संजय राउत बोले — हनुमान चालीसा पढ़ने की कोई शर्त नहीं, 18 जुलाई को उद्धव ठाकरे के साथ मंदिर जाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 15 जुलाई 2026 को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि मंदिर जाने और हनुमान चालीसा पढ़ने पर उनकी कोई शर्त नहीं है। राउत ने कहा कि 18 जुलाई को उद्धव ठाकरे नागपुर आएंगे और दोनों नेता एक साथ मंदिर में जाएंगे।
मंदिर कार्यक्रम की रूपरेखा
राउत ने बताया कि मंदिर के बाहर एक मंच स्थापित किया जाएगा। यदि बड़ी संख्या में समर्थक वहाँ पहुँचते हैं, तो उद्धव ठाकरे उन्हें संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा, 'हनुमान चालीसा पढ़ने में क्या शर्त हो सकती है? हमारा कार्यक्रम पूरा होगा।' यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी गठबंधन की सक्रियता बढ़ रही है।
जयंत पाटिल और मुख्यमंत्री की मुलाकात पर प्रतिक्रिया
एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल की मंगलवार रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात पर उद्धव ठाकरे ने इसकी पुष्टि की। राउत ने इस मुलाकात पर कोई विशेष आपत्ति नहीं जताई, लेकिन महाविकास आघाड़ी की एकजुटता पर ज़ोर दिया।
महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की रणनीति
महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि सरकार की ओर से विधेयक दोबारा लाया जाता है, तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर उसका विरोध करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से विधेयक में संशोधन के सुझाव दिए गए हैं और यदि उन पर विचार किया जाता है, तो चर्चा की जा सकती है। सुप्रिया सुले के बारे में ठाकरे ने कहा कि वे खुलकर बातचीत करने वाली नेता हैं।
शरद पवार और भाजपा पर कांग्रेस का रुख
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने शरद पवार के भाजपा में जाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कुछ लोग जा सकते हैं, लेकिन शरद पवार बिल्कुल भी नहीं जाएंगे। यह बयान उस समय आया जब महाराष्ट्र में राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाएँ तेज़ हैं।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर दलवई का बयान
राम मंदिर चढ़ावे के मामले पर हुसैन दलवई ने जगद्गुरु शंकराचार्य के बयान का हवाला देते हुए कहा कि शंकराचार्य ने खुद कहा है कि 'इससे क्या होगा? कुछ नहीं होगा।' दलवई ने आगे कहा कि शंकराचार्य के अनुसार यह राम मंदिर नहीं, बल्कि आरएसएस और भाजपा (BJP) का कार्यालय है — यही कारण है कि वे अब तक वहाँ नहीं गए। गौरतलब है कि राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विवाद पहले से चल रहा है और यह बयान उस बहस को नई धार देता है।
महाराष्ट्र की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच 18 जुलाई का मंदिर कार्यक्रम शिवसेना (यूबीटी) के लिए जनसंपर्क और सांस्कृतिक पहचान के नज़रिए से अहम माना जा रहा है।