20 जुलाई 2026
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PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास का आरोप: तमिलनाडु में स्थानीय युवाओं की नौकरी का वादा हो रहा कमज़ोर

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PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास का आरोप: तमिलनाडु में स्थानीय युवाओं की नौकरी का वादा हो रहा कमज़ोर

सारांश

PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु में 75% स्थानीय युवाओं की भर्ती के चुनावी वादे को कुछ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मिलकर नाकाम करने में जुटे हैं। जीएसटी और बिजली सब्सिडी से जुड़ा यह वादा अब नई औद्योगिक नीति की परामर्श प्रक्रिया में दबाव में है।

मुख्य बातें

अंबुमणि रामदास ने 19 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि तमिलनाडु के स्थानीय रोज़गार वादे को कमज़ोर कर रहे हैं।
चुनावी घोषणापत्र में वादा था कि 75% स्थानीय कर्मचारी रखने वाली कंपनियों को 2.5% जीएसटी सब्सिडी और बिजली शुल्क पर 5% सब्सिडी मिलेगी।
अंबुमणि के अनुसार, नई औद्योगिक नीति की परामर्श प्रक्रिया में इस प्रस्ताव का संगठित विरोध हो रहा है।
PMK ने सरकार से आग्रह किया कि वह निहित स्वार्थों के दबाव में न आए और बिना देरी वादा लागू करे।
यह मुद्दा तमिलनाडु में निजी क्षेत्र में रोज़गार की तलाश कर रहे लाखों शिक्षित युवाओं को सीधे प्रभावित करता है।

पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने 19 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी और निजी उद्योग के प्रतिनिधि मिलकर तमिलनाडु सरकार के उस चुनावी वादे को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं की अधिक भर्ती सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रतिबद्धता से पीछे हटना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ सीधा विश्वासघात होगा।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार को जारी एक बयान में अंबुमणि ने उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनके अनुसार तमिलनाडु की नई औद्योगिक नीति तैयार करने के लिए शुरू हुई परामर्श प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने स्थानीय रोज़गार से जुड़े प्रस्तावों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यदि ये रिपोर्टें सही हैं, तो यह विरोध अत्यंत निराशाजनक है।

गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि जिन निजी कंपनियों में कम से कम 75 प्रतिशत कर्मचारी तमिलनाडु के स्थानीय युवा होंगे, उन्हें 2.5 प्रतिशत जीएसटी सब्सिडी और बिजली शुल्क पर 5 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।

PMK का पक्ष

अंबुमणि ने तर्क दिया कि औद्योगिक विकास और स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार साथ-साथ चलने चाहिए। उनके अनुसार, 'आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक आश्वासन देने के बावजूद, कुछ अधिकारी और निवेशक इस नीति को लागू होने से पहले ही रोकने के लिए संगठित प्रयास कर रहे हैं।

PMK नेता ने कहा कि ऐसे प्रयासों से राज्य के हज़ारों योग्य युवाओं को रोज़गार के अवसरों से वंचित होना पड़ेगा, जो किसी भी सरकार की नैतिक ज़िम्मेदारी के विरुद्ध है।

सरकार से आग्रह

अंबुमणि ने तमिलनाडु प्रशासन से आग्रह किया कि वह नई औद्योगिक नीति को इस प्रकार तैयार करे जो राज्य के कार्यबल के हितों की रक्षा करे और साथ ही निवेश एवं औद्योगिक विकास को भी प्रोत्साहित करे। उन्होंने सरकार से निहित स्वार्थों के दबाव में न आने और बिना देरी किए इस वादे को लागू करने की माँग की।

आम जनता पर असर

यह मुद्दा उन लाखों शिक्षित युवाओं के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है जो तमिलनाडु में निजी क्षेत्र में रोज़गार की तलाश में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में नई औद्योगिक नीति पर विचार-विमर्श चल रहा है और विभिन्न उद्योग समूह अपने हितों के अनुरूप नीतिगत बदलाव के लिए दबाव बना रहे हैं।

क्या होगा आगे

PMK ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाए रखेगी। अब सबकी नज़रें तमिलनाडु सरकार की उस प्रतिक्रिया पर होंगी जो वह नई औद्योगिक नीति के अंतिम मसौदे में स्थानीय रोज़गार प्रावधानों को लेकर देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसीलिए परामर्श प्रक्रिया में विरोध अप्रत्याशित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस नीति को लागू करने के लिए एक ऐसा ढाँचा बना पाएगी जो निवेश को बाधित किए बिना स्थानीय रोज़गार को प्राथमिकता दे — या फिर यह वादा भी 'घोषणापत्र की स्याही' बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PMK ने तमिलनाडु सरकार पर क्या आरोप लगाया है?
PMK अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया है कि कुछ सरकारी अधिकारी और निजी उद्योग प्रतिनिधि मिलकर तमिलनाडु सरकार के उस चुनावी वादे को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं की अधिक भर्ती सुनिश्चित करने की बात थी। उनके अनुसार, नई औद्योगिक नीति की परामर्श प्रक्रिया में इस प्रस्ताव का संगठित विरोध हो रहा है।
तमिलनाडु का स्थानीय रोज़गार चुनावी वादा क्या था?
सत्तारूढ़ दल ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि जिन निजी कंपनियों में कम से कम 75% कर्मचारी तमिलनाडु के स्थानीय युवा होंगे, उन्हें 2.5% जीएसटी सब्सिडी और बिजली शुल्क पर 5% सब्सिडी दी जाएगी। यह प्रावधान निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं की भर्ती को प्रोत्साहित करने के लिए था।
इस विवाद से तमिलनाडु के युवाओं पर क्या असर पड़ेगा?
यदि यह नीति लागू नहीं होती, तो निजी क्षेत्र में रोज़गार की तलाश कर रहे तमिलनाडु के हज़ारों शिक्षित युवाओं को प्रत्यक्ष नुकसान होगा। अंबुमणि का कहना है कि यह वादा सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नींव है।
PMK ने सरकार से क्या माँग की है?
PMK ने तमिलनाडु सरकार से माँग की है कि वह नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोज़गार के प्रावधानों को बिना कमज़ोर किए लागू करे और निहित स्वार्थों के दबाव में न आए। पार्टी चाहती है कि नीति ऐसी हो जो निवेश और स्थानीय कार्यबल के हितों को एक साथ आगे ले जाए।
तमिलनाडु की नई औद्योगिक नीति की स्थिति क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने नई औद्योगिक नीति तैयार करने के लिए परामर्श प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी प्रक्रिया में स्थानीय रोज़गार से जुड़े प्रस्तावों का विरोध सामने आया है, जिसे PMK ने सार्वजनिक रूप से उठाया है।
राष्ट्र प्रेस
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