अमित शाह का बिहार दौरा: विकास के वादे या धार्मिक उन्माद?
सारांश
Key Takeaways
- अमित शाह का बिहार दौरा राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
- विपक्ष इस दौरे को धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास मानता है।
- सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठियों की संख्या को लेकर मतभेद हैं।
- सत्तारूढ़ पार्टी इसे विकास की दिशा में कदम मानती है।
पटना, 25 फरवरी (आईएएनस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे सीमांचल क्षेत्र का दौरा करेंगे और अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा पर बैठक करेंगे। जहां सत्तारूढ़ पार्टी इसे एक सकारात्मक कदम मानती है, वहीं विपक्ष के विधायक इस पर सवाल उठा रहे हैं।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार सरकार का खजाना खाली हो चुका है, और जिन्होंने सड़कों और इमारतों का निर्माण किया, उन्हें आज तक भुगतान नहीं मिला। सरकार केवल झांसा और जुमलेबाजी के माध्यम से काम कर रही है। गृहमंत्री अमित शाह का उद्देश्य घुसपैठियों को रोकने का नहीं है। मैं चेतावनी देता हूं कि यहां आग लगाने के बजाय इसे बुझाएं। बिहार में घुसपैठिए नहीं हैं।
राजद विधायक रणविजय साहू ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "अमित शाह जितनी बार भी बिहार आएं, यहां कुछ भी सकारात्मक नहीं हो रहा है। भाजपा सरकार ने बिहार के युवाओं को निरंतर धोखा दिया है। अच्छे दिन, महंगाई कम करने और विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा आज तक पूरा नहीं किया गया है। बिहार की स्थिति काफी खराब है और कानून व्यवस्था ध्वस्त है।"
कांग्रेस विधायक कामरुल हुड्डा ने कहा, "गृहमंत्री अमित शाह का सीमांचल और किशनगंज में स्वागत है। यह एक पिछड़ा क्षेत्र है। उन्हें यहां विकास परियोजनाओं की सौगात देनी चाहिए, न कि धार्मिक उन्माद फैलाना चाहिए।"
लोजपा (रामविलास) विधायक राजू तिवारी ने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह का बिहार आना हमेशा एक अच्छी बात होती है।"
भाजपा विधायक तारकिशोर प्रसाद ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री समय-समय पर बिहार आते रहते हैं। वे अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमांचल की स्थिति की समीक्षा करेंगे।"
मंत्री लखेंद्र पासवान ने बताया कि सीमांचल क्षेत्र किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार दूसरे देश की सीमा से सटा हुआ है। यहां से घुसपैठियों को रोकने के लिए गृहमंत्री का दौरा आवश्यक है, ताकि बिहार और देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।