तमिलनाडु को पानी न देना। इसलिए, कर्नाटक से पानी पाने के लिए हमारे पास सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र समाधान है।' उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तत्पर है।

केंद्र सरकार पर आरोप

मंत्री ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की चिंताओं को समझने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक के बांध निर्माण प्रस्ताव का समर्थन किया, जो तमिलनाडु के हितों के विरुद्ध है। निर्मल कुमार के अनुसार, अंतरराज्यीय नदी जल विवादों में राज्यों की भूमिका सीमित होती है और जल बंटवारे के फ़ैसलों को लागू करवाने में केंद्र सरकार की भूमिका निर्णायक होती है।

राहुल गांधी के हस्तक्षेप पर सवाल

पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मौजूदा कावेरी विवाद पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी क्यों साध रखी है और क्या उनके हस्तक्षेप से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। निर्मल कुमार ने कहा कि इस विवाद को केवल राजनीतिक हस्तक्षेप से नहीं सुलझाया जा सकता, क्योंकि जल बंटवारे की कानूनी ज़िम्मेदारियाँ पहले से तय हैं और सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से राहत पाना ही सही मार्ग है।

सर्वदलीय बैठक पर स्थिति

जब मंत्री से पूछा गया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी की स्थिति पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक कब बुलाएंगे, तो निर्मल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री इस विषय पर उचित समय पर सही निर्णय लेंगे। यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता के बीच जल संकट की आशंका बढ़ रही है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और सर्वोच्च न्यायालय इसमें पहले भी हस्तक्षेप कर चुका है। आलोचकों का कहना है कि केंद्र सरकार की निष्क्रियता और राजनीतिक दलों की दोहरी नीति ने इस संकट को और जटिल बना दिया है। तमिलनाडु सरकार के अगले कानूनी कदम पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ज़मीनी स्थिति नहीं बदली। असली सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पहले भी आ चुके हैं, तो उनके क्रियान्वयन में केंद्र सरकार की भूमिका इतनी कमज़ोर क्यों रही। राहुल गांधी की चुप्पी पर उठाया गया सवाल राजनीतिक रूप से तीखा है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि DMK खुद कांग्रेस की सहयोगी है — यह अंतर्विरोध मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु सुप्रीम कोर्ट क्यों जाना चाहता है?
तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार के अनुसार, कर्नाटक की किसी भी सरकार ने तमिलनाडु को उसका उचित जल हिस्सा देने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। अंतरराज्यीय नदी जल विवादों में राज्यों की सीधी भूमिका सीमित होती है, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से राहत पाना ही व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
निर्मल कुमार ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
निर्मल कुमार ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पर आरोप लगाया कि वे तमिलनाडु की चिंताओं को समझने में विफल रहे हैं और कर्नाटक के बांध निर्माण प्रस्ताव का समर्थन कर तमिलनाडु के हितों के विरुद्ध काम किया। उनके अनुसार जल बंटवारे के फ़ैसले लागू करवाने में केंद्र की भूमिका निर्णायक होती है।
राहुल गांधी की चुप्पी पर क्या सवाल उठे?
पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि राहुल गांधी ने कावेरी विवाद पर सार्वजनिक रूप से कुछ क्यों नहीं कहा और क्या उनका हस्तक्षेप कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को पानी छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकता था। निर्मल कुमार ने कहा कि यह विवाद राजनीतिक हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया से ही सुलझेगा।
तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक कब होगी?
निर्मल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के बारे में उचित समय पर निर्णय लेंगे। अभी तक बैठक की कोई तारीख घोषित नहीं हुई है।
कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराना विवाद है। सर्वोच्च न्यायालय पहले भी इसमें हस्तक्षेप कर चुका है और जल आवंटन के आदेश दे चुका है, लेकिन क्रियान्वयन को लेकर विवाद जारी रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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