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आरबीआई-एमपीसी फैसलों के बाद $40 अरब का कैपिटल इनफ्लो संभव, रुपया 92-93 तक आ सकता है: एसबीआई रिसर्च

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आरबीआई-एमपीसी फैसलों के बाद $40 अरब का कैपिटल इनफ्लो संभव, रुपया 92-93 तक आ सकता है: एसबीआई रिसर्च

सारांश

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि आरबीआई-एमपीसी के फैसलों के बाद भारत में 40 अरब डॉलर का कैपिटल इनफ्लो आ सकता है और रुपया 92-93 के स्तर तक मज़बूत हो सकता है। रेपो दर 5.25% पर स्थिर रखी गई, जबकि विकास अनुमान 6.6% और मुद्रास्फीति अनुमान 5.1% किया गया।

मुख्य बातें

एसबीआई रिसर्च ने 5 जून 2026 को अनुमान लगाया कि आरबीआई-एमपीसी के फैसलों से 40 अरब डॉलर तक का कैपिटल इनफ्लो संभव है।
रुपया डॉलर के मुकाबले 92-93 के स्तर तक मज़बूत हो सकता है।
एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित रखी और तटस्थ रुख बरकरार रखा।
विकास अनुमान 30 बीपीएस बढ़ाकर 6.6% और सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान 50 बीपीएस संशोधित कर 5.1% किया गया।
अगस्त 2026 की नीति समीक्षा में भी दरों में बदलाव न होने का अनुमान।
रुपये को 100 तक जाने देने के दावों को एसबीआई रिसर्च ने 'अनावश्यक' और सट्टेबाज़ी को बढ़ावा देने वाला बताया।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के ताज़ा फैसलों के बाद एसबीआई रिसर्च ने 5 जून 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारत में 40 अरब डॉलर तक का कैपिटल इनफ्लो आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूँजी प्रवाह से डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत होकर 92-93 के स्तर पर आ सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही विकास अनुमान को 30 आधार अंक (बीपीएस) समायोजित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान को भी 50 आधार अंक संशोधित कर 5.1 प्रतिशत किया गया है।

ब्याज दरों पर एसबीआई रिसर्च का आकलन

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, 'हमारा मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों में संभावित वृद्धि पर विचार करने से पहले महंगाई के आँकड़ों का विश्लेषण करना जारी रखेगा। बाज़ार की उम्मीदों के विपरीत, विकास संबंधी कारक ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि के चक्र को दरकिनार कर सकते हैं।' रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है।

मौद्रिक नीति की भाषा और रुपये की स्थिरता

रिपोर्ट में कहा गया, 'मौद्रिक नीति की भाषा मुद्रास्फीति पर निगरानी और बाहरी क्षेत्र से बचाव पर केंद्रित रही है, हालाँकि नीति का रुख तटस्थ है। यह विवेकपूर्ण कदम है क्योंकि यह आरबीआई की ओर से शांति और आत्मविश्वास का संकेत देता है और निराशावादी धारणाओं को रोकता है जो संभावित रूप से रुपये पर सट्टेबाज़ी को जन्म दे सकती हैं।'

गौरतलब है कि आरबीआई ने अपने नीति वक्तव्य में एक बार फिर स्पष्ट रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि कभी-कभी रुपये की चाल मूलभूत आर्थिक कारकों के अनुरूप नहीं होती।

सट्टेबाज़ी की आशंका पर चेतावनी

एसबीआई रिसर्च ने उन हालिया दावों को 'अनावश्यक' करार दिया जिनमें कहा जा रहा था कि रुपये को 100 तक भी बढ़ने दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, 'इस तरह के अनावश्यक दावे रुपये पर सट्टेबाज़ी को बढ़ावा देते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मुद्रा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है और उभरते बाज़ारों की मुद्राएँ दबाव में हैं।

आगे क्या

विश्लेषकों की नज़र अब आने वाले महीनों के सीपीआई और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आँकड़ों पर रहेगी, जो अगस्त 2026 की एमपीसी बैठक से पहले आरबीआई के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। यदि कैपिटल इनफ्लो के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय वित्तीय बाज़ारों और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों के लिए सकारात्मक संकेत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 40 अरब डॉलर के कैपिटल इनफ्लो का दारोमदार वैश्विक जोखिम-भावना और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीति पर भी उतना ही निर्भर है जितना आरबीआई के रुख पर। रेपो दर को 5.25% पर रोके रखना तटस्थ तो है, पर यह सवाल बना रहता है कि क्या यह नीति वास्तव में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है या महज़ बाज़ार को स्थिर रखने की कवायद। रुपये को 100 तक जाने देने की माँग को 'सट्टेबाज़ी' कहकर खारिज करना आरबीआई की सक्रिय मुद्रा-प्रबंधन नीति की पुष्टि करता है — जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ज़रूरी है, पर निर्यातकों के लिए चिंता का विषय भी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसबीआई रिसर्च ने 40 अरब डॉलर कैपिटल इनफ्लो का अनुमान क्यों लगाया?
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, आरबीआई-एमपीसी द्वारा रेपो दर को 5.25% पर स्थिर रखने और तटस्थ रुख अपनाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे भारत में 40 अरब डॉलर तक का कैपिटल इनफ्लो आ सकता है। यह पूँजी प्रवाह रुपये को डॉलर के मुकाबले 92-93 के स्तर तक मज़बूत कर सकता है।
आरबीआई ने रेपो दर में बदलाव क्यों नहीं किया?
एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित रखी क्योंकि केंद्रीय बैंक पहले महंगाई के आँकड़ों का विश्लेषण करना चाहता है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि विकास संबंधी कारक आक्रामक दर-वृद्धि के चक्र को रोक सकते हैं।
अगस्त 2026 की एमपीसी बैठक में क्या होने की उम्मीद है?
एसबीआई रिसर्च को अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है। केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के आँकड़ों पर नज़र रखते हुए तटस्थ रुख बनाए रखेगा।
आरबीआई ने रुपये को 100 तक जाने देने की माँग पर क्या कहा?
आरबीआई ने अपने नीति वक्तव्य में स्पष्ट किया कि कभी-कभी रुपये की चाल मूलभूत आर्थिक कारकों के अनुरूप नहीं होती। एसबीआई रिसर्च ने रुपये को 100 तक जाने देने के दावों को 'अनावश्यक' बताया और कहा कि ऐसे दावे रुपये पर सट्टेबाज़ी को बढ़ावा देते हैं।
एमपीसी ने विकास और मुद्रास्फीति अनुमान में क्या बदलाव किए?
एमपीसी ने विकास अनुमान को 30 आधार अंक बढ़ाकर 6.6% कर दिया, जबकि सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान को 50 आधार अंक संशोधित कर 5.1% किया गया। ये संशोधन आरबीआई के सतर्क लेकिन स्थिर आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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