15 जुलाई 2026
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जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: पुरी के गुंडिचा मंदिर में 'गुंडिचा मार्जन' रस्म, लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्वागत

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जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: पुरी के गुंडिचा मंदिर में 'गुंडिचा मार्जन' रस्म, लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्वागत

सारांश

जगन्नाथ रथ यात्रा से ठीक एक दिन पहले पुरी के गुंडिचा मंदिर में 'गुंडिचा मार्जन' की पवित्र रस्म संपन्न हुई — देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान के अस्थायी निवास को स्वयं अपने हाथों से स्वच्छ किया। गुरुवार को नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर की ओर निकलेंगे।

मुख्य बातें

15 जुलाई 2025 को पुरी के गुंडिचा मंदिर में ' गुंडिचा मार्जन ' रस्म संपन्न हुई।
देशभर से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर भगवान जगन्नाथ , बलभद्र और सुभद्रा के स्वागत की तैयारी की।
तीनों रथ — नंदीघोष , तालध्वज और दर्पदलन — को वस्त्रों, फूलों और अलंकरणों से सजाया गया।
गुरुवार, 16 जुलाई को रथ यात्रा शुरू होगी; भगवान 7 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे।
हरियाणा , कोलकाता सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुँचे हैं।

पुरी (ओडिशा) में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से एक दिन पहले बुधवार, 15 जुलाई को गुंडिचा मंदिर में पारंपरिक 'गुंडिचा मार्जन' रस्म संपन्न हुई। देश के कोने-कोने से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेते हुए मंदिर परिसर की साफ-सफाई की, ताकि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के आगमन के लिए उनका अस्थायी निवास तैयार हो सके।

गुंडिचा मार्जन: परंपरा और महत्व

'गुंडिचा मार्जन' एक सदियों पुरानी वैदिक परंपरा है जिसमें रथ यात्रा से पूर्व गुंडिचा मंदिर — जिसे भगवान जगन्नाथ की 'मौसी का घर' कहा जाता है — को विधिवत शुद्ध और स्वच्छ किया जाता है। यह मंदिर रथ यात्रा उत्सव के दौरान 7 दिनों तक दिव्य ऊर्जा के केंद्र में परिवर्तित हो जाता है, जब स्वयं भगवान जगन्नाथ यहाँ विराजमान होते हैं। इस रस्म में श्रद्धालुओं की सहभागिता इसे केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा का अनूठा संगम बनाती है।

श्रद्धालुओं की भावनाएँ

हरियाणा के रोहतक से पुरी पहुँची एक महिला श्रद्धालु ने कहा, 'भगवान जगन्नाथ ने मुझे गुंडिचा मार्जन रस्म में शामिल होने का अवसर दिया है। मैं अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानती हूँ।' पहली बार रथ यात्रा में शामिल हुई एक अन्य महिला भक्त ने अपनी अनुभूति साझा करते हुए कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है — ऐसा लग रहा है जैसे भगवान के साक्षात दर्शन हो रहे हैं। यहाँ का नजारा बेहद अद्भुत है और व्यवस्था भी सराहनीय है।'

कोलकाता से हर वर्ष रथ यात्रा में आने वाले एक श्रद्धालु ने बताया, 'मैं हर साल इस पवित्र अवसर पर पुरी आता हूँ। गुरुवार को रथ यात्रा निकलनी है और प्रभु के दर्शन के लिए लाखों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं।' एक अन्य भक्त ने यात्रा के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'इसका बहुत महत्व है, क्योंकि यह चार पवित्र धाम यात्राओं में से एक है।'

रथों की तैयारी और यात्रा का मार्ग

रथ यात्रा की पूर्व संध्या पर तीनों भव्य रथों — नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ का रथ), तालध्वज (बलभद्र का रथ) और दर्पदलन (देवी सुभद्रा का रथ) — को रंग-बिरंगे वस्त्रों, पुष्पमालाओं और पारंपरिक अलंकरणों से सजाया गया। अंतिम पूजा-अर्चना और विधि-विधान पूरे किए जा रहे हैं। गुरुवार, 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ अपने अग्रज बलभद्र और भगिनी सुभद्रा के साथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर रथ यात्रा पर निकलेंगे। हजारों श्रद्धालु रस्सियाँ खींचकर रथों को आगे बढ़ाएँगे — यह परंपरा मोक्ष प्राप्ति का माध्यम मानी जाती है।

आम जनता पर असर और व्यवस्था

प्रशासन ने लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। एक श्रद्धालु ने भीड़ प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा, 'इतनी भीड़ होने के बाद भी सब आराम से निकल पा रहे हैं।' गौरतलब है कि जगन्नाथ रथ यात्रा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में मान्यता प्राप्त है और यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक जन-समागमों में से एक है।

आगे क्या

गुरुवार को रथ यात्रा के शुभारंभ के साथ पुरी का यह उत्सव अपने चरम पर पहुँचेगा। भगवान जगन्नाथ 7 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे, जिसके बाद 'बहुदा यात्रा' (वापसी यात्रा) के साथ यह महोत्सव संपन्न होगा। श्रद्धालुओं का यह सैलाब पुरी की आस्था और भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रमाण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु 'गुंडिचा मार्जन' जैसी रस्में इस उत्सव की असली आत्मा हैं — जहाँ भक्त स्वयं सेवक बनकर भगवान के निवास को शुद्ध करते हैं। यह परंपरा भारत की उस सामूहिक आस्था को दर्शाती है जो सामाजिक भेद मिटाकर सबको एक सूत्र में पिरोती है। प्रशासन के लिए यह आयोजन हर वर्ष एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है, और इस बार की व्यवस्था की श्रद्धालुओं द्वारा की गई सराहना सकारात्मक संकेत है। यूनेस्को की मान्यता के बाद इस यात्रा का वैश्विक महत्व और बढ़ा है, जो भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के लिए भी एक अवसर है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुंडिचा मार्जन रस्म क्या होती है?
'गुंडिचा मार्जन' जगन्नाथ रथ यात्रा से पूर्व निभाई जाने वाली एक पारंपरिक सफाई रस्म है, जिसमें श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के आगमन के लिए शुद्ध करते हैं। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ की 'मौसी का घर' कहलाता है जहाँ वे रथ यात्रा के दौरान 7 दिन विराजते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 कब शुरू होगी?
जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 गुरुवार, 16 जुलाई को पुरी से शुरू होगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।
रथ यात्रा में कौन-कौन से तीन रथ होते हैं?
रथ यात्रा में तीन भव्य रथ होते हैं — भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', बलभद्र का रथ 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन'। इन्हें पारंपरिक वस्त्रों, पुष्पमालाओं और अलंकरणों से सजाया जाता है।
गुंडिचा मंदिर का क्या महत्व है?
गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की 'मौसी का घर' कहा जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ 7 दिनों तक यहाँ विराजमान रहते हैं, जिससे यह स्थान दिव्य ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। यहाँ दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा चार धाम से कैसे जुड़ी है?
पुरी को हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक माना जाता है — बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी। जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान पुरी की यात्रा को चार धाम यात्रा का हिस्सा माना जाता है, इसलिए लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर यहाँ आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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