कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को CWMA के पास शिकायत ले जाने का निर्देश दिया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 24 अगस्त को कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद पर सुनवाई करते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि वह अपनी शिकायत कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक द्वारा कथित तौर पर निर्धारित अनुपात में पानी न छोड़े जाने की समस्या का समाधान पहले इस नियामक निकाय के माध्यम से होना चाहिए।
सुनवाई में क्या हुआ
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें कर्नाटक को तत्काल निर्धारित जल-हिस्सा छोड़ने का आदेश देने की माँग की गई थी। तमिलनाडु की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि राज्य को कावेरी का अनुपातिक जल नहीं मिल रहा, जबकि यह उसका अधिकार है।
पीठ ने इस पर याद दिलाया कि पूर्व में भी न्यायालय यह पा चुका है कि तमिलनाडु को कर्नाटक से उसके निर्धारित हिस्से से अधिक पानी प्राप्त हो चुका है। पीठ ने कहा, 'आपको CWMA के निर्देश के अनुसार पानी मिल चुका है।' इस पर तमिलनाडु के वकील ने पलटकर दलील दी कि CWMA ने राज्य की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप अनुपातिक मात्रा जारी करने का निर्देश नहीं दिया है।
अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु को इस मुद्दे पर CWMA से संपर्क करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कावेरी जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यह विवाद दशकों पुराना है। कई दौर की असफल वार्ता के बाद मामला न्यायालय तक पहुँचा, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) के गठन का निर्देश दिया था। ट्रिब्यूनल ने 2007 में अपना फैसला सुनाया, जिसमें तमिलनाडु को प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा में पानी लेने की अनुमति दी गई। दोनों राज्यों ने समीक्षा याचिकाएँ दायर कीं, जिससे विवाद जारी रहा।
2016 में तमिलनाडु फिर सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा, क्योंकि कर्नाटक ने कहा था कि उसके जलाशयों में साझा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कावेरी प्रबंधन बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।
2023 में न्यायालय ने तमिलनाडु की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य के दैनिक जल-हिस्से को 5,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 7,200 क्यूसेक (क्यूबिक फीट प्रति सेकंड) करने की माँग की गई थी।
पेन्नैयार नदी का लंबित विवाद
यह ऐसे समय में आया है जब इन दोनों राज्यों के बीच एक और जल विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है — इस बार पेन्नैयार नदी को लेकर। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार के विरुद्ध एक मूल वाद दायर किया हुआ है। गौरतलब है कि यह दो पड़ोसी राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल संसाधन प्रबंधन की जटिलता को रेखांकित करता है।
आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, तमिलनाडु को अब अपनी शिकायत औपचारिक रूप से CWMA के समक्ष रखनी होगी। 31 अगस्त की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि प्राधिकरण ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है। दोनों राज्यों के किसान समुदाय इस फैसले पर करीब से नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि खरीफ फसल के मौसम में पानी की उपलब्धता सीधे उनकी आजीविका से जुड़ी है।