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लामज्जक: जोड़ों के दर्द, बुखार और त्वचा रोगों में आयुर्वेद का पुराना साथी

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लामज्जक: जोड़ों के दर्द, बुखार और त्वचा रोगों में आयुर्वेद का पुराना साथी

सारांश

लामज्जक — घास कुल का यह बहुवर्षीय पौधा — सदियों से आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में बुखार, गठिया और त्वचा रोगों के लिए प्रयोग होता आया है। नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने इसके महत्व को फिर से रेखांकित किया है, साथ ही विशेषज्ञ सलाह की जरूरत भी बताई है।

मुख्य बातें

लामज्जक घास कुल का एक बहुवर्षीय औषधीय पौधा है जो अनुकूल परिस्थितियों में वर्षों तक जीवित रहता है।
पारंपरिक चिकित्सा में इसे बुखार , गाउट , रूमेटिज्म और त्वचा रोगों में उपयोगी माना गया है।
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने इस पौधे के औषधीय महत्व को रेखांकित किया है।
रोपाई का उचित समय जून से जुलाई बताया गया है; स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेषज्ञ सलाह आवश्यक।
किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग करने से पहले चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अनिवार्य है।

लामज्जक एक बहुवर्षीय औषधीय पौधा है जिसे सदियों से आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में बुखार, गठिया, जोड़ों के दर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार में उपयोगी माना जाता रहा है। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने हाल ही में इस पौधे के औषधीय महत्व को रेखांकित किया है। यह पौधा घास कुल से संबंधित है और अनुकूल परिस्थितियों में वर्षों तक जीवित रहता है।

लामज्जक क्या है और कहाँ पाया जाता है

लामज्जक घास कुल (Poaceae) से संबंधित एक बहुवर्षीय जड़ी-बूटी है, जो एक बार उगने के बाद अनुकूल मौसम और मिट्टी में साल-दर-साल पनपती रहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी रोपाई का उपयुक्त समय जून से जुलाई के बीच बताया गया है, हालाँकि स्थानीय जलवायु और मिट्टी के आधार पर यह समय बदल सकता है। खेती के इच्छुक किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

इस पौधे की सही पहचान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि औषधीय पौधों में भ्रम की स्थिति नुकसानदेह हो सकती है। किसी जानकार वनस्पति विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य की मदद से ही इसे पहचानें और उपयोग करें।

बुखार में पारंपरिक उपयोग

आयुर्वेदिक और लोक चिकित्सा परंपराओं में लामज्जक को शरीर की बढ़ी हुई ऊष्मा को संतुलित करने में सहायक माना जाता है। पारंपरिक ग्रंथों के अनुसार इसे ज्वरनाशक (बुखार कम करने वाले) गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज या लगातार बुखार कई गंभीर रोगों का संकेत हो सकता है, इसलिए केवल किसी जड़ी-बूटी पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जाँच अनिवार्य है।

जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत

लोक चिकित्सा में लामज्जक का उपयोग गाउट (गठिया का एक प्रकार) और रूमेटिज्म जैसी स्थितियों में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। जोड़ों की सूजन और दर्द से राहत के लिए इसे उपयोगी माना गया है। गौरतलब है कि दर्द का मूल कारण जानना उपचार की दिशा तय करता है — इसलिए स्व-उपचार से पहले चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।

त्वचा रोगों में उपयोग

लोक चिकित्सा में लामज्जक का लेप या अर्क विभिन्न त्वचा संबंधी स्थितियों में भी प्रयोग किया जाता रहा है। हालाँकि, त्वचा पर किसी भी पौधे का सीधा प्रयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य की सलाह लेना अनिवार्य है। संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्तियों में प्राकृतिक तत्व भी एलर्जी या जलन का कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के अनुसार, लामज्जक जैसे औषधीय पौधों का महत्व तभी पूरी तरह सामने आता है जब उनका उपयोग प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में हो। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक जड़ी-बूटियाँ आधुनिक चिकित्सा की पूरक हो सकती हैं, लेकिन इन्हें उसका विकल्प नहीं समझना चाहिए। भारत में औषधीय पौधों के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकारी प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार में अप्रमाणित हर्बल उत्पादों की बाढ़ है। असली सवाल यह है कि पारंपरिक दावों को वैज्ञानिक परीक्षण की कसौटी पर कब कसा जाएगा — क्योंकि लोक उपयोग और नैदानिक प्रमाण के बीच की खाई अभी बड़ी है। जब तक नियंत्रित अध्ययन नहीं होते, इन पौधों को 'वरदान' कहना उपभोक्ता को भ्रमित कर सकता है और चिकित्सकीय देरी का कारण बन सकता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लामज्जक क्या है और यह किस पौधे परिवार से है?
लामज्जक घास कुल (Poaceae) से संबंधित एक बहुवर्षीय औषधीय जड़ी-बूटी है। यह एक बार उगने के बाद अनुकूल परिस्थितियों में वर्षों तक जीवित रहती है और आयुर्वेद तथा लोक चिकित्सा में इसका उपयोग सदियों से होता आया है।
लामज्जक के पारंपरिक औषधीय उपयोग क्या हैं?
पारंपरिक चिकित्सा में लामज्जक को बुखार, गाउट (गठिया का एक प्रकार), रूमेटिज्म, जोड़ों के दर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है। हालाँकि ये दावे मुख्यतः लोक परंपरा पर आधारित हैं और किसी भी उपयोग से पहले चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।
लामज्जक की खेती कब और कैसे करें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार लामज्जक की रोपाई का उचित समय जून से जुलाई के बीच है। मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर यह समय बदल सकता है, इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
क्या लामज्जक का उपयोग सभी के लिए सुरक्षित है?
नहीं, सभी के लिए इसका उपयोग एक समान सुरक्षित नहीं माना जा सकता। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में प्राकृतिक पौधे भी एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग शुरू करने से पहले आयुर्वेदाचार्य या चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है।
नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने लामज्जक के बारे में क्या कहा है?
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने लामज्जक को एक महत्वपूर्ण बहुवर्षीय औषधीय पौधा बताया है और इसके पारंपरिक उपयोगों को रेखांकित किया है। बोर्ड ने इसकी सही पहचान और विशेषज्ञ की देखरेख में उपयोग पर भी जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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