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भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जयंती: गडकरी, मनोहर लाल समेत कई मुख्यमंत्रियों ने किया नमन

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भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जयंती: गडकरी, मनोहर लाल समेत कई मुख्यमंत्रियों ने किया नमन

सारांश

इस्कॉन के संस्थापक श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर 1 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल, पंकज चौधरी और दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की — जो भारतीय राजनीति में सनातन परंपरा की बढ़ती केंद्रीयता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

1 सितंबर को इस्कॉन संस्थापक श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने एक्स पर विनम्र अभिवादन अर्पित किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रभुपाद के जीवन को 'अटूट श्रद्धा, तपस्या और मानव कल्याण का अनुपम उदाहरण' बताया।
प्रभुपाद ने 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी और भगवद्गीता का 80 से अधिक भाषाओं में प्रसार किया।

इस्कॉन (अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) के संस्थापक श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर 1 सितंबर को देशभर के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धापूर्वक नमन किया। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक, सभी ने सनातन संस्कृति और कृष्णभक्ति को वैश्विक स्तर पर फैलाने में प्रभुपाद के अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'आध्यात्मिक गुरु अभयचरणारविन्द भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पोस्ट में कहा, 'भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने वाले इस्कॉन के संस्थापक परम पूज्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन। उन्होंने पावन भगवद्गीता के आलोक को समूचे विश्व में पहुंचाने और जनमानस को भारतीय सनातन संस्कृति व भक्ति वेदांत से जोड़ने का अद्वितीय कार्य किया।'

केंद्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'विश्वभर में श्रीकृष्ण भक्ति की अलख जगाने वाले पूजनीय भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर सादर नमन। इस्कॉन के माध्यम से सनातन संस्कृति, भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।'

मुख्यमंत्रियों ने किया स्मरण

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट किया, 'श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग के शाश्वत संदेश को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने वाले इस्कॉन के संस्थापक परम पूज्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश को केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे साधना, सेवा और समर्पण के जीवंत मार्ग के रूप में विश्वभर के जनमानस तक पहुंचाया।'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'आध्यात्मिक गुरु एवं महान संत श्रील भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। श्रीकृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पोस्ट में कहा, 'इस्कॉन के संस्थापक, अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर सादर नमन करता हूं। आपने असंख्य श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के मार्ग पर अग्रसर कर लोककल्याण की प्रेरणा दी। श्रद्धा, भक्ति एवं ज्ञान के लिए समर्पित आपके जीवन से सदैव मार्गदर्शन मिलता रहेगा।'

उपमुख्यमंत्री की भावभीनी श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा, 'अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों को पूरे विश्व में फैलाने वाले श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन! संपूर्ण विश्व को श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान और कृष्ण-भक्ति की आध्यात्मिक चेतना से अभिसिंचित करने वाले स्वामी प्रभुपाद जी का जीवन अटूट श्रद्धा, तपस्या और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है।'

प्रभुपाद की विरासत और वैश्विक प्रभाव

गौरतलब है कि श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने इस्कॉन की स्थापना 1966 में न्यूयॉर्क में की थी और अपने जीवनकाल में 108 से अधिक मंदिरों की स्थापना की। उन्होंने भगवद्गीता सहित वैदिक ग्रंथों का 80 से अधिक भाषाओं में अनुवाद और प्रसार किया, जो आज भी विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करता है। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब भारतीय आध्यात्मिक परंपराएँ वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। देशभर के नेताओं की एकस्वर श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि प्रभुपाद की शिक्षाएँ आज भी राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे राजनीतिक वर्ग का इतना व्यापक समर्थन मिलता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि प्रभुपाद की विरासत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का भी एक सशक्त माध्यम रही है — जो 'सॉफ्ट पावर' के रूप में भारत की वैश्विक छवि को आज भी मजबूत करती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद कौन थे?
श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक थे, जिन्होंने 1966 में न्यूयॉर्क में इस संस्था की स्थापना की। उन्होंने भगवद्गीता और वैदिक ग्रंथों का 80 से अधिक भाषाओं में अनुवाद कर श्रीकृष्ण भक्ति को विश्वव्यापी आंदोलन का रूप दिया।
1 सितंबर को किन नेताओं ने प्रभुपाद को श्रद्धांजलि दी?
1 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल, पंकज चौधरी; दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी; मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव; और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस्कॉन की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
इस्कॉन की स्थापना 1966 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। आज यह संस्था विश्वभर में 108 से अधिक मंदिरों और करोड़ों अनुयायियों के साथ एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन बन चुकी है।
प्रभुपाद की विरासत आज क्यों प्रासंगिक है?
प्रभुपाद ने भगवद्गीता को 80 से अधिक भाषाओं में प्रसारित कर भारतीय आध्यात्मिक दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी शिक्षाएँ आज भी करोड़ों लोगों को सनातन संस्कृति, भक्ति और कर्मयोग के मार्ग पर प्रेरित करती हैं, जिसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने प्रभुपाद के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर कहा कि प्रभुपाद ने भगवद्गीता के आलोक को समूचे विश्व में पहुंचाने और जनमानस को भारतीय सनातन संस्कृति व भक्ति वेदांत से जोड़ने का अद्वितीय कार्य किया। उन्होंने प्रभुपाद को 'कोटि कोटि नमन' अर्पित किया।
राष्ट्र प्रेस
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