दक्षिण कोरिया: राष्ट्रपति ली ने अप्रैल क्रांति की 66वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र की रक्षा की शपथ ली

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दक्षिण कोरिया: राष्ट्रपति ली ने अप्रैल क्रांति की 66वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र की रक्षा की शपथ ली

सारांश

दक्षिण कोरिया ने अप्रैल क्रांति की 66वीं वर्षगांठ मनाई, जिसमें राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की कसम खाई। उन्होंने विद्रोह की भावना को याद करते हुए भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिया।

Key Takeaways

  • अप्रैल क्रांति की 66वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति ली ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
  • ली ने विद्रोह की भावना को महत्वपूर्ण बताया।
  • अधिकारियों ने लोकतंत्र की सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाई।
  • विद्रोह के दौरान कई छात्र मारे गए थे।
  • राजनीतिक स्थिति को देखते हुए एकजुटता का समय है।

सोल, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया रविवार को अप्रैल क्रांति की 66वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो देश के पहले राष्ट्रपति री सिंग-मैन की नीतियों के विरोध में एक जन आंदोलन था। 19 अप्रैल 1960 को यह आंदोलन सफल रहा और राष्ट्रपति को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। मौजूदा राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इतिहास को याद करते हुए भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की कसम

'19 अप्रैल क्रांति' की 66वीं सालगिरह पर अपने भाषण में, ली ने उस विद्रोह की तुलना पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 2024 में मार्शल लॉ लगाने की कोशिश से की। उन्होंने कहा कि उसी तरह लोगों की “हुंकार” ने एक “घमंडी और अन्यायपूर्ण शासन” को गिराने में मदद की।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी सोल में 19 अप्रैल के राष्ट्रीय समाधि स्थल में ली ने कहा, “यह 19 अप्रैल के विद्रोह की भावना थी, जिसने क्रूर तानाशाही को खत्म किया और जो कोरिया गणराज्य के संविधान में निहित थी, और उसी भावना ने दक्षिण कोरिया को दिसंबर 2024 में विद्रोह की ठंडी रात से उबरने में मदद की।”

ली ने लोकतंत्र की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “यदि हम इसकी रक्षा करेंगे तभी हम लोकतंत्र-विरोधी ताकतों को अपनी आजादी को फिर से छीनने और हमारे लोगों के अनमोल जीवन को रौंदने से रोक सकते हैं।”

ली ने कहा, “तानाशाही गरीब और कमजोर तबकों पर रहम नहीं खाती और लोकतंत्र को खत्म करने को सही ठहराती है।” आगे कहा, “इसलिए मैं इस बात पर जोर देता रहता हूं कि राजनीति की जिम्मेदारी लोगों की रोजी-रोटी की फिक्र करने की है, क्योंकि किसी देश के अस्तित्व का आधार उसकी जनता या आम नागरिक ही होते हैं।”

उन्होंने दृढ़ संकल्प किया कि वे स्वतंत्रता, समानता, एकता और एकजुटता पर आधारित डेमोक्रेसी को बनाए रखेंगे, क्योंकि यह कोरियाई लोगों के डीएनए में गहराई से समाई हुई है।

ली ने बगावत में मारे गए छात्रों को याद किया और उनके परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। साथ ही, उन्होंने उनके बलिदान को याद रखने का संकल्प भी लिया।

19 अप्रैल का नागरिक विद्रोह उस समय की री सरकार द्वारा राष्ट्रपति चुनाव में वोटों की धांधली के खिलाफ लोगों के गुस्से के कारण शुरू हुआ था।

देश भर में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला का पटाक्षेप 19 अप्रैल को हुआ था, जिसमें हथियारबंद पुलिस के साथ झड़प में सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए या घायल हुए।

इस बगावत ने आखिरकार री को 12 साल बाद पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।

Point of View

जबकि देश में राजनीतिक तनाव भी बढ़ रहा है। यह समय देश के लिए एकजुट होने का है।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

अप्रैल क्रांति क्या थी?
अप्रैल क्रांति 1960 में दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति री सिंग-मैन की नीतियों के खिलाफ एक जन आंदोलन था।
राष्ट्रपति ली ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ली ने लोकतंत्र की रक्षा की कसम खाई और विद्रोह की भावना को याद किया।
क्या विद्रोह सफल रहा था?
हां, 19 अप्रैल 1960 को यह आंदोलन सफल रहा और राष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा।
विद्रोह का कारण क्या था?
विद्रोह का कारण राष्ट्रपति चुनाव में वोटों की धांधली और अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा था।
क्या विद्रोह में कोई छात्र मारे गए थे?
हां, विद्रोह के दौरान सैकड़ों छात्र मारे गए या घायल हुए।
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