क्या भारतीय रेलवे का पूंजीगत खर्च अप्रैल-दिसंबर अवधि में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा?

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क्या भारतीय रेलवे का पूंजीगत खर्च अप्रैल-दिसंबर अवधि में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा?

सारांश

भारतीय रेलवे ने अप्रैल से दिसंबर 2023 के बीच अपने पूंजीगत खर्च में अभूतपूर्व वृद्धि की है। यह विकास सुरक्षा, क्षमता और यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए किया गया है। जानिए इस खर्च के पीछे की कहानी और इसके प्रभावों के बारे में।

Key Takeaways

  • 2,03,138 करोड़ रुपए का पूंजीगत खर्च अप्रैल-दिसंबर 2023 में किया गया।
  • सुरक्षा उपायों में 84 प्रतिशत फंड का उपयोग।
  • वंदे भारत ट्रेनें और अमृत भारत ट्रेनें देश में चल रही हैं।
  • बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई और अहमदाबाद के बीच है।
  • रेल यात्रा सस्ती और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रेलवे ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में अपने आवंटित पूंजीगत खर्च में 80.54 प्रतिशत यानी 2,03,138 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को दी गई।

आम बजट 2025-26 में सरकार ने रेलवे के लिए पूंजीगत खर्च के लिए 2,52,200 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।

रेलवे मंत्रालय ने कहा कि यह आवंटित पूंजीगत खर्च का व्यय पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 6.54 प्रतिशत की तेज वृद्धि को दर्शाता है।

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में पूंजीगत खर्च मुख्य रूप से सुरक्षा उपायों, क्षमता बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं पर केंद्रित रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा से जुड़े कामों में आवंटित फंड का 84 प्रतिशत इस्तेमाल किया गया है।

क्षमता बढ़ाने के लिए, आवंटित 1,09,238 करोड़ रुपए में से 76,048 करोड़ रुपए (69 प्रतिशत) खर्च किए गए हैं। ग्राहक सुविधाओं में आवंटित पूंजीगत खर्च का 80 प्रतिशत उपयोग हुआ है, जिसमें दिसंबर 2025 तक 9,575 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

पिछले दस वर्षों में लगातार किए गए पूंजीगत खर्च का ही नतीजा है कि देश में 164 वंदे भारत ट्रेनें और 30 अमृत भारत ट्रेनें चल रही हैं। इसके साथ ही कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू किया गया है, ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है और नई लाइनें, गेज कन्वर्जन, ट्रैक डबलिंग, ट्रैफिक सुविधाएं और मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे बड़े क्षेत्रों में कार्य किए गए हैं।

मंत्रालय ने कहा, "इन प्रयासों से स्पीड, सेफ्टी और पैसेंजर कम्फर्ट में काफी सुधार हुआ है, साथ ही रेल यात्रा सस्ती भी रही है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जल्द ही शुरू होने के साथ, इंडियन रेलवे परिवर्तन के लिए तैयार है।"

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त, 2027 को मिलेगी। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबा है। इसमें से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा और नगर हवेली में है, और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है।

नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसार, कॉरिडोर का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा - लगभग 465 किलोमीटर - एलिवेटेड वायाडक्ट्स पर बनाया जा रहा है, जिसमें से 326 किलोमीटर पहले ही पूरा हो चुका है।

Point of View

बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। ऐसे प्रयासों से रेलवे की स्थिति और भी मजबूत होगी।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय रेलवे का पूंजीगत खर्च कितना है?
भारतीय रेलवे ने अप्रैल से दिसंबर 2023 के बीच 2,03,138 करोड़ रुपए का पूंजीगत खर्च किया है।
इस खर्च का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह खर्च मुख्य रूप से सुरक्षा, क्षमता बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं पर केंद्रित है।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की स्थिति क्या है?
भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त, 2027 को मिलेगी।
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