तमिलनाडु की 152 सुपर स्पेशियलिटी सीटें AIQ में जाने का खतरा, उदयनिधि स्टालिन ने CM विजय से तत्काल हस्तक्षेप माँगा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में 152 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में स्थानांतरित होने के खतरे के बीच विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने 4 जून 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर तत्काल कानूनी हस्तक्षेप की माँग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये सीटें राष्ट्रीय पूल में चली गईं, तो राज्य के सरकारी डॉक्टरों की उच्च विशेषज्ञता हासिल करने की संभावनाएँ गंभीर रूप से सीमित हो जाएँगी।
मामले की पृष्ठभूमि
नीट 2025 के तहत तमिलनाडु में कुल 430 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 215 सीटें राज्य की दीर्घकालिक नीति के अनुसार इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों के लिए आरक्षित थीं। नियमित काउंसलिंग प्रक्रिया में केवल 63 सीटों पर दाखिले हो सके और दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 152 सीटें रिक्त रह गईं।
इन खाली सीटों को AIQ में शामिल करने की माँग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने इन सीटों को राष्ट्रीय पूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
कानूनी पक्ष पर उठे सवाल
उदयनिधि स्टालिन का आरोप है कि 8, 10 और 16 अप्रैल की सुनवाई के दौरान तत्कालीन सरकार ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा था और सीटों के हस्तांतरण को रोकने में सफलता मिली थी। उनके अनुसार सरकार बदलने के बाद 25 और 29 मई की सुनवाई में तमिलनाडु की ओर से पेश वकील कुछ महत्वपूर्ण कानूनी तर्क अदालत के सामने नहीं रख सके।
विशेष रूप से, एन. कार्तिकेयन मामले से जुड़े पुराने फैसले की अप्रासंगिकता — जिसका हवाला याचिकाकर्ता ने दिया था — अदालत के सामने स्पष्ट नहीं की गई। स्टालिन का कहना है कि यह चूक निर्णायक साबित हुई।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संभावित असर
उदयनिधि स्टालिन ने रेखांकित किया कि प्रभावित सीटों में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी और वैस्कुलर सर्जरी जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएँ शामिल हैं। यदि ये सीटें AIQ में चली गईं, तो भविष्य में सरकारी अस्पतालों में इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हो सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था इन-सर्विस डॉक्टरों की विशेषज्ञता पर काफी हद तक निर्भर है। गौरतलब है कि इन-सर्विस कोटे का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टर उच्च प्रशिक्षण के बाद राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में वापस लौटें।
विपक्ष की माँगें
उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय से तीन ठोस कदम उठाने की अपील की है — राज्य की कानूनी स्थिति की तत्काल समीक्षा, सर्वोच्च न्यायालय में मजबूत पुनर्विचार याचिका दायर करना, और तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य से जुड़ा है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश के बाद राज्य सरकार के पास कानूनी विकल्प सीमित हैं, लेकिन पुनर्विचार याचिका या नई अपील की संभावना बनी हुई है। यह मामला राज्य बनाम केंद्र के मेडिकल सीट आवंटन विवाद की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।