जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: धर्मेंद्र प्रधान ने किए महाप्रभु के दर्शन, 19 IPS अधिकारियों समेत 220 प्लाटून तैनात
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 16 जुलाई को पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। उन्होंने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि ऐसे दिव्य क्षण उन्हीं को नसीब होते हैं जिन पर महाप्रभु की विशेष कृपा हो। इस महापर्व की सुरक्षा के लिए ओडिशा पुलिस ने 19 आईपीएस अधिकारियों और 220 प्लाटून पुलिस बल की तैनाती की है।
मंत्री प्रधान के उद्गार
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि आज हमें महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा देखने को मिल रही है।' उन्होंने 'पहांडी' रस्म का विशेष उल्लेख किया, जिसमें महाप्रभु को उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ पारंपरिक विधि-विधान से उनके-उनके रथों तक लाया जाता है। प्रधान ने कहा कि महाप्रभु के दर्शन का यह सौभाग्य उन्हें अभिभूत कर देता है।
मुख्य पुजारी ने बताया महत्व
जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी जगन्नाथ स्वाइन दास महापात्र ने कहा, 'आज पवित्र श्री गुंडिचा यात्रा है, जो दुनिया का सबसे शुभ दिन है। इस दिन भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर पधारते हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान का इस प्रकार बाहर आना अपने भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा का प्रतीक है।
सुरक्षा का बहुस्तरीय प्रबंध
आईजी सत्यजीत नाइक ने बताया कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने 19 आईपीएस अधिकारियों सहित 220 प्लाटून पुलिस बल का व्यापक और बहुस्तरीय सुरक्षा प्लान तैयार किया है। तटीय सुरक्षा के लिए नौसेना और तटरक्षक बल के साथ समन्वय स्थापित किया गया है, जो समुद्र में गश्त करेंगे। रेलवे सुरक्षा के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुरक्षित रहे।
पटना और कोलकाता में भी उत्सव
बिहार की राजधानी पटना में इस्कॉन प्रचारक हरिलाल दास ने बताया कि इस्कॉन मंदिर से निकलने वाली रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भी शामिल होने की संभावना है। वहीं, कोलकाता में इस्कॉन के पुजारी चैतन्य दास प्रभु ने इस्कॉन कोलकाता की 55वीं रथ यात्रा में श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि जिस प्रकार पुरी के राजा परंपरागत रूप से यह यात्रा आयोजित करते आए हैं, उसी पवित्र परंपरा को आज भी जीवित रखा जा रहा है। यह महापर्व भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रमाण है और आने वाले वर्षों में इसकी भव्यता और बढ़ती जाएगी।