कंदरिया महादेव मंदिर: खजुराहो का अद्वितीय मंदिर जो 800 से अधिक मूर्तियों के साथ है
सारांश
Key Takeaways
- कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल राजा विद्याधर ने किया।
- यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
- मंदिर में 800 से अधिक मूर्तियाँ हैं।
- इसे 'इंटरलॉकिंग तकनीक' से बनाया गया है।
- सुबह की किरणों में यह मंदिर सोने की तरह चमकता है।
नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महादेव को समर्पित विशाल मंदिर भारत के हर कोने में विद्यमान हैं, जहाँ भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सदियों से आते आ रहे हैं। खजुराहो में भगवान शिव का एक अद्वितीय मंदिर है जो कला और संस्कृति के साथ-साथ इच्छाओं की पूर्ति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हम यहाँ कंदरिया महादेव मंदिर की बात कर रहे हैं, जहाँ के हर पत्थर में महादेव का गुणगान है।
मध्य भारत के खजुराहो में स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह कला और संस्कृति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव का लिंग रूप में पूजा की जाती है। इसके अलावा, मंदिर पर हुए आक्रमणों के कारण भी इसका ऐतिहासिक महत्व है। विशेष बात यह है कि इसे 'इंटरलॉकिंग तकनीक' से बनाया गया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि मंदिर पर उकेरी गई हर प्रतिमा एक-दूसरे में उलझी हुई है। यह जानना मुश्किल है कि कौन सी प्रतिमा कहाँ से शुरू होती है और कहाँ समाप्त होती है।
कंदरिया महादेव मंदिर की दीवारों पर खजुराहो की संस्कृति की झलक भी मिलती है। यहाँ की दीवारों पर 800 से अधिक प्रतिमाएँ बारीकी से उकेरी गई हैं, जो इस मंदिर की अनोखी विशेषता है। इन प्रतिमाओं में साड़ी की सिलवटें, नाखून और आभूषणों की चमक को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है और इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया गया है। इस मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर की चट्टान से किया गया है और ऐसा लगता है कि इसका निर्माण एक ही विशाल चट्टान से हुआ है। कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल राजा विद्याधर ने महमूद गजनवी को दूसरी बार हराने के बाद किया था, जिसे उनकी विजय का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर का आकार इतना बड़ा है कि जब सुबह की पहली किरणें मंदिर पर पड़ती हैं, तो यह सोने की तरह चमक उठता है और एक दिव्य और अद्भुत ऊर्जा का अनुभव होता है।