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थाईलैंड दो उइगर पुरुषों को चीन न भेजे — ह्यूमन राइट्स वॉच की माँग, प्रताड़ना का खतरा

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थाईलैंड दो उइगर पुरुषों को चीन न भेजे — ह्यूमन राइट्स वॉच की माँग, प्रताड़ना का खतरा

सारांश

थाईलैंड में 2014 से हिरासत में रखे दो उइगर पुरुषों को चीन भेजे जाने का खतरा मँडरा रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा — यह 'वापसी निषेध' सिद्धांत का उल्लंघन होगा। बैंकॉक के चीनी दूतावास की माँग और UNHCR की पहुँच पर रोक ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

मुख्य बातें

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने थाईलैंड से माँग की है कि दो उइगर पुरुषों को चीन न भेजा जाए।
दोनों व्यक्ति 2014 से हिरासत में हैं; उस समय एक की उम्र 14 वर्ष थी।
21 अक्टूबर 2026 को शाही माफी के बाद इन्हें बैंकॉक सेंट्रल जेल से 'सुआन फ्लू' डिटेंशन सेंटर भेजा गया।
चीनी दूतावास ने अगस्त में इन्हें वापस भेजने की माँग की थी।
UNHCR को इन व्यक्तियों से मिलने की बार-बार अनुमति नहीं दी गई।
HRW ने थाईलैंड को अंतरराष्ट्रीय 'वापसी निषेध' (non-refoulement) सिद्धांत के तहत बाध्य बताया।

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने थाईलैंड सरकार से आग्रह किया है कि वह दो उइगर पुरुषों को जबरन चीन न भेजे, क्योंकि वहाँ उन्हें गंभीर प्रताड़ना और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों का खतरा है। सुरक्षा कारणों से इन दोनों व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, और इन्हें 21 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक की जेल से 'सुआन फ्लू' इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित किया गया — जो कथित तौर पर निर्वासन की तैयारी का संकेत है।

मामले की पृष्ठभूमि

थाई अधिकारियों ने इन दोनों उइगर व्यक्तियों को 2014 से हिरासत में रखा हुआ है। उस समय इनमें से एक की उम्र महज 14 वर्ष थी। जनवरी 2020 में इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर से भागने की कोशिश से जुड़े अपराधों के लिए दोनों को जेल की सजा सुनाई गई थी।

अपनी सात साल की सजा का बड़ा हिस्सा पूरा करने के बाद, शाही माफी मिलने पर इन्हें बैंकॉक सेंट्रल जेल से 'सुआन फ्लू' डिटेंशन सेंटर भेजा गया। गौरतलब है कि थाईलैंड की जेलों में उइगर बंदियों की स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही है।

चीनी दूतावास की माँग और थाई रुख

थाई विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने एक संसदीय समिति को बताया कि अगस्त में बैंकॉक स्थित चीनी दूतावास ने इन दोनों व्यक्तियों को चीन वापस भेजने की माँग की थी। थाईलैंड के इमिग्रेशन कानूनों के तहत, यदि ये व्यक्ति निर्वासन पर कोई आपत्ति नहीं जताते, तो उन्हें वापस भेजा जा सकता है।

हालाँकि, इन व्यक्तियों के वकीलों ने HRW को बताया है कि उन्होंने थाई अधिकारियों को पहले ही सूचित कर दिया है कि वे चीन नहीं जाना चाहते। इसके बावजूद, थाई इमिग्रेशन अधिकारियों ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) को इन व्यक्तियों से मिलने की अनुमति नहीं दी, जिससे उनके शरणार्थी दर्जे का निर्धारण नहीं हो पाया है।

HRW की माँग और अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्व

HRW की एशिया डायरेक्टर एलेन पियर्सन ने कहा, 'थाईलैंड की पिछली सरकारों ने उइगर लोगों को सालों तक अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखा और फिर बीजिंग की माँग मानते हुए उन्हें चीन भेज दिया, जहाँ वे जबरन गायब कर दिए गए।'

पियर्सन ने आगे कहा, 'थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को चीन में लोगों को जबरन वापस भेजने का सिलसिला रोकना चाहिए और इन दोनों उइगर व्यक्तियों को किसी सुरक्षित तीसरे देश जाने की अनुमति देनी चाहिए।'

HRW ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि थाईलैंड अंतरराष्ट्रीय कानून के 'वापसी निषेध' (non-refoulement) सिद्धांत का पालन करने के लिए बाध्य है, जिसके अनुसार किसी को भी ऐसे स्थान पर नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसे उत्पीड़न, यातना या जीवन को खतरे का वास्तविक जोखिम हो।

व्यापक संदर्भ: उइगर और आसियान देश

यह ऐसे समय में सामने आया है जब चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के खिलाफ दमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश बीजिंग के आर्थिक और कूटनीतिक दबाव में उइगर शरणार्थियों को वापस भेजते रहे हैं।

यह थाईलैंड से जुड़ी पहली ऐसी घटना नहीं है — 2015 में थाई अधिकारियों ने 100 से अधिक उइगर व्यक्तियों को चीन वापस भेज दिया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई थी। आगे के घटनाक्रम पर UNHCR और मानवाधिकार संगठनों की नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'वापसी निषेध' का दायित्व प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत फिर भी लागू होता है — यह विरोधाभास थाई नीति-निर्माताओं के लिए असहज सवाल खड़े करता है। 2015 में 100 से अधिक उइगरों को वापस भेजे जाने की पुनरावृत्ति की आशंका और UNHCR की पहुँच पर रोक बताती है कि यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णय है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थाईलैंड में उइगर पुरुषों का मामला क्या है?
दो उइगर पुरुषों को थाईलैंड ने 2014 से हिरासत में रखा है। 21 अक्टूबर 2026 को शाही माफी मिलने के बाद इन्हें बैंकॉक की जेल से इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर भेजा गया, जो चीन को निर्वासित किए जाने की तैयारी मानी जा रही है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने थाईलैंड से क्या माँग की है?
HRW ने थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल से माँग की है कि वे इन दोनों उइगर व्यक्तियों को चीन न भेजें और उन्हें किसी सुरक्षित तीसरे देश जाने की अनुमति दें। संगठन का कहना है कि चीन भेजे जाने पर इन्हें प्रताड़ना और जबरन गुमशुदगी का गंभीर खतरा है।
'वापसी निषेध' (non-refoulement) सिद्धांत क्या है और यह यहाँ कैसे लागू होता है?
'वापसी निषेध' अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूल सिद्धांत है जिसके तहत किसी को भी ऐसी जगह नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसे उत्पीड़न, यातना या जीवन को खतरा हो। HRW का तर्क है कि थाईलैंड इस सिद्धांत का पालन करने के लिए बाध्य है, चाहे वह 1951 की शरणार्थी संधि का हस्ताक्षरकर्ता हो या नहीं।
UNHCR को इन व्यक्तियों से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
थाई इमिग्रेशन अधिकारियों ने बार-बार UNHCR को इन दोनों व्यक्तियों से मिलने की अनुमति नहीं दी, जिससे उनके शरणार्थी दर्जे का निर्धारण नहीं हो पाया है। HRW इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रक्रियाओं में गंभीर बाधा मानता है।
थाईलैंड में उइगरों के साथ पहले क्या हुआ है?
2015 में थाईलैंड ने 100 से अधिक उइगर व्यक्तियों को चीन वापस भेज दिया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई थी। HRW के अनुसार, उस समय वापस भेजे गए लोगों में से कई जबरन गायब कर दिए गए।
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