पुरी रथ यात्रा 2025: 16 जुलाई को निकलेंगे भगवान जगन्नाथ के रथ, 12,000 पुलिसकर्मी तैनात
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के पवित्र तटीय नगर पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियाँ अपने चरम पर पहुँच गई हैं। 16 जुलाई (गुरुवार) को भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज भगवान बलभद्र और अनुजा देवी सुभद्रा अपनी नौ दिवसीय वार्षिक यात्रा पर 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा के साक्षी बनने के लिए पुरी में एकत्र हो रहे हैं।
रथों का स्थानांतरण और परंपरागत तैयारी
बुधवार को जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के निकट पारंपरिक निर्माण स्थल 'रथ खला' से तीनों देवताओं के पवित्र रथों को विधिपूर्वक स्थानांतरित किया गया। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन — ये तीनों रथ लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तय कर गुंडिचा मंदिर तक खींचे जाएंगे।
पवित्र ग्रंथों के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को चतुर्धा मूर्ति — अर्थात् भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और सुदर्शन — का जन्मस्थान माना जाता है, जो इस यात्रा को धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बनाता है।
अनुष्ठान और कार्यक्रम
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधे ने बताया कि रथ यात्रा की सभी तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को 'नेत्रोत्सव' और 'नव यौवन दर्शन' अनुष्ठान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुचारू रूप से संपन्न हुए और बुधवार के अनुष्ठान भी समयानुसार चल रहे हैं।
पाधे के अनुसार, पाहांडी बीजे अनुष्ठान — जिसमें देवताओं को मंदिर से रथों तक लाया जाता है — गुरुवार सुबह 9 से 9:30 बजे के बीच प्रारंभ होगा। यह अनुष्ठान रथ यात्रा का सबसे भावपूर्ण क्षण माना जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंध
पुरी कलेक्टर दिब्या ज्योति परिदा ने बताया कि प्रशासन ने इस वर्ष भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान देते हुए व्यापक व्यवस्था की है।
उत्सव के दौरान सुरक्षा के लिए लगभग 12,000 पुलिसकर्मियों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की पर्याप्त टुकड़ियाँ भी तैनात रहेंगी। समग्र सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त किया गया है।
भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना तटीय मार्ग से किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क रहेंगी। यातायात प्रबंधन के लिए 595 स्थायी और 1,050 अस्थायी साइनबोर्ड लगाए गए हैं, तथा पुरी आने-जाने वाले वाहनों के लिए गतिशील यातायात योजना लागू की गई है।
रथ यात्रा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व
पुरी की रथ यात्रा न केवल भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक है, बल्कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भी इसे विशेष स्थान प्राप्त है। यह ऐसे समय में आई है जब ओडिशा सरकार तीर्थाटन और पर्यटन को नई ऊँचाइयाँ देने की दिशा में काम कर रही है। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष इस यात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, जो इसे विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक धार्मिक जमावड़ों में से एक बनाता है।
इस वर्ष की रथ यात्रा की सफलता के बाद नौ दिन बाद देवताओं की वापसी यात्रा — बाहुड़ा यात्रा — आयोजित होगी, जिसमें भगवान जगन्नाथ पुनः अपने मुख्य मंदिर में विराजमान होंगे।