25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु विधानसभा में छह खाली सीटों पर घमासान, पलानीस्वामी का माइक बंद होने पर बढ़ा तनाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु विधानसभा में छह खाली सीटों पर घमासान, पलानीस्वामी का माइक बंद होने पर बढ़ा तनाव

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा में छह खाली सीटों का सवाल सिर्फ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी बन गया — DMK, AIADMK और TVK के बीच आरोप-प्रत्यारोप, पलानीस्वामी का माइक बंद, और स्पीकर की दखल। सरकार ने उपचुनाव की इच्छा जताई, पर तारीख अभी तय नहीं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा में 25 अगस्त को छह रिक्त निर्वाचन क्षेत्रों में जनप्रतिनिधित्व के अभाव पर तीखी बहस हुई।
सेंगोट्टैयन ने कहा कि सरकार ने सभी छह सीटों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं और जल्द उपचुनाव कराने की इच्छा है।
पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के.
पलानीस्वामी का माइक्रोफोन बंद किए जाने के बाद सदन में तनाव बढ़ा।
प्रभाकर ने लंबित कानूनी कार्यवाही से जुड़ी टिप्पणियाँ रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।
सेंगोट्टैयन द्वारा हॉर्स-ट्रेडिंग का संदर्भ देने पर पलानीस्वामी ने आरोप खारिज किया; TVK उम्मीदवार के नामांकन-रद्दीकरण पर नई बहस छिड़ी।

तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार, 25 अगस्त को छह रिक्त निर्वाचन क्षेत्रों में जनप्रतिनिधित्व के अभाव को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। विधायकों के इस्तीफे के बाद से खाली पड़ी इन सीटों के मतदाताओं की शिकायतें सुनने का ज़िम्मा किस पर है — यह सवाल सदन में गर्म बहस का केंद्र बन गया।

बहस की शुरुआत कैसे हुई

यह विवाद प्राकृतिक संसाधनों, उद्योगों, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभागों के लिए अनुदान माँगों पर चर्चा के दौरान उभरा। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक ऑस्टिन ने सवाल उठाया कि जब इन छह क्षेत्रों में कोई निर्वाचित विधायक ही नहीं है, तो वहाँ के निवासी अपनी समस्याएँ लेकर किसके पास जाएँ।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही उपचुनावों की तारीखों को लेकर अनिश्चितता में है और विपक्ष सरकार पर जनता की अनदेखी का आरोप लगाता रहा है।

सरकार का पक्ष

मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने कहा कि सरकार ने सभी छह रिक्त निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से कदम उठाए हैं कि जनता की शिकायतें सुनी जाएँ और स्थानीय ज़रूरतें पूरी हों।

सेंगोट्टैयन ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इन सीटों पर जल्द से जल्द चुनाव कराने की इच्छुक है। उनके शब्दों में, 'चुनाव कराने का कोई विकल्प नहीं है और हम यह सुनिश्चित करने में रुचि रखते हैं कि वे जल्द से जल्द हों।'

विपक्ष की आपत्तियाँ

विधायक ऑस्टिन ने सरकार के जवाब से संतुष्टि नहीं जताई और तर्क दिया कि अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्री निर्वाचन क्षेत्र-स्तर की बारीकियों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। पूर्व मुख्यमंत्री एवं अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे विभागों का बोझ उठाने वाले मंत्रियों से हर स्थानीय चिंता को समझने की उम्मीद नहीं की जा सकती — विधायक का होना इसीलिए अनिवार्य है।

माइक बंद और बढ़ा तनाव

सेंगोट्टैयन की टिप्पणी पर पलानीस्वामी और अन्य AIADMK सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन में माहौल गरमा गया। स्पीकर जेसी डी. प्रभाकर ने कहा कि लंबित कानूनी कार्यवाही से जुड़ी कुछ टिप्पणियाँ विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाई जाएँगी।

पलानीस्वामी का माइक्रोफोन बंद किए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। जब सेंगोट्टैयन ने कथित हॉर्स-ट्रेडिंग (राजनीतिक खरीद-फरोख्त) का संदर्भ दिया, तो स्पीकर ने उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचने की सलाह दी।

मंत्री ने इसके बाद पूछा कि क्या एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र से तमिझगा वेट्री कषगम (TVK) उम्मीदवार का नाम वापस लेना खरीद-फरोख्त के समान नहीं था। पलानीस्वामी ने इस आरोप को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया था — उसका नामांकन रद्द किया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित व्यक्ति ने एक पार्टी छोड़कर TVK क्यों ज्वाइन की।

जब पलानीस्वामी ऊँची आवाज़ में बोलते रहे, तो स्पीकर अपनी कुर्सी से उठे और पूछा कि क्या सदन को कोई जनसभा समझा जा रहा है। पलानीस्वामी ने कहा कि यदि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया, तो उनके पास खड़े रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। स्पीकर ने उन्हें शांत रहने और शारीरिक तनाव न लेने की सलाह दी। अंततः विरोध-प्रदर्शन के बीच सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि इन छह सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। सरकार ने प्रभारी मंत्रियों के ज़रिए अंतरिम व्यवस्था का भरोसा दिलाया है, लेकिन विपक्ष का दबाव बना हुआ है कि जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक इन क्षेत्रों के लाखों मतदाता वास्तविक जनप्रतिनिधित्व से वंचित रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक ज़्यादा थी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक गई वह यह है कि इन छह सीटों के लाखों मतदाता कब तक बिना विधायक के रहेंगे — इसका कोई ठोस जवाब किसी पक्ष के पास नहीं था।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु विधानसभा की छह सीटें रिक्त क्यों हैं?
इन छह निर्वाचन क्षेत्रों के विधायकों के इस्तीफे के बाद ये सीटें खाली हो गई हैं। इस्तीफों के कारण इन क्षेत्रों में अभी कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं है।
रिक्त सीटों के निवासियों की शिकायतें कौन सुन रहा है?
मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन के अनुसार, सरकार ने सभी छह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि जनता की शिकायतें सुनी जाएँ।
विपक्ष को सरकार की व्यवस्था पर क्या आपत्ति है?
DMK विधायक ऑस्टिन और AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी का कहना है कि अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्री निर्वाचन क्षेत्र-स्तर की बारीकियों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। उनके अनुसार, समर्पित जनप्रतिनिधित्व का कोई विकल्प नहीं है।
पलानीस्वामी का माइक बंद क्यों किया गया और इससे क्या हुआ?
सदन में तनाव के बीच पलानीस्वामी का माइक्रोफोन बंद कर दिया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया। इसके बाद स्पीकर जेसी डी. प्रभाकर को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने पलानीस्वामी को शांत रहने की सलाह दी।
इन छह सीटों पर उपचुनाव कब होंगे?
सरकार ने जल्द से जल्द उपचुनाव कराने की इच्छा जताई है, लेकिन अभी तक कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। मंत्री सेंगोट्टैयन ने कहा कि चुनाव कराना अनिवार्य है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले