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कृष्ण चेतना से जुड़ेगा विश्व — न्यूयॉर्क में इस्कॉन दौरे पर बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

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कृष्ण चेतना से जुड़ेगा विश्व — न्यूयॉर्क में इस्कॉन दौरे पर बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में इस्कॉन दौरा महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह एक वैचारिक संदेश था। 60वीं वर्षगांठ पर उनका यह कहना कि 'कृष्ण चेतना ही विश्व को जोड़ सकती है', आरएसएस की वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति की दिशा को स्पष्ट करता है।

मुख्य बातें

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने 28 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में इस्कॉन के ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया।
भागवत ने कहा कि आज के संघर्षग्रस्त विश्व में कृष्ण चेतना ही मानवता को एकजुट करने में सक्षम है।
उन्होंने मैनहट्टन के 26 सेकंड एवेन्यू पर इस्कॉन संस्थापक प्रभुपाद को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस्कॉन ने 80 भाषाओं में भगवद गीता की 60 करोड़ प्रतियाँ वितरित की हैं और 120 देशों में 1,300 मंदिर स्थापित किए हैं।
यह यात्रा इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ और आरएसएस की शताब्दी के अवसर पर आयोजित हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 28 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) के ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और कहा कि आज के संघर्षग्रस्त विश्व को एकजुट करने की शक्ति केवल 'कृष्ण चेतना' में है। यह यात्रा इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई, जबकि आरएसएस स्वयं अपनी शताब्दी मना रहा है।

मुख्य संदेश: चेतना ही एकमात्र सेतु

भागवत ने इस्कॉन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, 'विश्व कृष्ण चेतना है। आज के विश्व में इतने संघर्ष और इतने द्वंद्व हैं। हमें एकजुट करने वाली एकमात्र चीज चेतना है और वह कृष्ण चेतना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवद गीता मनुष्य को संसार से पलायन नहीं सिखाती, बल्कि दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा का आह्वान करती है।

उन्होंने कहा, 'हम सब एक हैं। इतनी विविधताएं, द्वैत और संघर्ष हैं, फिर भी वास्तव में यह सब कृष्ण ही हैं। गीता हमें यही सिखाती है — जीवन से भागो मत, दृढ़ रहो, अपना कर्तव्य निभाओ।'

प्रभुपाद को श्रद्धांजलि और ऐतिहासिक स्थल का दौरा

भागवत ने मैनहट्टन स्थित 26 सेकंड एवेन्यू का दौरा किया — वह पता जहाँ इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य एसी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में इस संगठन की नींव रखी थी। उन्होंने पुष्प अर्पित कर प्रभुपाद को श्रद्धांजलि दी और इस्कॉन की उपलब्धियों की सराहना की।

गौरतलब है कि इस्कॉन अब तक 80 भाषाओं में भगवद गीता की 60 करोड़ प्रतियाँ वितरित कर चुका है और 120 देशों में 1,300 मंदिर स्थापित कर चुका है — आँकड़े जिन्हें भागवत ने विशेष रूप से रेखांकित किया।

आरएसएस और इस्कॉन: साझा चेतना, अलग पथ

भागवत ने दोनों संगठनों की परस्पर पूरकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'ये संगठन अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन सभी एक ही चेतना का प्रसार करने में लगे हुए हैं।' इस्कॉन की शासी निकाय समिति के सदस्य और गोवर्धन इको विलेज के निदेशक गौरंगा दास ने बताया कि भागवत ने संगठन को सनातन और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार को और अधिक विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।

आगंतुक पुस्तिका में दर्ज भावनाएं

दौरे के समापन पर भागवत ने आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए इस स्थल को 'प्रेरणादायक' बताया और लिखा कि यह स्थान कृष्ण चेतना का 'अतुलनीय उपहार' विश्व को देता रहा है। उन्होंने लिखा कि वे विनम्रता का अनुभव कर रहे हैं और प्रत्येक व्यक्ति तथा वस्तु में दिव्य उपस्थिति के प्रति 'शुद्ध सात्विक प्रेम की भावना से परिपूर्ण' हैं।

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब आरएसएस अपनी वैश्विक उपस्थिति को नए आयाम देने की दिशा में काम कर रहा है। भागवत का यह संदेश — कि कृष्ण चेतना का प्रसार ही मानवता को एकजुट कर सकता है — आने वाले समय में भारत और विश्व के आध्यात्मिक-सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संदेश घरेलू राजनीतिक संदर्भ से अलग नहीं देखा जा सकता। इस्कॉन की वैश्विक पहुँच — 120 देश, 1,300 मंदिर — को आरएसएस की वैचारिक स्वीकृति मिलना, दोनों संगठनों के बीच एक नई सहयोगी कूटनीति का संकेत है। सवाल यह है कि क्या यह आध्यात्मिक एकता का आह्वान है या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की वैश्विक परियोजना का विस्तार — और इस रेखा को मुख्यधारा की कवरेज अक्सर अनदेखा कर देती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में इस्कॉन का दौरा क्यों किया?
मोहन भागवत ने इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित ऐतिहासिक इस्कॉन स्थलों का दौरा किया। इस यात्रा में उन्होंने संस्थापक प्रभुपाद को श्रद्धांजलि अर्पित की और कृष्ण चेतना के वैश्विक प्रसार पर अपने विचार साझा किए।
भागवत ने कृष्ण चेतना के बारे में क्या कहा?
भागवत ने कहा कि आज के विश्व में बढ़ते संघर्षों और विभाजनों के बीच 'कृष्ण चेतना' ही मानवता को एकजुट कर सकती है। उन्होंने भगवद गीता का संदर्भ देते हुए कहा कि यह ग्रंथ पलायन नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ता का संदेश देता है।
इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ पर उसकी वैश्विक उपस्थिति कितनी है?
इस्कॉन अब तक 80 भाषाओं में भगवद गीता की 60 करोड़ प्रतियाँ वितरित कर चुका है और 120 देशों में 1,300 मंदिर स्थापित कर चुका है। भागवत ने इन उपलब्धियों की विशेष सराहना की।
इस्कॉन की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
इस्कॉन की स्थापना 1966 में मैनहट्टन स्थित 26 सेकंड एवेन्यू पर एसी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। भागवत ने इसी ऐतिहासिक पते का दौरा किया और वहाँ पुष्प अर्पित किए।
आरएसएस और इस्कॉन के बीच क्या संबंध है?
भागवत के अनुसार, दोनों संगठन अलग-अलग तरीकों से कार्य करते हैं, लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही है — कृष्ण चेतना और सनातन धर्म का प्रसार। इस्कॉन के गौरंगा दास ने बताया कि भागवत ने संगठन को सनातन और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार को और विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्र प्रेस
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